अब स्पीड पोस्ट या डाक के बजाय ई-ऑफिस और ईमेल से होगा रूटीन काम...
अब 100% पेपरलेस होगा भारतीय रेलवे, कागजी पत्राचार पर तत्काल प्रभाव से लगी पूर्ण रोक !
पेपरलेस गवर्नेंस की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारतीय रेलवे ने अहम फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल, प्रोडक्शन यूनिट्स और विभागों के बीच होने वाले तमाम पारंपरिक और कागजी पत्राचार पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। अब रेलवे में रूटीन कामकाज के लिए स्पीड पोस्ट या डाक के जरिए कागजी चिट्ठियां नहीं भेजी जाएंगी। सारा पत्राचार केवल ई-ऑफिस प्लेटफार्म और आधिकारिक ईमेल आईडी के जरिए ही होगा। रेलवे बोर्ड के संयुक्त सचिव टी. श्रीनिवास द्वारा जारी इस आदेश को केवल मुख्यालयों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि सभी मंडलों, वर्कशाप और डिपो स्तर तक इसे कड़ाई से लागू करने की हिदायत दी गई है।
बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण के बावजूद मंडल, वर्कशाप और डिपो से रोजाना सैकड़ों की संख्या में रिमाइंडर, रिपोर्ट और जानकारियां कागजी प्रारूप में भेजी जा रही थीं। इसी को पूरी तरह बंद कराने के लिए यह सख्त आदेश जारी किया गया है। इससे न केवल कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि कार्यालयों में पुरानी कागजी फाइलों को स्टोर करने की बड़ी समस्या से भी हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। भारतीय रेलवे ने डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए नेशनल इन्फारमैटिक्स सेंटर के सहयोग से वर्ष 2019-2020 में 'ई-ऑफिस' सिस्टम को लागू किया था।
वर्तमान में यह डिजिटल व्यवस्था रेलवे के 17 जोन, 68 मंडल समेत लगभग 236 से अधिक इकाइयों में पूरी तरह सक्रिय है। इस प्लेटफार्म पर अब तक 1.6 करोड़ से अधिक डिजिटल रसीदें ऑनलाइन आ चुकी हैं और करीब 21 लाख से ज्यादा डिजिटल फाइलें ऑनलाइन प्रोसेस में दौड़ रही हैं। मौजूदा समय में देश भर के एक लाख 47 हजार से अधिक रेल अधिकारी और कर्मचारी इस ई-ऑफिस प्लेटफार्म पर एक्टिव हैं। इस बड़े बदलाव से पहले रेलवे कार्यालयों में रोजाना औसतन 40,000 से अधिक फाइलें और हजारों स्पीड पोस्ट टेबल-दर-टेबल घूमती थीं, जो इस डिजिटल क्रांति के बाद अब पूरी तरह बंद हो जाएंगी।
सिर्फ इन दो मामलों में मिलेगी कागजी छूट
रेलवे बोर्ड ने अत्यंत गोपनीयता और कानूनी अनिवार्यताओं को देखते हुए केवल दो मामलों को इस पाबंदी से बाहर रखा है -
- कर्मचारियों के खिलाफ चल रहे अनुशासनात्मक प्रकरण और अपील नियमों से जुड़े दस्तावेज।
- विजिलेंस और जांच से संबंधित अत्यंत गोपनीय फाइलें, जिनमें जांच के विवरण, दोषी और सजा का ब्यौरा दर्ज हो।
यह फैसला प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। 100 प्रतिशत पेपरलेस व्यवस्था से रोजाना औसतन दो से 2.5 लाख ए-फोर (A-4) साइज के पन्ने बचेंगे। विज्ञानी आंकड़ों के अनुसार एक टन कागज बनाने में लगभग 17 बड़े पेड़ कटते हैं। इस फैसले से हर साल हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। डाक और कागजी फाइलें ले जाने वाले वाहनों का संचालन बंद होने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
रेलवे में पहले से ही पेपरलेस वर्क किया जा रहा है। अब रेलवे बोर्ड के निर्देशों के तहत इस डिजिटल व्यवस्था को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा - सुस्कर विपुल विलासराव, सीपीआरओ, एसईसीआर


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