पहचान आधारित व्यवस्था से गैस सप्लाई में सुधार की उठी मांग, उपभोक्ताओं को सीधे मिले सूचना...
गैस वितरण में पारदर्शिता की मांग तेज,OTP सिस्टम और एजेंसी जवाबदेही से रुकेगी कालाबाजारी !
मध्य प्रदेश में आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम सुझाव है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश शासन द्वारा किसानों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को पहचान पत्र दिखाकर पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की गई है, उसी तर्ज पर अब घरेलू गैस वितरण प्रणाली में भी सुधार की मांग उठ रही है।
प्रस्ताव के अनुसार, वर्तमान में गैस एजेंसियों द्वारा जो डिलीवरी पर्ची (स्लिप) डिलीवरी बॉय को दी जाती है, उसे सीधे उपभोक्ता तक पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिए उपभोक्ता को मोबाइल फोन के माध्यम से बुकिंग की जानकारी, डिलीवरी समय और सिलेंडर विवरण भेजा जाए।
इसके साथ ही OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू करने का सुझाव दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत, जब होकर उपभोक्ता को गैस सिलेंडर सौंपे, तब उपभोक्ता के मोबाइल पर प्राप्त OTP के माध्यम से डिलीवरी की पुष्टि हो। यह OTP होकर द्वारा एजेंसी में जमा किया जाए, जिससे हर डिलीवरी का रिकॉर्ड पारदर्शी और प्रमाणिक बन सके।
इस प्रस्ताव में एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाए कि हर सिलेंडर सही उपभोक्ता तक और तय समय सीमा के भीतर पहुंचे। यदि कोई एजेंसी सप्लाई में लापरवाही करती है या जानबूझकर देरी करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, फर्जी डिलीवरी और उपभोक्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। साथ ही, इससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी और व्यवस्था में भरोसा भी बढ़ेगा। यदि इस प्रस्ताव को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो न केवल गैस वितरण प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं की लंबे समय से चली आ रही परेशानियों का समाधान भी संभव हो सकेगा -रामवीर यादव


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