बोलने-सुनने में असमर्थ सृष्टि अब आवाजों को महसूस करने लगी ...
सृष्टि के खामोश चेहरे पर लौटी मुस्कान,“राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम” के कारण यह संभव हुआ!
ग्वालियर। नन्ही-मुन्नी बच्ची सृष्टि की दुनिया अब बदल चुकी है। जन्म से ही बोलने-सुनने में असमर्थ सृष्टि अब आवाजों को महसूस करने लगी है। साथ ही बोलने की सफल कोशिश भी कर रही है। सृष्टि के चेहरे पर लौटी मुस्कान उसके परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। सरकार द्वारा संचालित “राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम” से यह चमत्कार संभव हुआ है।
चार शहर का नाका ग्वालियर निवासी श्री राजपाल सिंह राठौर की बिटिया सृष्टि पाँच साल की होने को आई थी पर वह न तो कोई बात सुन पाती थी और न ही बोल पाती। इससे राजपाल व उनका परिवार सदैव चिंतित रहता था। घर के आर्थिक हालात ठीक न होने और सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे अपनी बिटिया का ठीक से इलाज नहीं करा पा रहे थे।
इसी दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मोबाइल हेल्थ टीम ने आंगनवाड़ी केंद्र पर परीक्षण के दौरान सृष्टि को देखा। सृष्टि की परेशानी को समझकर उसे मुरार स्थित “शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र” (DEIC) भेजा। वहां पर विशेषज्ञों ने जांच की और उसे मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के अंतर्गत उपचार के लिए चिन्हित कर लिया।
इसके बाद सृष्टि को निजी चिकित्सालय अग्रवाल हॉस्पिटल में सर्जरी के लिए भेजा गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गत 01 जुलाई को उसकी सफल सर्जरी की गई। इस ऑपरेशन पर हुआ लगभग 6 लाख 50 हजार रुपए का खर्चा सरकार ने उठाया है। सर्जरी के बाद सृष्टि की नियमित स्पीच थेरेपी शुरू की गई। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सृष्टि को अब सुनाई देने लगा है। वह बातों को समझने लगी है और धीरे-धीरे बोलने का सफल प्रयास भी कर रही है। चिकित्सकों के अनुसार सृष्टि एक वर्ष में पूरी तरह सुनने और बोलने में सक्षम हो जाएगी।
सृष्टि के पिता राजपाल सिंह राठौर भावुक होकर कहते हैं हमारी बच्ची की खामोशी आज खुशियों में बदल गई है। यह हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। हम सरकार और जिला प्रशासन के हृदय से आभारी हैं। सरकार ने मेरी बेटी को नई जिंदगी दी है।


0 Comments