मध्यप्रदेश के परिवहन चेकपॉइंट पर तैनात अमला स्वयं असुरक्षित महसूस कर रहा है...
अब फिर से परिवहन चेकपॉइंट बंद होने की नौबत आ गई है,शासन को फिर लगेगा करोड़ों का चूना !
ग्वालियर । मध्यप्रदेश सरकार के ढुल-मुल रवैये के कारण मध्यप्रदेश के परिवहन चेकपॉइंट पर तैनात अमले पर ट्रांसपोर्ट माफिया हावी होता दिख रहा है यही कारण है कि उन पर हमले उनके खिलाफ होने वाली कार्वाही तो यही दर्शाती है। और जब सरकार को मन चाहा राजस्व नहीं मिलता तो स्टाफ को सरकार का कोप भी झेलना पड़ता है। लेकिन अब स्टाफ ने अपनी सुरक्षा को देखते हुए प्रदेश के परिवहन चेकपॉइंट पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस कारण से एक बार फिर परिवहन चेकपॉइंट बंद होने की नौबत खड़ी हो गई है ।
इस बार इन परिवहन चेकपॉइंट बंद होने का कारण आसामाजिक तत्वों की गुंडई बताई जा रही है । इस गुंडई को लेकर न केवल कर्मचारी भयभीत होकर चेक पॉइंट पर नहीं बैठ रहे हैं। इसलिए रोजाना सैकड़ों वाहन बगैर चैकिंग के मनमाना बजन लेकर (ओवर लोड ) बे-खौप होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस कारण शासन को भी रोजाना करोड़ों के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है ।
अब सोचने वाला पहलू ये है कि इन असामाजिक तत्वों को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है ? जो सरकारी अमले को उनका काम करने से रोक रहा है ! परिवहन चेक पॉइंट को लेकर प्रदेश सरकार में बैठे जिम्मेदार राजनेता और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं ?
सूत्र बताते हैं कि एक तथाकथित ठेकेदार जो अपने आप को ट्रक ड्राइवर का हिमायती बताता है उसने प्रदेश के लगभग सभी चेक प्वाइंटों पर अपनी तानाशाही दिखाते हुए उन्हें बंद पहुंच जाता है लेकिन इस मामले को लेकर विभाग का कोई भी आला अफसर कुछ भी बोलने से या उस पर कार्वाही करने से क्यों बचते नजर आ रहे हैं ? हालांकि हम इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते परंतु धुआं उठा है तो आग भी जरूर लगी होगी ?
सरकार के दोहरे रवैया पर सवाल ...
केंद्र सरकार ने देश के सभी चेकपोस्टों को बंद कर पॉइंट लगाकर टैक्स वसूली करने के आदेश जारी किए थे जिसमें मध्य प्रदेश के कई चेक प्वाइंटों पर व्यवहारिक एवं स्टाफ की समस्याओं के साथ-साथ यातायात बाधित होने की भी समस्याएं आ रही थी । इसके अलावा भारी बारिश चिलचिलाती धूप, कड़ाके की सर्दी में बीच सड़क पर खड़े होकर वसूली करना आसान नहीं होता ? बावजूद पॉइंट पर तैनात अमला अपना काम मुस्तैदी से कर रहा था लेकिन इन विपरीत परस्तिथियों में काम करना नामुमकिन होने के बाद ही अमले ने यह कदम उठाया है।


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