G News 24 : अपनी जरूरत का 90% तेल खरीदने वाला भारत,अब बनेगा पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट का 'किंग'!

  IOCL ने इस प्रोजेक्ट पर 75000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है...

अपनी जरूरत का 90% तेल खरीदने वाला भारत,अब बनेगा पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट का 'किंग'!

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, लेकिन अब उसने ऐसा दांव चला है कि जल्द ही वो पेट्रोल-डीजल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट्स का रिकॉर्ड बना लेगा. भारत कच्चे तेल और गैस के लिए आयात पर निर्भर है. जरूरत को 80 से 85 फीसदी तक कच्चा तेल वो विदेशों से खरीदता है. 

कच्चे तेल की खरीद पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है. विदेशी से तेल खरीदने वाले भारत ने पेट्रोलियम एक्सपोर्ट में बड़ी सफलता हासिल की है. जो देश कच्चे तेल का आयात करता है, उसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल, ATF और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद बनाकर दुनिया के कई देशों को निर्यात करता है. 

भारत के पेट्रोलियम निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड  

पेट्रोलियम रिफाइनर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट्स के तौर भारत का दबदबा है. बीते वित्तीय वर्ष में भारत ने 46.8 अरब डॉलर का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किया. दावा ये भी किया जा रहा है कि भारत के एक्सपोर्ट में करीब 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है. जिस तरह से देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अपनी रिफाइनरी का विस्तार कर रहा है, भारत की रिफाइनिंग क्षमता तेजी के बढ़ रही है. दिसंबर 2026 तक IOCL की  नई रिफाइनिंग कैपेसिटी चालू होने वाली है. भारत की मौजूदा रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 258.1 मिलियन टन है. वहीं पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खपत 239 मिलियन टन है. 

कच्चा तेल खरीदकर पेट्रोल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेचता है भारत  

भारत की ओर से रिफाइनिंग कैपिसिटी को बढ़ाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं.नई रिफाइनरी के चालू होने के बाद IOCL की कुल रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) से बढ़कर 98.05 MMTPA के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है. IOCL ने इस प्रोजेक्ट पर 75000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से 53500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं.  

तेल पर अपनी ताकत बढ़ा रहा है भारत  

तेल कंपनी घरेलू जरूरतों को पूरान करने के बाद अतिरिक्त कैपेसिटी का इस्तेमाल पेट्रोल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट के लिए करने वाली है, जिससे कंपनी के कुल रेवेन्यू में पेट्रोलियम एक्सपोर्ट का हिस्सा 5% से बढ़कर लगभग 15% पर पहुंच सकता है.   पानीपत, वड़ोदरा और बरौनी की रिफाइनरियों में कैपिसिटी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.  

रिफाइनरी वर्तमान क्षमता     विस्तार के बाद

पानीपत         15 MMTPA        25 MMTPA

वडोदरा         13.7 MMTPA        18 MMTPA

बरौनी        6 MMTPA         9 MMTPA

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