G News 24 : उच्च सदन में NDA रचेगा नया इतिहास,कांग्रेस की बढ़ी टेंशन !

 राज्यसभा के रण की रणभेरी ...

उच्च सदन में NDA रचेगा नया इतिहास,कांग्रेस की बढ़ी टेंशन !

देश के सियासी गलियारे में एक बार फिर राज्यसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी सातवें आसमान पर पहुंच गई है. हालिया राज्य स्तरीय चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच इस महीने के आखिर में उच्च सदन की 27 सीटों को भरने के लिए चुनाव होने जा रहे हैं. 

देश की 27 राज्यसभा सीटों पर 21 जून को होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. इस चुनाव के बाद भाजपा नेतृत्व वाले NDA को उच्च सदन में 150 से अधिक सीटों के साथ मजबूत बहुमत मिलने का भरोसा है. वहीं, मध्य प्रदेश में क्रॉस-वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है, जबकि गुजरात में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पहली बार पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है.

18 जून को होने वाले इस चुनाव पर पूरे देश की पैनी नजर है, क्योंकि इसमें 'क्रॉस-वोटिंग'  का साया मंडरा रहा है. इस बीच, सत्ताधारी दल भाजपा (BJP) ने अपनी कमर कस ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया. चुनावी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून तय की गई है.

राज्यसभा का मौजूदा समीकरण और NDA का मिशन 

वर्तमान में 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के पास 148 सांसद हैं. इस चुनाव में जिन 27 सीटों पर वोटिंग होनी है, उनमें से भाजपा को 17 से 18 सीटें जीतने का पूरा अनुमान है. यदि ऐसा होता है, तो राज्यसभा में NDA का आंकड़ा 150 के पार चला जाएगा. यह आंकड़ा NDA को संसद के उच्च सदन में 'दो-तिहाई बहुमत' के बेहद करीब ले जाएगा, जिससे सरकार के लिए किसी भी बड़े या कड़े संवैधानिक बिल को पास कराना बेहद आसान हो जाएगा.

इन दिग्गजों का कार्यकाल हो रहा है खत्म !

  • 1. मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष)
  • 2. एच.डी. देवेगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री)
  • 3. दिग्विजय सिंह (मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री)
  • 4. जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू (केंद्रीय मंत्री)

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सांसें अटकीं

राज्यसभा चुनाव में सबसे बड़ा रोमांच और अनिश्चितता क्रॉस-वोटिंग को लेकर होती है. इस बार मुख्य फोकस मध्य प्रदेश पर है, जहां 3 सीटों पर चुनाव होना है. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल तो है, लेकिन उसके पास सिर्फ 6 अतिरिक्त वोट हैं. ऐसे में अगर जरा सी भी क्रॉस-वोटिंग हुई, तो खेल बिगड़ सकता है. संकट तब और बढ़ गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया. अब कांग्रेस को किसी ऐसे कद्दावर चेहरे को उतारना होगा जो अपने कुनबे को एकजुट रख सके. दूसरी तरफ, भाजपा यहां आसानी से 2 सीटें जीतती दिख रही है, जिसमें केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन रेस में सबसे आगे हैं.

कर्नाटक और राजस्थान का क्या है हाल

अगर कर्नाटक की बात करे तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की राज्यसभा में वापसी तय मानी जा रही है. कर्नाटक में कांग्रेस के पास मजबूत संख्या बल है, जिससे वह 3 सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित मानकर चल रही है.

वहीं राजस्थान में भाजपा के खाते में 2 सीटें जाने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस को 1 सीट मिल सकती है. भाजपा की तरफ से रवनीत सिंह बिट्टू बड़े दावेदार हैं, तो कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम पर विचार कर रही है.

गुजरात में पहली बार कांग्रेस का 'सूपड़ा साफ'

इस चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे दर्दनाक खबर गुजरात से आ रही है. आगामी 21 जून को गुजरात से कांग्रेस के एकमात्र राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. गुजरात में राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 46 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, लेकिन विधानसभा में कांग्रेस के पास महज 12 विधायक बचे हैं. नतीजतन, इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि नहीं होगा. वहीं झारखंड की 2 सीटों पर कांग्रेस पूरी तरह अपनी सहयोगी पार्टी JMM के भरोसे है. शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई सीट सहित अन्य सीट के लिए कांग्रेस को उम्मीद है कि JMM गठबंधन धर्म निभाते हुए उसे 1 सीट देगी.

3 सीटों पर उपचुनाव का गणित भी समझें

  • 1. सुनेत्रा पवार की सीट: बारामती विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद सुनेत्रा पवार ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह सीट खाली हुई.
  • 2. देबाशीष सामंतराय की सीट: ओडिशा के इस नेता ने बीजू जनता दल (BJD) छोड़कर भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया था, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया.
  • 3. तीसरी सीट भी हालिया राजनीतिक दलबदल और इस्तीफे के कारण खाली हुई है.

अब अधिसूचना जारी होने के बाद भाजपा किसी भी वक्त अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है, जिसने विपक्षी खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं.

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