G News 24 : प्रदेश में नया फायर एक्ट लागू,लेकिन नियमों का इंतजार,न जुर्माना लग पा रहा, न हो रही कार्रवाई !

 नियम बनाने की फाइल मंत्रालय और नगरीय प्रशासन विभाग के बीच अटकी...

प्रदेश में नया फायर एक्ट लागू,लेकिन नियमों का इंतजार,न जुर्माना लग पा रहा, न हो रही कार्रवाई !

आगजनी की घटनाओं पर नियंत्रण और इमारतों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश में नया कानून लागू कर दिया गया है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी नियम अब तक अधिसूचित नहीं हो पाए हैं। नतीजतन, कानून लागू होने के बावजूद दमकल विभाग के सामने व्यावहारिक और प्रशासनिक चुनौतियां बनी हुई हैं। व्यावसायिक परिसरों की अनिवार्य जांच से लेकर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तक, कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।

राज्य सरकार ने ‘मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं अधिनियम, 2026’ का गजट नोटिफिकेशन 3 सितंबर को जारी किया था। इस कानून से उम्मीद की जा रही थी कि प्रदेश में अग्नि सुरक्षा के मानकों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई होगी और आग लगने की स्थिति में दमकल सेवाओं की जवाबदेही तय की जा सकेगी। हालांकि, नियमों का मसौदा विभागीय स्तर पर लंबित होने से कानून के कई प्रावधानों को जमीन पर लागू करने में मुश्किलें सामने आ रही हैं।

न्यू मार्केट की आग ने खोली व्यवस्था की पोल

भोपाल के व्यस्त न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को छोले-भटूरे की एक दुकान में लगी आग ने अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बाजार में अतिक्रमण और संकरे रास्तों के कारण दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई। जानकारी के मुताबिक, दमकल को मौके पर पहुंचने में आधे घंटे से अधिक समय लगा। इस दौरान आग फैल गई और देखते ही देखते पांच से छह दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। घटना में तीन करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान बताया गया। नए फायर एक्ट को लेकर दावा किया गया था कि आपात स्थिति में सूचना मिलने के बाद दमकल सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम अधिकतम 10 मिनट रखने का लक्ष्य होगा। लेकिन न्यू मार्केट की घटना ने सवाल खड़ा किया कि जब बाजारों में अतिक्रमण, संकरे रास्ते और आपातकालीन पहुंच जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो आग लगने की स्थिति में त्वरित राहत कैसे सुनिश्चित होगी?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक इमारत में अग्नि सुरक्षा केवल आग बुझाने के उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए भवन की संरचना के अनुरूप फायर सेफ्टी प्लान, आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और नियमित निरीक्षण भी जरूरी हैं। यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी सत्यापन हो और कमियों पर समय रहते कार्रवाई की जाए, तो आग से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

उज्जैन में गणेश पंडाल में आग, सुरक्षा जांच पर सवाल

उज्जैन में 23 सितंबर को नीलगंगा क्षेत्र की संतराम सिंधी कॉलोनी में वैष्णोदेवी थीम पर बनाए गए गणेश पंडाल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग की चपेट में आने से 11 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा और सजावटी सामान जल गया। अस्थायी पंडालों में बिजली की वायरिंग, विद्युत कनेक्शन, ज्वलनशील सजावटी सामग्री और आग बुझाने के इंतजामों की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। यदि अस्थायी आयोजनों के लिए स्पष्ट सुरक्षा मानक, जांच की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, तो ऐसी घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। लेकिन नियमों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इस पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्वालियर के पेट्रोल पंप पर बाइक में लगी थी आग !

ग्वालियर में 9 सितंबर को शिंदे की छावनी स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाते समय एक बाइक में आग लग गई थी। इस घटना में एक युवक झुलस गया। पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील स्थानों पर अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यशील स्थिति, आपातकालीन बिजली बंद करने की व्यवस्था तथा कर्मचारियों को आग पर शुरुआती नियंत्रण का प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण है। ऐसे स्थानों पर त्वरित प्रतिक्रिया से आग को फैलने से रोकने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।

इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अग्नि सुरक्षा के लिए कानून बनाने के साथ-साथ उसके अनुरूप निरीक्षण, प्रशिक्षण, आपातकालीन तैयारी और नियमों के पालन की निगरानी भी जरूरी है।

नियम अधिसूचित नहीं होने से कौन-कौन से काम प्रभावित?

