चीन ने दी नई बाढ़ की चेतावनी...
नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, 359 लोगों की मौत, 910 लापता !
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार आठ जिलों में अब तक 359 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 910 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। वहीं भारत ने 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है और 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट का दौरा कर राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।
खोज और बचाव अभियान में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के 13,295 जवानों को तैनात किया गया है। बचाव अभियान जमीन के साथ-साथ हवाई रास्ते से भी चलाया जा रहा है। गुरुवार को 69 हवाई उड़ानों के जरिए 573 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रभावित इलाकों में करीब 3,500 लोगों के लिए स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई है। रसुवा और नुवाकोट को एक-एक करोड़ नेपाली रुपये तथा धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये की तत्काल राहत राशि दी गई है। बाढ़ से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया है। बीर अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, टीचिंग अस्पताल, सिविल अस्पताल, पाटन अस्पताल और पुलिस अस्पताल को अलर्ट पर रखा गया है।
प्रभावित और घायल लोगों के लिए मेडिकल टीमें, दवाएं, एंबुलेंस और रक्त की व्यवस्था की गई है। बाढ़ के कारण नेपाल की दूरसंचार व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है। करीब 70 टेलीकॉम साइट और टावर बंद हो गए हैं। मोबाइल नेटवर्क बहाल करने के लिए तकनीकी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई हैं। नेपाल टेलीकॉम और Ncell ने प्रभावित लोगों के लिए मुफ्त कॉल, डेटा और SMS जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। राहत अभियान के बीच नेपाल के लिए एक और खतरा सामने आया है। चीन ने भोटेकोशी नदी प्रणाली में दोबारा बड़ी बाढ़ आने की चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से में नदी का रास्ता बाधित होने से एक झील बन गई है। यदि यह प्राकृतिक जलाशय टूटता है तो निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आ सकती है।
अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और राहतकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। NDRRMA के आंकड़ों के अनुसार चितवन में 132, नवलपरासी ईस्ट में 82, धादिंग में 33, गोरखा में 30, नुवाकोट में 28, तनाहुन में 22, रसुवा में 17 और नवलपरासी वेस्ट में 15 लोगों की मौत हुई है। वहीं रसुवा में 161 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। लापता लोगों में नेपाल पुलिस, सेना, सशस्त्र पुलिस, कस्टम और इमिग्रेशन विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। भारत ने नेपाल में फंसे 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। इनमें त्रिशूली-I परियोजना के 63 कर्मचारी और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। हालांकि, 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
भारत ने राहत सामग्री और जरूरी दवाइयों से भरे दो विमान काठमांडू भेजे हैं। इसके साथ भारत की कुल आपातकालीन सहायता 47.5 टन हो गई है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद भी मांगी है। भारत के अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और रेड क्रॉस समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं राहत और पुनर्वास कार्यों में सहयोग कर रही हैं। सरकार ने ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी अतिरिक्त डीजल और पेट्रोल का भंडारण किया है। फिलहाल नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावितों तक राहत पहुंचाना और सड़क, पुल, बिजली, पानी व संचार जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल करना है। वहीं भोटेकोशी क्षेत्र में नई बाढ़ की चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।




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