शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी ...
शराब दुकानों पर क्यूआर कोड का डिजिटल पहरा,10 दिन का विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू !
भोपाल। प्रदेश में शराब दुकानों पर हो रही मनमानी वसूली, नियमों के उल्लंघन और उपभोक्ताओं के साथ हो रहे आर्थिक शोषण को रोकने के लिए आबकारी विभाग ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य की हर मदिरा दुकान पर क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा, जिसके माध्यम से ग्राहक मौके पर ही शराब की वास्तविक और निर्धारित कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही 10 दिनों का विशेष जांच अभियान भी शुरू किया गया है, जिससे पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
मनमानी वसूली पर सरकार सख्त
आबकारी विभाग के संज्ञान में लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि कई जिलों में शराब दुकानदार उपभोक्ताओं से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। वहीं, प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ जगहों पर न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) से कम दरों पर भी शराब बेची जा रही है। दोनों ही स्थितियां नियमों के खिलाफ हैं और इससे राजस्व को नुकसान के साथ-साथ बाजार व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अब हर मदिरा दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल से जनरेट किया गया क्यूआर कोड चस्पा करना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाना है ताकि वे खुद ही कीमतों की जांच कर सकें।
क्यूआर कोड से पारदर्शिता की नई पहल
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई ग्राहक दुकान पर लगे क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन करेगा, उसके फोन पर संबंधित जिले की शराब की आधिकारिक रेट लिस्ट खुल जाएगी। इससे ग्राहक आसानी से यह सत्यापित कर सकेंगे कि उनसे ली जा रही कीमत सही है या नहीं।यदि कोई दुकानदार एमआरपी से अधिक या एमएसपी से कम कीमत पर शराब बेचते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ मध्यप्रदेश राजपत्र की कंडिका 21.2 और 21.3 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
10 दिन का विशेष जांच अभियान
राज्य में इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक विशेष 10 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान आबकारी विभाग की टीमें प्रदेशभर में शराब दुकानों का निरीक्षण करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी दुकानों पर क्यूआर कोड सही तरीके से लगाए गए हैं और उनका उपयोग हो रहा है। इस अभियान की विस्तृत रिपोर्ट 11 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि आगे की रणनीति तय करने में भी मदद मिलेगी।
लायसेंसियों के लिए सख्त निर्देश
- आबकारी विभाग ने क्यूआर कोड चस्पा करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना सभी लायसेंसियों के लिए अनिवार्य होगा।
- क्यूआर कोड ए-3 आकार के स्टिकर पेपर पर प्रिंट किया जाएगा।
- पेपर की गुणवत्ता न्यूनतम 250 जीएसएम होनी चाहिए, ताकि वह टिकाऊ रहे।
- स्टिकर में उच्च गुणवत्ता का ग्लू इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे उसे आसानी से हटाया न जा सके।
- प्रत्येक दुकान के लिए 5 क्यूआर कोड प्रिंट किए जाएंगे।
- इनमें से 3 क्यूआर कोड दुकान के प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे, जहां ग्राहक आसानी से उन्हें स्कैन कर सकें।
- शेष 2 क्यूआर कोड को सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर क्षतिग्रस्त कोड की जगह लगाए जा सकें।
निरीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया
सिर्फ क्यूआर कोड लगाने तक ही यह प्रक्रिया सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कार्यक्षमता की भी जांच की जाएगी। संबंधित वृत्त प्रभारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर सही जानकारी प्रदर्शित हो रही है। इसके अलावा, प्रत्येक दुकान की फोटो ली जाएगी जिसमें क्यूआर कोड स्पष्ट रूप से दिखाई दे। सभी दुकानों पर यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र विभाग को भेजा जाएगा।
उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ !
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को होगा। अब उन्हें शराब की कीमत को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या धोखाधड़ी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वे खुद ही अपने मोबाइल से कीमत की पुष्टि कर सकेंगे और अगर कोई गड़बड़ी होती है तो तुरंत शिकायत भी कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जहां तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा रही है।
राजस्व और व्यवस्था दोनों होंगे मजबूत
इस पहल से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य के राजस्व में भी सुधार होने की उम्मीद है। एमआरपी और एमएसपी के नियमों का सख्ती से पालन होने पर अवैध वसूली और अनियमित बिक्री पर रोक लगेगी। साथ ही, शराब व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और बाजार व्यवस्था अधिक संतुलित होगी।
सख्ती के साथ सुधार का संकेत
आबकारी विभाग का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार अब शराब कारोबार में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी। क्यूआर कोड जैसी तकनीकी व्यवस्था और सघन जांच अभियान के जरिए सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।आने वाले समय में यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे और अधिक सशक्त बनाकर अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
प्रदेश में शराब दुकानों पर क्यूआर कोड की अनिवार्यता और 10 दिन का विशेष जांच अभियान प्रशासन की सख्त मंशा को दर्शाता है। यह पहल न केवल उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि शराब कारोबार में व्याप्त अव्यवस्थाओं को भी खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अब देखना होगा कि यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन फिलहाल यह कदम एक बड़े सुधार की दिशा में मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।


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