अमेरिकी सीनेट में पेश दो बड़े विधेयकों 'एंड H-1B एब्यूज एक्ट' और 'रूस प्रतिबंध...
अमेरिका द्वारा 'रूस पर 100% टैरिफ और H-1B वीजा पर रोक का भारत पर पड़े भी पड़ेगा असर !
अमेरिकी संसद के दो नए फैसले भारत के लिए दोहरी मुसीबत बन सकते हैं. जहां सीनेट में पेश नए बिल में H-1B वीजा पर 3 साल के बैन का प्रस्ताव है, वहीं रूस प्रतिबंध विधेयक पास होने से भारतीय निर्यात पर 100% टैरिफ का खतरा पैदा हो गया है. आईटी सेक्टर, भारतीय छात्रों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाले ये दोनों कड़े कदम भारत-अमेरिका संबंधों को एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला सकते हैं.
अगर ये दोनों प्रस्ताव पूर्ण रूप से कानून का रूप लेते हैं, तो इसका असर भारतीय आईटी पेशेवरों, विदेश में पढ़ने वाले छात्रों से लेकर भारत की पूरी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है. इन दोनों विधेयकों के कारण भारत और अमेरिका के रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में तनाव भी बढ़ सकता है.
अमेरिकी फैसलों का भारत पर क्या और कितना गहरा असर पड़ेगा..
1. अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया 'एंड H-1B एब्यूज एक्ट' (End H-1B Abuse Act)
इस विधेयक में नए H-1B वीजा जारी करने पर तीन साल के प्रतिबंध सहित कई कड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है. सीनेटर टिम शीही का तर्क है कि H-1B वीजा का मूल उद्देश्य अमेरिका में उन विशेष पदों को भरना था, जिनके लिए स्थानीय कुशल कर्मचारी नहीं मिलते. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां इसका इस्तेमाल कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी नागरिकों को नौकरी से हटाने के लिए कर रही हैं.
H-1B वीजा बिल अगर कानून बना तो भारत पर इसका क्या असर होगा?
1. अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही द्वारा पेश किया गया 'End H-1B Abuse Act' भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. भारत हर साल H-1B वीजा पाने वाले देशों में सबसे आगे रहता है.
2. यदि यह बिल पास होता है, तो अगले तीन साल तक नए H-1B वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लग जाएगी. इससे हजारों भारतीय इंजीनियरों, डॉक्टरों और आईटी एक्सपर्ट्स का अमेरिका जाकर काम करने का सपना अटक सकता है.
3. हर H-1B अर्जी पर 1 लाख डॉलर का अनिवार्य शुल्क लगाने का प्रस्ताव है. इतनी भारी लागत के चलते अमेरिकी और भारतीय आईटी कंपनियां (जैसे TCS, Infosys, Wipro) भारतीय प्रतिभाओं को अमेरिका भेजने से कतराएंगी.
4. अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद काम का अनुभव पाने की 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) के अवसर खत्म होने से भारतीय छात्रों के लिए वहां रुककर नौकरी पाना नामुमकिन जैसा हो जाएगा.
5. आश्रितों (Dependents) के वीजा पर रोक के चलते पेशेवर अपने जीवनसाथी और बच्चों को साथ नहीं ले जा सकेंगे.
2. 'रूस प्रतिबंध विधेयक' क्यों लाया गया?
अमेरिकी सीनेट में 86-12 के भारी बहुमत से पारित 'रूस प्रतिबंध विधेयक' का सीधा लक्ष्य रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसना है. चीन के बाद भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है.
'रूस प्रतिबंध विधेयक' अगर कानून बना तो इसका भारत पर क्या असर होगा?
1. 100% तक टैरिफ लग सकता है
इस बिल के तहत अमेरिका, रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक का टैरिफ लगा सकता है. इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यात (Exports) को भारी नुकसान पहुंचेगा.
2. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव के कारण भारत के लिए खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति पहले ही प्रभावित है. ऐसे में यदि अमेरिकी दबाव के कारण भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद या कम करना पड़ता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा.
3. भारतीय रिफाइनरियों और कंपनियों पर असर
भारत, चीन के बाद रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है (जून 2026 में भारत का आयात 34% बढ़ा था). इस कानून के बनने के बाद भारतीय तेल रिफाइनरियों (जैसे IOC, BPCL, Reliance आदि) को रूस से व्यापार जारी रखने पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों और वैश्विक बैंकिंग बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है.
4. राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है
अगस्त 2025 में जब अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, तो दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ठप हो गई थी. 100% टैरिफ लागू होने से दोनों देशों के राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों में फिर से बड़ा तनाव आ सकता है.
5. भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को चुनौती
भारत हमेशा से अपनी ऊर्जा जरूरतों और विदेश नीति से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेता आया है. अमेरिका का यह विधेयक भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को चुनौती देता है और उसे पश्चिमी देशों व रूस के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाने में भारी दबाव में डालता है.
फिलहाल क्या स्थिति रहेगी?
फिलहाल, H-1B वीजा बिल सीनेट में केवल पेश किया गया है, जबकि रूस प्रतिबंध बिल सीनेट से पास होकर आगे की विधायी प्रक्रिया में है. दोनों ही प्रस्तावों को अंतिम कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा की मंजूरी और अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत होगी. इसलिए, वर्तमान में H-1B वीजा प्रक्रिया और भारत का तेल व्यापार पुराने नियमों के तहत ही जारी है.



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