अफवाह,अराजकता के सहारे सत्ता हासिल करने की बेचैनी,विपक्ष की राजनीति का नया प्रयोग ...
विपक्ष की राजनीति जनहित के मुद्दों से हटकर “झूठ फैलाओ और भ्रम पैदा करो” तक सिमटी !
भारतीय राजनीति में वर्तमान समय में एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से उभर रहा है, तथ्यों से नहीं, बल्कि अफवाहों से लड़ाई लड़ने का ट्रेंड। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की रणनीति अब जनहित के मुद्दों से हटकर “झूठ फैलाओ और भ्रम पैदा करो” तक सिमटती दिखाई दे रही है।
पेट्रोल-डीजल जैसे संवेदनशील विषय पर अफवाह फैलाना कोई साधारण बात नहीं है। यह सीधे आम जनता की मानसिकता, बाजार की स्थिरता और देश की आर्थिक व्यवस्था पर असर डालता है। लेकिन कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेता इस मुद्दे पर भी गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते नजर आते हैं। झूठी खबरें फैलाना, कृत्रिम भीड़ खड़ी करना और माहौल को अस्थिर दिखाने की कोशिश हो रही है। यह सब एक सुनियोजित एजेंडा लगता है, न कि लोकतांत्रिक विरोध।
इसी क्रम में यह आरोप भी लगातार सामने आता रहा है कि कांग्रेस और उसके साथी विपक्षी दल केवल अपना स्वार्थ देख रहे हैं। उन्हें न तो आम जनता के हितों से कोई सरोकार है, न ही देश की सुरक्षा और समृद्धि से कोई वास्तविक जुड़ाव दिखाई देता है। यदि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति तक सीमित हो जाए और राष्ट्रहित पीछे छूट जाए, तो यह लोकतंत्र के मूल उद्देश्य को ही कमजोर करता है।
वहीं दूसरी ओर,पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी टीम बार-बार तथ्यों और निर्णयों के माध्यम से इन दावों की हवा निकालते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संकटों के बावजूद भारत में ईंधन की स्थिति को संतुलित रखना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन विपक्ष इस उपलब्धि को स्वीकार करने के बजाय भ्रम फैलाने में ज्यादा ऊर्जा लगा रहा है।
अब नजर डालते हैं पश्चिम बंगाल की राजनीति पर, जहां ममता जी की सरकार पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि सत्ता बचाने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया जा रहा है। चुनावी माहौल में हिंसा, डर और ध्रुवीकरण, ये सब लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे हैं। आरोप यह भी हैं कि एक समुदाय को डराकर और दूसरे को भड़काकर वोट बैंक की राजनीति की जा रही है। अगर यह सच है, तो यह केवल राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की साजिश है।
सवाल यह है कि क्या विपक्ष का काम सिर्फ सत्ता पाना रह गया है? क्या देशहित, स्थिरता और सामाजिक समरसता अब उनके एजेंडे में नहीं हैं? लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन वह तथ्य आधारित और जिम्मेदार होना चाहिए। अफवाहों, भय और भ्रम की राजनीति अंततः देश को कमजोर ही करती है।
विपक्ष को यह समझना होगा कि राजनीति केवल आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं है। अगर वे सच में जनता का विश्वास जीतना चाहते हैं, तो उन्हें अफवाहों की राजनीति छोड़कर जिम्मेदार और तथ्य आधारित संवाद की ओर लौटना होगा। वरना जनता अब सब देख रही है, और समय आने पर जवाब भी देगी- दिव्या सिंह


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