अमेरिकी हमलों में अब तक गई 38 लोगों की जान...
होर्मुज स्ट्रेट के माइनफील्ड में घुसे 2 ऑयल टैंकर,भीषण धमाके के बाद लगी आग !
इस वक्त अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को हिला देने वाली खबर मिडिल ईस्ट से सामने आ रही है. ताजा जानकारी के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को दावा किया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के दक्षिणी हिस्से में एक माइनफील्ड में प्रवेश करने के बाद दो बड़े तेल टैंकरों में भीषण धमाके हुए और वे आग की लपटों में घिर गए.
ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित इस खबर के बाद वैश्विक तेल बाजार और रणनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है. IRGC नेवी ने इस घटना के तुरंत बाद चेतावनी जारी करते हुए इस बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया है और इसे व्यावहारिक रूप से बंद करने का ऐलान कर दिया है.
अमेरिकी इंटेलिजेंस ने जहाजों को किया गुमराह: ईरान
ईरानी सेना ने इस पूरी घटना का ठीकरा सीधे तौर पर अमेरिका पर फोड़ा है. IRGC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की धोखाधड़ी और उकसावे के कारण दोनों ऑयल टैंकरों ने दक्षिणी होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई बारूदी सुरंगों के रास्ते से गुजरने की कोशिश की. जहाजों ने माइन वाले संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ईरानी नौसेना की ओर से दी गई कड़े इनपुट और चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा इस भयानक विस्फोट और आग के रूप में सामने आया है. हालांकि, ईरानी मीडिया और सेना के इन दावों की अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण या उन देशों द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है, जिनके ये जहाज थे.
अब तेल या गैस की एक बूंद भी नहीं निकलने देंगे: ईरान
ये घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है. IRGC ने बेहद कड़े शब्दों में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना के ऑपरेशन और अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से सील रहेगा.
ईरानी नौसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि इस गतिरोध के जारी रहने तक इस पूरे इलाके से किसी भी प्रकार के केमिकल फर्टिलाइजर, कच्चे तेल या गैस की एक बूंद भी एक्सपोर्ट करना नामुमकिन होगा. इसके साथ ही उन्होंने अन्य वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों को आगाह किया है कि वे अमेरिकी दावों के झांसे में न आएं और अपनी संपत्ति व जान बचाने के लिए इस प्रतिबंधित माइनफील्ड वाले रूट से दूर रहें.
ईरान पर US का हमला; 38 लोगों की मौत, 400 से ज्यादा घायल
इस बीच आपको बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक खूनी युद्ध का रूप ले चुका है. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला आंकड़ा जारी करते हुए बताया कि देश के कई प्रांतों में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए ताबड़तोड़ हमलों में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 400 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं. ताजा जानकारी के अनुसार, अमेरिका के ताजा हमले में 3 और लोगों की मौत हो गई है.
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, गुरुवार देर रात से शुरू हुआ अमेरिकी बमवर्षकों का यह कहर शुक्रवार सुबह तक जारी रहा. इस भीषण सैन्य कार्रवाई से ईरान के होर्मोजगान, बुशहर, सिस्तान-बलूचिस्तान, खुजेस्तान और लोरेस्तान प्रांत पूरी तरह दहल उठे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मलबे से निकाली गई लाशों में तीन महिलाएं और 18 साल से कम उम्र का एक बच्चा भी शामिल है. वहीं, 47 घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है.
चाबहार पोर्ट का कंट्रोल टावर जमींदोज
इस अमेरिकी हमले का सबसे बड़ा रणनीतिक असर भारत के सहयोग से विकसित हो रहे चाबहार के शाहिद कलंतरी पोर्ट पर पड़ा है. यहां का मैरीटाइम कंट्रोल टावर अमेरिकी मिसाइलों के हमले में पूरी तरह जमींदोज हो गया.इस हमले पर तुरंत सफाई देते हुए US सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि उन्होंने चाबहार में ईरान के सर्विलांस टावर को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है. अमेरिका का दावा है कि यह फैसिलिटी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक बड़े मैरीटाइम सर्विलांस नेटवर्क का हिस्सा थी. इसका इस्तेमाल ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा था. हालांकि, राहत की बात यह रही कि पोर्ट के मुख्य बर्थ (बंदरगाह) और कार्गो-हैंडलिंग फैसिलिटी सुरक्षित हैं और वहां कोई हताहत नहीं हुआ.
ईरान ने बहरीन, कुवैत और सीरिया पर दागीं मिसाइलें
जहां एक तरफ वाशिंगटन का दावा है कि उनके इस ऑपरेशन का मकसद केवल ईरानी सैन्य क्षमताओं, एयर डिफेंस साइट्स और कोस्टल सर्विलांस सिस्टम को कमजोर करना था, वहीं ईरान चुप बैठने के मूड में नहीं है. इस भीषण तबाही के बाद ईरान ने भी अमेरिका के खिलाफ ओपन वॉर का ऐलान कर दिया है. ईरानी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं. ईरान के मुताबिक, बहरीन, कुवैत, सीरिया और ओमान में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गई हैं. दोनों परमाणु शक्तियों और सैन्य महाशक्तियों के बीच शुरू हुई यह सीधी जंग अब पूरे विश्व को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर ले आई है.



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