दिल्ली के संदेश के बाद शिवराज और मुख्यमंत्री की मुलाकातें ...
18 साल तक मध्य प्रदेश के मुखिया रहे शिवराज का दर्द पीएमओ तक पहुंचा !
भोपाल। 18 साल तक प्रदेश के मुखिया रहे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान अब इसी प्रदेश में बेरुखी का शिकार हैं। पीएमओ ने भी इसके बाद एक्शन लिया और प्रदेश बीजेपी में सियासी भूचाल आया। जिसके बाद खुद सीएम मोहन यादव ने सफाई दी और शिवराज से मुलाकात भी की।बीजेपी नेताओं की एक खास अदा है। वो जब आमने-सामने होते हैं यूं तपाक से मिलते हैं जैसे कोई गिला-शिकवा है ही नहीं और यूं अहसास करवाते हैं कि बीजेपी में सब कुछ ‘फील गुड टाइप’ है। मंच पर जब दो बड़े नेता आपस में मिलते हैं या मेल-मुलाकात की फोटोज शेयर करते हैं तब सब कुछ चंगा-सी वाला फील देते हैं, लेकिन अंदरखानों में क्या चल रहा है वो इससे एकदम अलग होता है।
जो जाहिर हुआ है शिवराज सिंह चौहान के एक खत से। शिवराज सिंह चौहान को ये लगने लगा है कि ये नए मिजाज का शहर है, जरा फासले से मिला करो। और यही फासला उन्हें ज्यादा रास नहीं आ रहा है। खासतौर से मप्र के मामले में। रास आना भी नहीं चाहिए। वो 8 साल सीएम की गद्दी पर रहे। उनकी प्रदेश में अनदेखी हो रही है। जिस प्रदेश में उन्होंने किसान पुत्र होने की पहचान बनाने में जी-जान एक कर दी। उसी प्रदेश में कृषि वर्ष मनाया जा रहा है और उन्हें भुलाया जा रहा है।
शिवराज की नाराजगी से भोपाल में हलचल
मूंग खरीदी के मामले पर हुए किसानों के आंदोलन पर भी शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि शिवराज ने केंद्र का रुख पहले ही साफ कर दिया था। उसके बावजूद प्रदेश के कृषि मंत्री ने उन्हें पत्र लिखा। इन सब मामलों को पीएमओ ने गंभीरता से लिया।
शिवराज के खत में छलका एमपी का दर्द
ये शिकायत खुद शिवराज सिंह चौहान ने की है। शिवराज सिंह चौहान का ये दर्द एक लेटर के जरिए छलका, जो उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के नाम लिखा, जिसमें 21 अलग-अलग बिंदुओं पर उन्होंने आपत्ति जाहिर की है। इन 21 बिंदुओं के पत्र में एक शिकायत एमपी में बेरुखी पर है। एक शिकायत इसी बात पर है कि कृषि वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन उन्हें कार्यक्रम में बुलाया नहीं जा रहा। उनकी शिकायत में ये भी कहा गया है कि कुछ कार्यक्रमों के दौरान वो खुद प्रदेश में मौजूद थे। उसके बाद भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि उनका प्रदेश से गहरा नाता रहा है। वो मौजूदा सांसद भी हैं और देश के कृषि मंत्री भी हैं।
सीट पर काम अटके, घोषणाएं भी अधूरी
एक शिकायत उनके संसदीय क्षेत्र की सड़क निर्माण से जुड़े काम को लेकर है। शिवराज ने मुख्यमंत्री रहते हुए 200 करोड़ की राशि कराई थी। इन सड़कों के लिए जितने के टेंडर मंजूर हुए थे, उसमें से तकरीबन 45 करोड़ बच गए थे। शिवराज जी बची हुई राशि से अपने क्षेत्र की दूसरी सड़कें बनवाना चाहते हैं, लेकिन अफसर उनकी इस मांग को घुमा रहे हैं।
इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान की कॉन्स्टिट्यूएंसी में पीपीपी मॉडल से मेडिकल कॉलेज बना है। उनकी शिकायत है कि अभी तक मेडिकल कॉलेज के लिए स्टाफ नहीं दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए जो घोषणाएं की थीं, उनमें से बुधनी की तकरीबन 25 घोषणाओं पर आज तक अमल नहीं किया गया। एक बात और बता दें। शिवराज सिंह चौहान पार्टी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो कभी आलाकमान या शीर्ष नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नहीं जाते, न ही नाराजगी जताते हैं।



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