हम हमारे हिस्से के पानी पर दावा करने वालों के हाथ काट देंगे."
ऑपरेशन सिंदूर की मार भूला पाकिस्तान,सीधे भारत को दे रहा धमकी,
सिंधु जल संधि विवाद को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत को गीदड़भभकी दी है. पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा है कि इस्लामाबाद उन हाथों को काट देगा, जो सिंधु जल संधि (IWT) के तहत इस्लामाबाद के हिस्से पर दावा करने की कोशिश करेंगे. पाकिस्तान के मंत्रियों ने कहा कि नई दिल्ली को आवंटित पानी के बहाव में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत पर पानी की सप्लाई को कंट्रोल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर इस्लामाबाद के पानी के अधिकारों को खतरा हुआ तो इसके गंभीर नतीजे होंगे.
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक मलिक ने कहा, "पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में एक नल का कंट्रोल है. उनका कहना है कि वे पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं बहने देंगे. हम हमारे हिस्से के पानी पर दावा करने वालों के हाथ काट देंगे." इसके अलावा पाकिस्तानी ब्रॉडकास्टर 24NewsHD और कईं अन्य पाकिस्तानी मीडिया ने भी इन टिप्पणियों पर खबर की है.
क्या बोले पाकिस्तान के सूचना मंत्री
मुसादिक मलिक ने संधि के तहत पानी के अपने हिस्से की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि भारत को पाकिस्तान के लिए आवंटित पानी के बहाव में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा सस्पेंड नहीं किया जा सकता.
तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि अभी भी लागू है, क्योंकि भारत के रुख को किसी भी मंच पर स्वीकार नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बार-बार कहा है कि पानी हमारी जीवन रेखा है और हमारी रेड लाइन भी है. तरार ने तर्क दिया कि संधि के तहत पाकिस्तान के अधिकार अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित हैं.
सिंधु जल संधि पर सेमिनार करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तानी मंत्रियों ने घोषणा की कि इस्लामाबाद मंगलवार को सिंधु जल संधि पर पहले अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार की मेजबानी करेगा. तरार ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए कानूनी विशेषज्ञ, जल विशेषज्ञ और विदेशी प्रतिनिधि पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं.


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