पुण्यतिथि पर 101 गरीबों को मिले स्वरोजगार के साधन,गौशाला में भी दिया दान...
सेवा के संकल्प के साथ याद की गईं 'जीजी'
ग्वालियर। राजनीति और समाजसेवा में अपनी सादगी और ममतामयी छवि के लिए पहचानी जाने वाली स्व. श्रीमती रामकुमारी सिकरवार (जीजी) की तृतीय पुण्यतिथि श्रद्धा और सेवा के अनूठे संगम के रूप में मनाई गई। शिवपुरी लिंक रोड स्थित JBITM कॉलेज परिसर में आयोजित इस पुष्पांजलि सभा में ग्वालियर-चंबल संभाग का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर सिकरवार परिवार ने 'जीजी' की स्मृति को सेवा कार्यों से जोड़ते हुए न केवल साधु-संतों का सम्मान किया, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों को सशक्त बनाने का संकल्प भी दोहराया। 101 परिवारों के जीवन में आएगी आर्थिक स्थिरता
101 जरूरतमंदों को चार पहिया हाथ ठेला भेंट...
आत्मनिर्भरता की ओर कदम: ये वे लोग हैं जो अब तक किराए के ठेले पर फल-सब्जी बेचकर जैसे-तैसे अपना गुजारा करते थे।
परिवर्तन: अब इन परिवारों को प्रतिदिन का किराया नहीं देना होगा, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेंगे।
गौ-सेवा और संत सम्मान
विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने आध्यात्मिक मूल्यों का सम्मान करते हुए लाल टिपारा गौशाला के महंत संत श्री ऋषभ देवानंद महाराज का अभिनंदन किया। गौशाला में गायों के चारे और रखरखाव के लिए 51 हजार रुपए की सहायता राशि भी सौंपी गई।
दलगत राजनीति से ऊपर दिखा सम्मान
'जीजी' के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के दिग्गज एक ही मंच पर नजर आए। श्रद्धांजलि देने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे...
वरिष्ठ नेता: पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व सांसद डॉ. रामलखन सिंह।
विधायकगण: फूल सिंह बरैया, हेमंत कटारे, साहब सिंह गुर्जर, सुरेश राजे, मुकेश मल्होत्रा।
परिवार के सदस्य: पूर्व विधायक गजराज सिंह सिकरवार, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार, महापौर डॉ. शोभा सिकरवार, पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार एवं समस्त सिकरवार परिवार।
भजनों की प्रस्तुति और जनसैलाब
सुबह 10 बजे से शुरू हुआ श्रद्धांजलि का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। सुप्रसिद्ध गायक राकेश जैन की टीम ने भक्तिमय भजनों से वातावरण को भावुक और आध्यात्मिक बना दिया। संभाग भर से आए लगभग 50 हजार से अधिक नागरिकों, व्यापारियों, वकीलों और पत्रकारों ने पुष्प अर्पित कर 'प्रसादी' ग्रहण की।
यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि समाज में 'जीजी' का स्थान एक अभिभावक के रूप में था। राजनीति से परे हटकर गरीबों की मदद और जीव-दया (गौ-सेवा) का यह प्रयास अन्य सार्वजनिक व्यक्तित्वों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।










0 Comments