G News 24: इलेक्शन हो गए एवं परिणाम भी आ गए लेकिन फिर भी सुलग रहा है बंगाल !

36घंटे में 4 हत्याएं,सुरक्षाबलों पर हमला...

इलेक्शन हो गए एवं परिणाम भी आ गए लेकिन फिर भी सुलग रहा है बंगाल !

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बुलडोजर चलाए जाने के वीडियो सामने आए हैं। टीएमसी की महुआ मोइत्रा का आरोप है कि टीएमसी दफ्तर को पूरी तरह से ढहा दिया गया। यह दफ्तर हॉग मार्केट इलाके में था। टीएमसी ने बीजेपी पर आरोप लगाए और भड़की।

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हिंसा भड़क उठी है। कोलकाता के न्यू मार्केट में TMC कार्यालय को बुलडोजर से गिरा दिया गया और आसपास की दुकानों में तोड़फोड़ हुई। पिछले 24 घंटों में 4 लोगों की हत्या हुई है, जिनमें बीजेपी और टीएमसी के 2-2 कार्यकर्ता शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल एक बार फिर चुनावी नतीजों के बाद हिंसा की आग में झुलसता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से लगातार हिंसा, तोड़फोड़ और राजनीतिक झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि 24 घंटे के भीतर चार लोगों की हत्या हो चुकी है, जिनमें दो भारतीय जनता पार्टी (BJP) और दो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं।

कोलकाता में TMC कार्यालय पर बुलडोजर

राजधानी कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में मंगलवार रात हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। यहां एक उग्र भीड़ ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय को निशाना बनाते हुए बुलडोजर से गिरा दिया। इस दौरान आसपास की दुकानों में भी जमकर तोड़फोड़ की गई, जिससे स्थानीय व्यापारियों में दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद  (TMC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी ने तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा का “परिवर्तन” अब बुलडोजर के साथ आ चुका है।

36 घंटे में 4 हत्याएं, दोनों दलों के कार्यकर्ता शामिल

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुई हिंसा में चार लोगों की जान चली गई। Bharatiya Janata Party (BJP) ने आरोप लगाया कि उत्तर 24 परगना के न्यू टाउन और हावड़ा के उदयनारायणपुर में उसके दो कार्यकर्ताओं की हत्या TMC समर्थकों ने की है।

वहीं TMC ने भी पलटवार करते हुए दावा किया कि कोलकाता के बेलियाघाटा और बीरभूम जिले के नानूर में उसके दो कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। दोनों दल एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने और राजनीतिक प्रतिशोध लेने का आरोप लगा रहे हैं।

संदेशखाली में सुरक्षाबलों पर हमला, 5 घायल

हिंसा का सबसे गंभीर रूप उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली क्षेत्र में देखने को मिला। बामनघेरी इलाके में गश्त कर रही पुलिस और केंद्रीय बलों पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया। इस दौरान फायरिंग भी की गई, जिसमें पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। घायलों में नाजाट थाने के ऑफिसर-इन-चार्ज, एक कांस्टेबल, एक महिला पुलिसकर्मी और केंद्रीय बलों के दो जवान शामिल हैं। मौके से एक बैग भी बरामद किया गया, जिसमें बम होने की आशंका जताई गई है। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।

चुनाव आयोग ने दिए सख्त निर्देश

बढ़ती हिंसा को देखते हुए Election Commission of India ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग का यह निर्देश तब आया जब चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सोमवार शाम से ही राज्य के कई हिस्सों में हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगीं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

TMC का आरोप—पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़

TMC ने आरोप लगाया है कि उसके कई पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाया गया और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में पूर्व विधायक अरूप बिस्वास के कार्यालय को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके अलावा बेलियाघाटा क्षेत्र में एक अन्य कार्यालय में तोड़फोड़ और एक कार्यकर्ता की पिटाई की घटना सामने आई है। TMC ने यह भी दावा किया कि पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित कार्यालय पर भी हमला हुआ।

भाजपा पर गंभीर आरोप, माहौल गरमाया

TMC ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसके समर्थक सुनियोजित तरीके से हिंसा फैला रहे हैं। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा समर्थकों ने न्यू मार्केट इलाके में दुकानों और पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाया और अराजकता फैलाने की कोशिश की। TMC ने इसे “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि इससे स्थानीय व्यापारियों में डर का माहौल बन गया है। वहीं भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है और TMC पर ही हिंसा कराने का आरोप लगा रही है।

राजनीतिक प्रतिशोध की पुरानी परंपरा?

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव के बाद राजनीतिक दलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्य की राजनीतिक संस्कृति में यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जहां सत्ता परिवर्तन या चुनावी परिणामों के बाद हिंसा भड़क उठती है। इस बार भी वही पैटर्न देखने को मिल रहा है, चुनाव खत्म, नतीजे घोषित और फिर सड़कों पर टकराव। हालांकि प्रशासन और चुनाव आयोग इस बार सख्ती दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी चिंताजनक हैं।

आम जनता और व्यापारियों में डर

लगातार हो रही हिंसा का सबसे ज्यादा असर आम लोगों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। न्यू मार्केट जैसे व्यस्त इलाके में हुई तोड़फोड़ ने स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। कई दुकानदारों ने सुरक्षा की मांग की है और कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।

200 से ज्यादा FIR, 400 से ज्‍यादा गिरफ्तार…

चुनाव के नतीजों के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. भाजपा की बड़ी जीत और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल बाद सत्ता से बाहर होने के बाद राज्य के कई हिस्सों से हिंसा, तोड़फोड़ और झड़पों की खबरें सामने आईं. इन घटनाओं के बीच पुलिस प्रशासन ने अब स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है. प्रदेश के डीजीपी के मुताबिक, 200 से ज्‍यादा  एफआईआर दर्ज की गई है और 400 से ज्‍यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. 

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्ध नाथ गुप्ता ने कहा कि चुनाव के बाद भड़की हिंसा को लेकर सख्त कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि अब तक 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 433 लोगों को विभिन्‍न मामलों में गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही विभिन्न धाराओं में 1100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. डीजीपी के मुताबिक, इन कार्रवाइयों के बाद आज सुबह से किसी भी तरह की नई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है और हालात अब शांत हैं. 

जेसीबी से जुड़ी एक घटना पर उन्होंने कहा कि इस मामले को नियंत्रित किया गया है और आगे जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. जो पुलिस अधिकारी उस समय मौके पर मौजूद थे और उन्होंने सही तरीके से काम नहीं किया, उनके खिलाफ भी रिपोर्ट आने के बाद कदम उठाए जाएंगे. इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं और सभी को उनका पालन करना होगा. कमिश्नर ने यह भी बताया कि शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. कोलकाता में सीआरपीएफ की 65 कंपनियां तैनात हैं और 240 क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैयार हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.

राज्य में हालात को काबू में लाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है और निगरानी तेज कर दी गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और राजनीतिक दल मिलकर इस हिंसा को रोक पाएंगे या फिर पश्चिम बंगाल एक बार फिर लंबे समय तक अस्थिरता के दौर से गुजरेगा। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है और पूरे देश की नजरें बंगाल पर टिकी हुई हैं।


Reactions

Post a Comment

0 Comments