G News 24 : SIR वाला 'राहुल गांधी और कांग्रेस का एजेंडा एक्सपोज'

 SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर BJP का पहला रिएक्शन !

SIR वाला 'राहुल गांधी और कांग्रेस का एजेंडा एक्सपोज'

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को बड़ा फैसला सुनाया. SC ने कहा एसआईआर प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है, अपनी शक्तियों के बाहर नहीं. पूरी प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक करार नहीं दे सकते.' सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच बुधवार (27 मई) को अपना फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने ECI के बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने फैसला दिया है कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी कहकर रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वोटर लिस्ट के सामान्य रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है. कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है. कोर्ट ने आगे कहा, 'यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है.'

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गए हैं : बीजेपी 

बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गए हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक घोषित किया. क्या अब राहुल गांधी देश से माफी मांगेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से बिहार-पश्चिम बंगाल में कराए गए वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी SIR को वैध करार दिया है.शीर्ष अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है, ये संविधान की कसौटी पर खरा उतरा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बीजेपी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. 

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक घोषित किया. यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू से ही इसका विरोध किया क्योंकि वे भारतीय मतदाताओं के साथ नहीं बल्कि अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे. यह सही मायने में एक राष्ट्रविरोधी कृत्य था. क्या राहुल गांधी आज भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी मांगेंगे?'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के चलते पूरे SIR को अवैधानिक नहीं करार दे सकते. फ्री एंड फेयर इलेक्शन जरूरी है. यह सवाल उठाया गया कि क्या SIR करवाने का अभी कोई वैध कारण है. हमारा मानना है कि SIR के दौरान जो कदम उठाए गए वह जरूरत के मुताबिक थे.'

SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

अदालत ने आगे कहा, 'वोटर पर खुद को साबित करने का बोझ डालने की दलील दी गई. हम इसे नहीं मानते. अगर कोई अपने पुराने निवास से अलग रह रहा है, तब भी वह पुरानी प्रक्रिया (SIR) से अलग नहीं हो जाता. उसका या परिवार का नाम (पुराने SIR में) होगा. SIR में नाम कटने को नियम विरुद्ध नहीं कहा जा सकता. चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें अपनी लिस्ट में जगह दी. इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता. यह नहीं कहा जा सकता कि SIR का मकसद सिर्फ लोगों को बाहर करना था. अगर दस्तावेज सही न लगें तो चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में जगह देने से मना कर सकता है. इसका मतलब यह नहीं लगा सकते कि चुनाव आयोग लोगों की नागरिकता तय कर रहा है.'

SIR संविधान की कसौटी पर खरा उतरता है: SC

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हमारा निष्कर्ष है कि SIR संविधान और RP एक्ट की कसौटी पर खरा उतरता है. यह जितना विस्तृत काम है, उसके मद्देनजर चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है. चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता. हालांकि, वह संदिग्ध लोगों का मामला केंद्र सरकार को भेज सकता है.

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