कानूनी और प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, नए अधिनियम में अधिकारियों को विभिन्न अधिकार दिए गए हैं, लेकिन कुछ अधिकारों के इस्तेमाल की प्रक्रिया निर्धारित करने में नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमों की अधिसूचना लंबित रहने से अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं।

1. असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई: अधिनियम की धारा 14 के तहत असुरक्षित इमारतों को सील करने का प्रावधान बताया गया है। ऐसी कार्रवाई में निरीक्षण, कमियों का निर्धारण, संबंधित पक्ष को सूचना देने और आदेश लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट होना जरूरी है। नियमों के अभाव में अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

2. व्यावसायिक परिसरों की जांच: बाजारों, दुकानों, होटल, अस्पतालों और अन्य व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन की जांच प्रभावी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। नियमित निरीक्षण और कमियां मिलने पर सुधार के लिए स्पष्ट प्रक्रिया नहीं होने से निगरानी प्रभावित हो सकती है।

 3. अस्थायी आयोजनों की सुरक्षा: अधिनियम की धारा 11 के तहत भीड़भाड़ वाले अस्थायी आयोजनों और मेलों के लिए सुरक्षा संबंधी सावधानियों का प्रावधान महत्वपूर्ण है। पंडालों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और मेलों में प्रवेश-निकास मार्ग, बिजली की सुरक्षित व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश आवश्यक हैं।

4. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना: अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए उल्लंघन की पहचान, संबंधित प्रावधान और निर्धारित प्रक्रिया का स्पष्ट होना जरूरी है। नियमों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर कार्रवाई को कानूनी चुनौती मिलने की आशंका बढ़ सकती है।

5. अधिकारियों की जवाबदेही: आग से बचाव के उपायों की जांच, कमियों की पहचान और आवश्यक कार्रवाई में संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्पष्ट प्रक्रिया और जिम्मेदारियों का निर्धारण नहीं होने पर जवाबदेही तय करना भी कठिन हो सकता है।

हालांकि, नियम अधिसूचित नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि अधिनियम के सभी प्रावधान स्वतः निष्प्रभावी हो गए हैं। किन प्रावधानों को सीधे लागू किया जा सकता है और किनके लिए नियम आवश्यक हैं, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा जारी अधिसूचनाओं के आधार पर तय होगा।

आखिर क्यों अटकी नियम बनाने की प्रक्रिया?

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी मिलने में करीब एक महीने का समय लगा। इसके बाद 3 सितंबर को अधिनियम का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। लेकिन कानून लागू होने के बाद भी इसके अनुरूप नियमों का मसौदा तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

सूत्रों के अनुसार, नियमों के मसौदे को लेकर संबंधित विभागों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इसके चलते फाइल मंत्रालय और नगरीय प्रशासन विभाग के बीच लंबित है। विभागीय स्तर पर निर्णय में देरी का असर कानून के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। फायर सेफ्टी जैसे संवेदनशील विषय में नियमों को अंतिम रूप देने में देरी का सीधा असर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था, निरीक्षण और उल्लंघनों पर कार्रवाई की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग समन्वय बनाकर नियमों को शीघ्र अंतिम रूप दें, ताकि कानून के उद्देश्य केवल कागजों तक सीमित न रहें।

कानून लागू, लेकिन प्रभावी अमल की चुनौती !

मध्य प्रदेश में नया फायर एक्ट लागू होने से अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद जगी थी। लेकिन नियमों की अधिसूचना लंबित रहने से कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर की घटनाएं बताती हैं कि आग से बचाव के लिए समय पर प्रतिक्रिया, सुरक्षित भवन, व्यवस्थित बाजार और प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

अब निगाहें मंत्रालय और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं। नियमों को कब तक अंतिम रूप दिया जाता है और उसके बाद निरीक्षण, सुरक्षा मानकों के पालन तथा कार्रवाई की व्यवस्था कितनी प्रभावी बनती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अग्नि सुरक्षा के मामले में देरी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है।

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