ऐ, सुना है कि तुम पत्रकार बनने जा रहे हो…
पत्रकार बनकर ज़िंदा तो रहोगे,मगर जीने के लिए हर समय संघर्ष करना पड़ेगा !
- क्योंकि यहां सच लिखना आसान नहीं होता,
- हर शब्द का हिसाब देना पड़ता है,
- कलम उठाने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है,
- और लिख देने के बाद हजारों सवालों से गुजरना पड़ता है।
- यहाँ तालियाँ कम, तंज ज़्यादा मिलते हैं,
- सम्मान से पहले शक की निगाहें मिलती हैं,
- जो सच के साथ खड़ा हो जाए,
- उसे अक्सर अकेला ही खड़ा रहना पड़ता है।
- तुम सोचते हो पत्रकारिता मतलब नाम, शोहरत, पहचान,
- पर हकीकत में यह एक जंग है
- जहाँ हर खबर के पीछे जोखिम है,
- और हर सच के पीछे एक कीमत।
- तुम्हारी नींदें छिन जाएंगी,
- कई रिश्ते तुमसे दूर हो जाएंगे,
- कभी अपने ही सवाल करेंगे
- “क्या ज़रूरत थी इस रास्ते पर आने की?”
- अगर भीतर सच के लिए आग है,
- अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का हौसला है,
- तो यही रास्ता तुम्हें जीना भी सिखाएगा।
- हाँ, आसान नहीं होगा,
- पर अगर टिक गए…
- तो सिर्फ ज़िंदा नहीं रहोगे,
- बल्कि दूसरों को जीना सिखाओगे।


0 Comments