G News 24 : अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया और मोबाइल से बनाई दूरी !

 दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करेंगे...

अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया और मोबाइल से बनाई दूरी ! 

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा से पहले सोशल मीडिया और निजी मोबाइल से दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने अपना एक्स अकाउंट कार्यालय के जिम्मे और निजी मोबाइल नंबर अपने सचिव को सौंप दिया है। दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करेंगे।योध्या पदयात्रा से पहले लिया बड़ा फैसला; बोले- अब धर्म और जनसेवा पर रहेगा फोकस ! सोशल मीडिया से दूरी बनाते हुए उन्होंने मंदिर चंदे के हिसाब के लिए कानूनी लड़ाई का ऐलान किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अपने निजी मोबाइल फोन से दूरी बनाने का ऐलान किया है। दिग्विजय सिंह ने अपना आधिकारिक एक्स अकाउंट अब अपने कार्यालय के हवाले कर दिया है, जबकि निजी मोबाइल नंबर अपने सचिव को सौंप दिया है।

दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि अब वह अपने निजी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका यह नंबर अब उनके सचिव सचिन वत्स द्वारा उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नंबर पर आने वाले महत्वपूर्ण संदेशों और सूचनाओं से सचिव उन्हें अवगत कराते रहेंगे। उन्होंने लिखा कि लोगों के सहयोग और विश्वास के लिए वह आभारी हैं। उनके इस फैसले को उनकी आगामी धार्मिक यात्रा की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

एक्स अकाउंट का बदला नाम

दिग्विजय सिंह का आधिकारिक एक्स अकाउंट पहले digvijaya_28 नाम से संचालित होता था। अब इसे बदलकर Office of Digvijaya Singh कर दिया गया है। यानी अब इस अकाउंट को उनका व्यक्तिगत अकाउंट न होकर कार्यालय का आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म माना जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि उन्होंने अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान वह किसी भी तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेंगे।

उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे 1000 किलोमीटर की पदयात्रा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक पदयात्रा करने की घोषणा की है। यह यात्रा करीब 1000 किलोमीटर लंबी होगी।

पहले उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से करने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में कार्यक्रम में बदलाव करते हुए इसे विजयादशमी के दिन शुरू करने का फैसला लिया गया। वर्ष 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर को पड़ रहा है, इसलिए यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर से होगी।

दिग्विजय सिंह का कहना है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं निकाली जाएगी। इसमें उनका उद्देश्य धार्मिक विषयों और श्रद्धालुओं से जुड़े मुद्दों को उठाना है।

बोले- अब धर्म की रक्षा के लिए काम करूंगा

दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह 80 वर्ष के हो चुके हैं और पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें पांच बार विधायक बनाया, दो बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा भेजा। अब उन्होंने पार्टी से कहा है कि उनकी जगह नए लोगों को अवसर दिया जाए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब वह अपना अधिक समय धर्म और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कार्यों में लगाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या यात्रा के दौरान वह किसी भी प्रकार का राजनीतिक बयान नहीं देंगे।

राम मंदिर चंदे के हिसाब की मांग

दिग्विजय सिंह ने अपनी पदयात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का हिसाब मांगना बताया है। उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने स्वयं राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था। उनका आरोप है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए चंदे और कुछ धार्मिक स्थलों के चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने कहा है कि वह इस विषय में कानूनी सलाह ले रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने ऐसे सभी श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने का आह्वान किया है, जिन्होंने राम मंदिर के लिए दान दिया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी रसीद के साथ इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं।

कारसेवक संतोष दुबे होंगे मुख्य अतिथि

दिग्विजय सिंह ने बताया कि उनकी यात्रा में किसी बड़े राजनीतिक नेता को मुख्य अतिथि नहीं बनाया जाएगा। इसके बजाय अयोध्या आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे को मुख्य अतिथि बनाया गया है। संतोष दुबे अयोध्या आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि धार्मिक यात्रा में राजनीतिक चेहरों की जगह आंदोलन और आस्था से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सोशल मीडिया से दूरी पर सियासी नजरें

दिग्विजय सिंह का सोशल मीडिया से दूरी बनाने का फैसला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आमतौर पर वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। अब उनका यह निर्णय बताता है कि वह आगामी समय में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके सार्वजनिक जीवन में एक नए चरण की शुरुआत के रूप में भी देख रहे हैं।

अयोध्या यात्रा को लेकर दिग्विजय सिंह लगातार तैयारियों में जुटे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि यह यात्रा राजनीति से अलग होगी और इसमें उनका फोकस धार्मिक मुद्दों एवं श्रद्धालुओं से जुड़े सवालों पर रहेगा।

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