पाकिस्तान की हकीकत बताते हुए मौलाना ने कहा कि देश बिखर रहा है...
मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर को दी चुनौती,'हिम्मत है तो वर्दी उतारो और...'चुनाव लड़ो !
पाकिस्तान में अब राजनेता आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर सवाल उठाने लगे हैं. वहां के सबसे प्रभावशाली धार्मिक नेता जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि सेना को अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहना चाहिए. जमीयत चीफ ने कहा कि अगर सेना राजनीतिक भूमिका निभाना चाहती है तो उसे चुनाव लड़ना चाहिए.पंजाब के कसूर में एक रैली को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर को चुनौती देते हुए कहा, 'अगर आप राजनीति करना चाहते हैं तो वर्दी उतारकर आएं, चुनाव लड़ें तो समझ हो जाएगा कि लोग सेना को कितने वोट देते हैं.'
बलूचिस्तान आउट ऑफ कंट्रोल: मौलाना
फजलुर रहमान ने दावा किया कि पाकिस्तान आर्मी ने बलूचिस्तान में अपना कंट्रोल खो दिया है. पाकिस्तान की हकीकत बताते हुए मौलाना ने कहा कि देश बिखर रहा है. उन्होंने पूछा कि शासन करने वाले लोग कहां हैं. जमीयत प्रमुख ने कहा, 'बलूच क्षेत्रों में विद्रोह हुए थे. पूरा बलूच क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो गया था. आज भी वहां पाकिस्तानी सरकार का कोई शासन नहीं है.' उन्होंने दावा किया कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति अब खैबर पख्तूनख्वा तक फैल गई है. उन्होंने कहा, 'हम बलूच क्षेत्र को रोके हुए थे, अब पश्तून क्षेत्र भी खून में डूब रहा है. हमें महज दो-तीन दिनों में 50 से ज्यादा शव मिले हैं.'
आसिम मुनीर की सिक्योरिटी स्ट्रैटजी पर सवाल उठाते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि नागरिकों को सशस्त्र समूहों का सामना करने के लिए कहना सामाजिक विभाजन को गहरा करेगा और पीढ़ियों तक हिंसा को बढ़ावा देगा. उन्होंने कहा, 'तुम चले जाओगे, लेकिन तुम मेरी मातृभूमि को आने वाली पीढ़ियों के लिए व्यक्तिगत प्रतिशोध की ओर धकेल रहे हो, इसे हमेशा के लिए हत्या और लूटपाट की ओर धकेल रहे हो.'
फजलुर रहमान ने क्यों की ये टिप्पणी?
हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा था कि उन्हें प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ लड़ाई में सेना का साथ देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि बिना नागरिकों के सहयोग के सेना आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकती है. फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर की अपील को खारिज कर दिया और कहा, 'देश की रक्षा करना सेना का संवैधानिक दायित्व है और नागरिकों से राज्य की लड़ाई लड़ने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए.'
मौलाना ने कहा, 'तुम अपने खून का एहसान मुझ पर क्यों थोप रहे हो? तुम हमारी मेहनत और पसीने से कमाए गए टैक्स से अपना वेतन ले रहे हो और फिर हमसे कहते हो कि हम मिलिशिया जुटाएं और सशस्त्र समूहों से लड़ें. मैंने कोई वेतन नहीं लिया है. मैं कोई सेना नहीं बनाऊंगा.'
मौलाना की आसिम मुनीर को दी नसीहत
फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर को नसीहत देते हुए कहा, 'मैं सत्ता में बैठे लोगों से यह भी कहना चाहता हूं कि आप अजनबी नहीं हैं. आप भी हमारे पाकिस्तानी हैं. आप भी हमारे भाई हैं जो कलमा पढ़ते हैं, लेकिन अगर आप इस देश में ही रहना चाहते हैं तो मेरे लिए भी एक सीमा है. मुझे अपनी सीमा पार नहीं करनी चाहिए.'
उन्होंने कहा, 'संसद की अपनी सीमा होती है, प्रत्येक विभाग का अपना अधिकार क्षेत्र होता है और इसी प्रकार सेना का भी अपना अधिकार क्षेत्र होता है. सेना की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं. अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दें, राजनीति पर नहीं.'
जमीयत चीफ की आसिम मुनीर को चुनौती
फजलुर रहमान ने कहा कि जनता जिसे चाहे उसे सरकार में बैठाएगी, ये उसका विशेषाधिकार है. उन्होंने आसिम मुनीर को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सेना वास्तव में शासन करना चाहती है तो उसे पर्दे के पीछे से राजनीति को प्रभावित करने के बजाय चुनाव लड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस राजनीति को किसी और को समझाइए. हमें समझाने की कोशिश मत कीजिए.


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