आसमान साफ है, और उत्तर भारत में उमस का टॉर्चर जारी है...
'मानसून आ गया'... फिर भी तप रहा उत्तर भारत,पानी क्यों नहीं बरस रहा? असली वजह सामने आई !
उत्तर भारत में उमस का टॉर्चर जारी है और आसमान साफ है, वहीं IMD का दावा है कि मानसून आ चुका है. जब मानसून आगे बढ़ रहा है, तो बारिश क्यों नहीं रही है, बादल कहां गायब है? एक ओर मौसम विभाग का दावा है कि मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन वहीं आसमान बिल्कुल साफ है.
अगर आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि जब मानसून आ रहा है, तो पानी क्यों नहीं बरस रहा?, तो जवाब मौसम की किसी गड़बड़ी में नहीं, बल्कि इसके विज्ञान में छिपा है. सैटेलाइट तस्वीरों और मौसम के नए मॉडल्स के जरिए जानते हैं कि आकिर कहां अटका है और उत्तर भारत में झमाझम बारिश का दौर कब से शुरू होने वाला है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है. अगले 3 से 4 दिनों में इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में पहुंचने के लिए हालात बिल्कुल अनुकूल हैं. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस उलझन को समझने के लिए मानसून के आगे बढ़ने और हर जगह भारी बारिस होने के बीच का अंतर जानना होगा.
क्या कह रही है सैटेलाइट तस्वीर?
हाल ही में आई INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों से जानकारी मिली है कि मानसून के बाद अभी मध्य भारत, पूर्वी राज्य, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हैं. वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत के आसमान में बादल गायब हैं. यानी मानसून की हवाएं उत्तर की तरफ बढ़ रही हैं, लेकिन वे सिस्टम अभी नहीं बने हैं जो भारी बारिश लाते हैं.
IMD के अनुसार, मानसून के आने का फैसला सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि हवा के बदले रुख, नमी और एक बड़े इलाके में लगातार होने वाली हलचल से होता है. इसलिए, तकनीकी रूप से मानसून किसी राज्य में एंट्री कर सकता है, भले ही वहां के शहरों में कुछ दिनों तक मौसम गर्म और सूखा ही क्यों न बना रहे.
बारिश न होने के पीछे का कारण
मौसम के जानकारों का कहना है कि इस समय बारिश रुकने की सबे बड़ा कारण है बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर सिस्टम का न होना.
कम दबाव का क्षेत्र
कम दबाव वाले क्षेत्र को मानसून का इंजन कहा जाता है. यह समुद्र से भारी मात्रा में नमी खींचकर उसे मध्य और उत्तर भारत की तरफ धकेलता है. इस इंजन के बिना, नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और बारिश सिर्फ इक्का-दुक्का जगहों पर ही होती है.
कब मिलेगी राहत?
मौसम के मॉडल्स इस बात का इशारा कर रहे हैं कि हिंद महासागर में भूमध्य रेखा के पास एक बड़ा मौसमी सिस्टम तैयार हो रहा है. आने वाले 4 से 7 दिनों मे यह बंगाल की खाड़ी की ओर निकलेगा, जिससे मानसून की हवाओं को ताकत मिलेगी.
इसकी वजह से बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनेगा और पश्चिमी भारत के ऊपर हवा का एक चक्रवात बन सकता है. ये दोनों सिस्टम मिलकर हवा में नमी बढ़ाएंगे और उत्तर भारत तक पानी पहुंचाएंगे. अगर मौसम का यह अनुमान सही साबित होता है, तो जुलाई के पहले हफ्ते में बारिश का दौर तेज होगा और दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के बाकी हिस्सों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और बारिश भी होगी.


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