ऑडियो वायरल होते ही GRMC प्रभारी पर गिरी गाज...
व्यापमं कांड फिर गरमाया,फर्जी डिग्री रैकेट के आरोपों से मचा हड़कंप !
ग्वालियर। गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में वायरल ऑडियो के बाद बड़ा एक्शन हुआ है, जिसमें छात्र शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटा दिया गया। ऑडियो में बर्खास्त एमबीबीएस छात्रों को पैसे लेकर डिग्री दिलाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे हड़कंप मच गया है। GRMC में फर्जी डिग्री और 16 लाख की डील के आरोप, सहायक पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल, इंटेलीजेंस जांच में जुटी।
ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) में एक वायरल ऑडियो के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। छात्र शाखा के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। ऑडियो में बर्खास्त एमबीबीएस छात्रों को पैसों के बदले डिग्री दिलाने की कथित बातचीत सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। ऑडियो में एक पूर्व छात्र 16-16 लाख रुपए की डील का आरोप लगा रहा है, जबकि प्रभारी की ओर से ज्यादा खर्च होने की बात कही जा रही है। इस खुलासे के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जांच एजेंसियां हरकत में आ गई हैं।
जहां एक ओर प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी पर कार्रवाई हुई है, वहीं उनके सहायक पंकज कुशवाह पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। इसे लेकर शिकायतकर्ता और अन्य लोगों ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिर एक ही मामले में अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।
डिग्री के बदले 16 लाख रुपये लेने का दावा, ऑडियो वायरल
इस मामले में कर्मचारी प्रशांत के साथ लेन-देन की बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है। हालांकि प्रशांत चतुर्वेदी ने इन आरोपों को निराधार बताया है और ऑडियो को फर्जी कहा है। साथ ही मानहानि का केस करने की बात कही है। इधर, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने मामले पर चुप्पी साध ली है। डीन ने कहा कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि व्यापम कांड के बाद 2006-10 बैच के 35 से अधिक छात्रों की जांच हुई थी, इनमें से 30 से ज्यादा को 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बावजूद कुछ छात्रों को डिग्री जारी की गई।
ये हुई बातचीत...
- पूर्व छात्र संदीप और शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी के बीच ऑडियो में ये बातचीत हुई है।
- संदीपः 15 दिन में ही तुमने 'लाठी' का काम कर दिया।
- प्रशांतः भैया, इनके काम पेंडिंग थे, इसलिए किए।
- संदीपः तुमने 5 नाम बताए थे, इसमें यह नाम नहीं था।
- प्रशांतः ये पुराने काम थे, जो रोक रखे थे।
- संदीपः तुम 16-16 लाख में डील कर रहे हो।
- प्रशांतः यूनिवर्सिटी में पैसा बहुत लगता है।
शिकायतकर्ता संदीप लहरिया का दावा...
हालांकि हम इस बातचीत की पुष्टि नहीं करते हैं। शिकायतकर्ता संदीप लहरिया का कहना है कि एमबीबीएस के बर्खास्त छात्रों को डिग्री नहीं दी गई तो इस मामले में जेयू व जीआरएमसी के अफसर जानकारी क्यों नहीं दे रहे? प्रशांत चतुर्वेदीं से बातचीत का ऑडियो मैंने ही वायरल किया है। इस मामले को उजागर करने के लिए कोर्ट की शरण में जाऊंगा।
जीवाजी विवि की परीक्षा नियंत्रक डॉ आशा कुमारी का कहना है कि कोई डिग्री मेरे कार्यकाल में जारी नहीं हुई। यह मामला मेरे अभी संज्ञान में नहीं आया है। मामला सामने आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जानकारी यह है कि एक आरटीआई इस संबंध में लगाई गई। तथ्यों का परीक्षण कर जवाब दिया जाएगा।
व्यापमं कांड के पुराने जख्म फिर हरे...
पूर्व मेडिकल स्टूडेंट संदीप लहारिया की शिकायत के बाद व्यापमं कांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने बताया कि 2006 से 2010 के बीच हुए घोटाले में 150 से अधिक छात्रों पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जबकि 30-35 एमबीबीएस छात्र संदिग्ध पाए गए थे। इन मामलों की सुनवाई अभी भी सीबीआई कोर्ट में जारी है।
2017 में बनी हाई पॉवर कमेटी की जांच के बाद करीब 30 से अधिक छात्रों को बर्खास्त किया गया था, जिनमें संदीप लहारिया भी शामिल थे। इसके बावजूद कुछ छात्रों को डिग्री दिए जाने के आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी डिग्री रैकेट का आरोप...
संदीप लहारिया ने आरोप लगाया है कि बर्खास्त छात्रों को नियमों के विपरीत डिग्री दी गई है। उनका दावा है कि यह पूरा रैकेट छात्र शाखा के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह द्वारा संचालित किया जा रहा था। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटाकर संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक, जयारोग्य अस्पताल (JAH) में अटैच कर दिया है।
इंटेलीजेंस भी हुई सक्रिय...
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलीजेंस एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। इंटेलीजेंस एसपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर दस्तावेज मांगे हैं और विस्तृत जांच शुरू कर दी है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
जीवाजी यूनिवर्सिटी पर भी आरोप !
शिकायत में जीवाजी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गोपनीय शाखा और परीक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर फर्जी डिग्री जारी करने में शामिल होने का दावा किया गया है। साथ ही आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी न देने और रिकॉर्ड छिपाने के भी आरोप लगे हैं।
जांच जारी, दोषियों पर होगी कार्रवाई...
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रभारी को पद से हटाकर आगे की कार्रवाई के संकेत दे दिए गए हैं। यह मामला एक बार फिर सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही की परतें खोल रहा है, जिससे चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


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