G News 24 : दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार !

जिमखाना क्लब मामले में कपिल सिब्बल से HC ने टोकते हुए पूछा कि,किस हैसियत से आपने....

 दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार !

लुटियंस दिल्ली का जिमखाना क्लब खाली करने के केंद्र के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, कोर्ट ने आदेश पर केंद्र को नोटिस भेजकर 8 हफ्ते में जवाब देने को कहा है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल भी पेश हुए और उनकी दलीलों पर कोर्ट ने उनसे कहा कि आपके याचिकाकर्ता को बाहर किया जा चुका है तो वह सदस्य की हैसियत से कैसे आ सकते हैं.

मंगलवार (26 मई, 2026) को हाईकोर्ट ने इस मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई की. एक याचिका क्लब के मेंबर विजय खुराना की है और दूसरी याचिका क्लब के स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से दाखिल की गई है. विजय खुराना काफी लंबे समय से क्लब के मेंबर हैं. एक और याचिका दिल्ली जिमखाना क्लब के अंतिम निर्वाचित निकाय की ओर से दाखिल की गई थी और उनकी तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए. सुनवाई की शुरुआत में कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की कि यह याचिका भी बाकी दो के साथ जोड़ दी जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल मामला सिर्फ अंतरिम राहत तक सीमित है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा, 'ऐसी कोई भी शर्त, जो सरकार को किसी संस्था या संपत्ति पर कब्जा लेने का अधिकार देती है, संविधान की भावना के खिलाफ है. यह आदेश सीधे संविधान के विपरीत है. कृप्या पूरे मामले की पृष्ठभूमि देखिए. एक बार सरकार परिसर में घुस गई, तो फिर उन्हें अंदर आने का कोई अधिकार नहीं बनता.' उन्होंने कहा कि वरना ये सीजर से सीजर के पास अपील करने जैसा होगा.

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले वाली बॉडी जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है. हाईकोर्ट ने कपिल सिब्बल से कहा कि आपके याचिकाकर्ता को बाहर किया जा चुका है… आप सदस्य की हैसियत से यहां नहीं आ सकते हैं. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा, 'हम सभी सदस्य हैं.'

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, 'नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने आपको पद से हटा दिया है और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने इस आदेश को बरकरार रखा.'  साल 2020 में एनसीएलटी और एनसीएलएटी में भी इस मामले की सुनवाई हुई थी, जिसमें इस बॉडी को हटा दिया गया था.

हाईकोर्ट ने उनसे पूछा कि आप याचिका सदस्य के तौर पर दाखिल कर रहे हैं या पूर्व समिति के तौर पर. कपिल सिब्बल ने इस पर जवाब दिया कि एक अनऑथराइज्ड व्यक्ति के खिलाफ भी नोटिस के हिसाब से कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने केंद्र की दलीलों पर कहा, 'मैं अनऑथराइज्ड नहीं हूं, मैं ऑथराइज्ड हूं और आप कह रहे हैं कि मैं आपको नोटिस नहीं दूंगा.'

कपिल सिब्बल ने कहा कि क्लॉज 4 एक इंपीरियल सरकार के तहत था. अब संविधान लागू होने के बाद ऐसा नहीं हो सकता. उन्होंने केंद्र की उस दलील पर यह तर्क दिया है, जिसमें कहा गया कि क्लॉज 4 में एक सिस्टम दिया गया है जिसके तहत हम लीज तय कर सकते हैं. इसमें उठाए जाने वाले अलग-अलग कदमों के बारे में बताया गया है. केंद्र की तरफ से एसजी मेहता ने कहा कि अधिग्रहण के तहत प्रावधान इस नियम में दिए गए  हैं. उनमें से एक है मुआवजा देना, मुआवजा पैसे के तौर पर हो सकता है या सरकार जमीन का दूसरा टुकड़ा दे सकती है.

Reactions

Post a Comment

0 Comments