G News 24 : ट्रस्ट की संपत्ति समाज के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए होती है,न कि निजी मुनाफे के लिए : HC

मंदिर ट्रस्ट कोई निजी जागीर नहीं,6 महीने में चुनाव कराने का आदेश...

ट्रस्ट की संपत्ति समाज के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए होती है,न कि निजी मुनाफे के लिए : HC 

ग्वालियर। ग्वालियर के सुप्रसिद्ध श्री अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास (अचलेश्वर मंदिर ट्रस्ट) के प्रबंधन और करोड़ों की संपत्ति के दुरुपयोग को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। माननीय न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकलपीठ ने निचली अदालत (दसवें जिला न्यायाधीश) द्वारा तकनीकी आधार पर ट्रस्ट की जांच रिपोर्ट और संदर्भ (Reference) को खारिज करने के आदेश को पूरी तरह से ‘शून्य’ और ‘गैर-कानूनी’ घोषित करते हुए पलट दिया है。

हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पब्लिक ट्रस्ट की संपत्ति समाज के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए होती है, न कि किसी के निजी मुनाफे के लिए। कोर्ट ने जिला प्रशासन और अदालत को न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा करने की उनकी कानूनी जिम्मेदारी याद दिलाई।

हाई कोर्ट ने झाड़ा पल्ला, पूर्व कार्यकारिणी की ‘अवैध’ बहाली रद्द!

निचली अदालत ने 15 नवंबर 2022 को अपने आदेश में कलेक्टर/पंजीयक द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट को तकनीकी कमियों का हवाला देकर खारिज कर दिया था और कमाल की बात यह थी कि जिस कार्यकारिणी का कार्यकाल साल २०१९ में ही खत्म हो चुका था, उसे दोबारा काम करने की इजाजत दे दी थी।

हाई कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा...

  •  “जब कार्यकारिणी का चुनाव आखिरी बार 2017 में हुआ था और उसका दो साल का कार्यकाल 2019 में ही समाप्त हो गया, तो बिना किसी वैध चुनाव के वह कार्यकारिणी अवैध रूप से काम कर रही थी। निचली अदालत का उन्हें दोबारा पद पर बिठाने का फैसला पूरी तरह से गलत था।”
  •  इस आदेश के साथ ही हाई कोर्ट ने पुरानी कार्यकारिणी को काम करने की दी गई अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

भक्त की याचिका से खुला था राज: शिव भक्त और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह राठौर ने मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों और फंड में भारी हेरफेर और कुप्रबंधन को देखते हुए पंजीयक (Registrar) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी.  जांच में खुली पोल: हाई कोर्ट के निर्देश पर जब संयुक्त निदेशक (कोष एवं लेखा) ने मंदिर के खातों का ऑडिट किया, तो वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग का एक बड़ा पुलिंदा सामने आया.

ट्रस्टी का इस्तीफा: वहीं दूसरी ओर, २०१७-२०१९ की कार्यकारिणी के कार्यकारी न्यासी नरेंद्र कुमार सिंघल ने भी ट्रस्ट में चल रही अवैध गतिविधियों से तंग आकर २०१९ में ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था और पंजीयक को इसकी जानकारी दी थी.

अदालत ने दिए कड़े निर्देश,६ महीने में निपटाएं मामला ...

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और इसकी लंबी पेंडेंसी को देखते हुए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए हैं:

 1. नया रिसीवर/प्रबंधन जारी रहेगा-अदालत ने निर्देश दिया है कि मामले के निपटारे तक पूर्व में कोर्ट द्वारा की गई व्यवस्था (रिसीवर या प्रबंधन समिति) सुचारू रूप से लागू रहेगी, ताकि मंदिर की व्यवस्था में कोई गड़बड़ न हो।

 2. 6 महीने में फैसला- प्रधान जिला न्यायाधीश, ग्वालियर को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले को किसी सक्षम पीठासीन अधिकारी को सौंपें, जो आगामी ६ महीनों के भीतर पूरे मामले की सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाए।

 3. जल्द से जल्द हों चुनाव-हाई कोर्ट ने साफ किया है कि कानून के मुताबिक अचलेश्वर महादेव न्यास की नई कार्यकारिणी का चुनाव बेहद पारदर्शी तरीके से जल्द से जल्द संपन्न कराया जाए。

इस कड़े फैसले के बाद अब ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर की करोड़ों की संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे रसूखदारों को बड़ा झटका लगा है और मंदिर के पैसों का दुरुपयोग करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसना तय हो गया है- संकेत साहू (एडवोकेट)मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय 

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