पूर्व सीएमएचओ की बढ़ सकती हैं मुश्किलें,घोटाले के गंभीर आरोपों की विभागीय जांच शुरू हुई ...
डॉ.श्रीवास्तव के खिलाफ MP सिविल सेवा नियंत्रण तथा अपील 196 सिक्स के तहत होगी विभागीय जांच !
ग्वालियर। ग्वालियर के पूर्व सीएमएचओ डॉ सचिन श्रीवास्तव मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। आपको बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने सीएमएचओ पद से उनकी छुट्टी करते हुए उन्हें मूल पद पर भेज दिया है।लंबे समय से उन पर तमाम शिकायतें लंबित थीं और उन शिकायतों के चलते ही उन पर यह जांच गिरी। लेकिन अब उनकी मुसीबतें हैं, बढ़ती नजर आ रही है क्योंकि कई मामलों में उनकी विभागीय जांच शुरू हो गई है। विभागीय जांच के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव को आरोप पत्र देकर उनसे जवाब भी मांगा गया है।यदि वे जवाब नहीं देते हैं, तो विभाग उनके विरुद्ध एक पक्षीय कार्रवाई कर सकता है।
पूरा मामला डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव से जुड़े तमाम विसंगतियों को लेकर है। इसमें सबसे बड़ा घोटाला अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत चयनित की गई संस्थाएं उनके भुगतान को लेकर है। सचिन श्रीवास्तव के आरोप पत्र में राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत अनुमोदित संस्थाओं के चयन, पर्यवेक्षण और भुगतान संबंधी कार्यों के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव ने कथित तौर पर समानता, समाजसेवी संस्था से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध होने के बावजूद स्वयं को निर्णय प्रक्रिया से अलग नहीं रहा। इस तरह उन्होंने स्वयं से संबंधित संस्था को आर्थिक लाभ दिलाया। संस्था को कार्य आवंटन और वित्तीय लाभ होने दिए। इस संस्था को 2021 से 2024 तक तमाम आंखों संबंधित इलाज के लिए एक करोड़ आठ लाख रुपए का भुगतान किया गया। उनकी इस मिलीभगत से शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।
डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर एक और गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने दो हजार चौबीस में ही शासकीय आवास आवंटित करा लिया लेकिन इसके बावजूद वह मकान किराया भत्ता लेते रहे जबकि शासकीय आवास आवंटित होने पर आवास भत्ता लेना नियम विरुद्ध है। इसके साथ ही डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव ने शासकीय आवास के लाइसेंस शुल्क और किराया राशि का समाज योजन नहीं कराया। इस तरह उन्होंने शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही लक्ष्मी ग्रह प्रसूति गृह के कैंपस में लगी गुमती के मामले में भी डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव की गड़बड़ झाला उजागर हुई है। मनमाने तरीके से यह गुमटी लगाई गई और इसके चलते शासन को नुकसान हुआ।
इसके साथ ही डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर यह भी आरोप है कि क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर द्वारा जो जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए, उन पर इन्होंने नियमानुसार कार्रवाई नहीं की।साथ ही जांच के दौरान डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव से जो जानकारी और दस्तावेज मांगे, वह इन्होंने उपलब्ध नहीं कराए।डॉ सचिन श्रीवास्तव ने जांच में किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया। उनके इस कृत्य को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया। इसके साथ ही आरोप पत्र में यह भी उल्लेख है कि डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के विरुद्ध पूर्व में की गई शिकायत का निराकरण कलेक्टर ग्वालियर द्वारा करते हुए उन्हें हिदायत दी गई थी। कलेक्टर की इस हिदायत के बावजूद भी उन्होंने प्रशासनिक कार्यों और अपनी जिम्मेदारियों वो गंभीरता से नहीं लिया जिसके चलते मामले की फिर से समीक्षा और जांच आवश्यक मानी गई।
इस तरह, यदि देखें, तो डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन पर विभागीय जांच शुरू हो गई है। उन पर एक या दो नहीं, पांच गंभीर आरोप हैं और समय रहते उन्होंने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया। अब डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियंत्रण तथा अपील 196 सिक्स के तहत विभागीय जांच होगी और यदि वह इस जांच के दौरान उचित दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। संचालनालय, लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग ने डॉक्टर सचिन श्रीवास्तव पर पांच गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना होगा की सचिन श्रीवास्तव इन आरोपों का जवाब दे पाते हैं या उन पर कार्रवाई होती है?


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