आज का दिन सामान्य चक्र से 0.65 मिलीसेकंड पहले ही सिमट जाएगा,वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता !
अचानक बदल गई पृथ्वी की चाल,26 जुलाई को 24 घंटे होने से पहले ही क्यों खत्म हो जाएगा दिन !
26 जुलाई, रविवार को दिन पूरे 24 घंटे का नहीं होगा. आज का दिन सामान्य चक्र से 0.65 मिलीसेकंड पहले ही सिमट जाएगा. देखने में छोटा लगने वाला यह समय वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है.
विज्ञान की दुनिया में हर दिन कुछ न कुछ नया होता है. रविवार, 26 जुलाई का दिन भी सामान्य दिनों से अलग है. आज भले ही आपकी घड़ी टिक-टिक करके 24 घंटे ही दिखाएगी, लेकिन असल में आज पृथ्वी सामान्य से 0.65 मिलीसेकंड तेजी से अपना चक्कर पूरा कर लेगी. पलक झपकाने से कम समय वाले इस बदलाव को हम और आप भले ही महसूस न कर पाएं, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह नन्हा सा टाइम गैप चिंता का कारण बन गया है. आखिर आज धरती जल्दी से अपना चक्कर कैसे पूरा कर लेगी और इसका असर आप पर क्या पड़ेगा.
रविवार, 26 जुलाई को साल 2026 का छोटा दिन दर्ज किया जाने वाला है. यह बदलाव इतना छोटा है कि आम इंसान को इसका अहसास तक नहीं होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दिन मानक 24 घंटे यानी 86,400 सेकेंड से मात्र 0.65 मिलीसेकंड छोटा रहेगा.
पलक झपकाने से भी कम समय के इस फेरबदल से इंसानी जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन समय के इस छोटे आंकड़े के पीछे एक बड़ा सच छिपा हुआ है. धरती की घूमने की रफ्तार में ऐसा बदलाव आ रहा है, जो पिछले 36 लाख सालों में नहीं देखा गया और इसकी सबसे बड़ी वजह क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन है.
क्या है 26 जुलाई का सच?
इंटरनेशनल अर्थ रोटेशन एंड रेफरेंस सिस्टम्स सर्विस के डेटा के आधार पर टाइम-एंड-डेट ने बताया है कि 26 जुलाई 2026 को धरती सामान्य से 0.65 मिलीसेकंड तेजी से एक चक्कर पूरा करेगी.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव बीते साल के मुताबले थोड़ा कम है. 10 जुलाई 2025 को दर्ज किया गया सबसे छोटा दिन मानक समय से 1.37 मिलीसेकंड छोटा था. इस साल का आंकड़ा लगभग आधा है, जिससे संकेत मिलता है कि धरती की तेजी से घूमने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी पड़ रही है.
पृथ्वी की रफ्तार बदलने का कारण?
धरती के घूमने की रफ्तार कभी भी एक समान या स्थिर नहीं रहती है. यह समुद्री लहरों, वायुमंडलीय दबाव और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण लगातार बदलती रहती है.
लीप सेकेंड क्या है?
ग्लोबल टाइम को कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम से तय किया जाता है. जब पृथ्वी का चक्कर लगाने का समय तय मानकों से भटकने लगता है, तो समय का संतुलन बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक लीप सेकेंड जोड़ते या घटाते हैं.
क्लाइमेट चेंज से सुस्त हो रही है धरती,36 लाख सालों का सबसे बड़ा बदलाव
यूनिवर्सिटी ऑफ वियना और ETH ज्यूरिख के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्च के मुताबाकि, जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के दिन प्रति सदी 1.33 मिलीसेकंड की दर से लंबे हो रहे हैं. प्राचीन जीवाश्मों और एडवांस्ड मशीन लर्निंग की सहायता से रिसर्चर्स ने पाया कि दिन लंबे होने की यह रफ्तार बीते 36 लाख सालों में सबसे तेज है.
ग्लेशियर पिघलना है बड़ा कारण
ध्रुवों पर जमा बर्फ पिघलकर भूमध्य रेखा की ओर बह रही है. जब किसी घूमती हुई वस्तु का द्रव्यमान सेंटर से दूर चला जाता है, तो उसकी घूमने की गति धीमी हो जाती है.
GPS, स्पेस मिशन और तकनीक पर मंडराता खतरा
भले ही मिलीसेकंड्स का यह फेरबदल बहुत छोटा है, लेकिन हाई-टेक सिस्टम्स के लिए यह बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. आपके फोन का मैप, एयरप्लेन लैंडिंग और समुद्री जहाज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करते हैं कि किसी खास मिलीसेकंड में पृथ्वी की सटीक स्थिति क्या है. अगर पृथ्वी के घूमने का मॉडल जरा सा भी चूक जाता है, तो जीपीएस लोकेशन में अंतर आने लगता है.



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