G News 24 : भारत में झंग ब्रादरी की रामलीला के माध्यम से,सरहद पार की यादें अब भी गूंजती हैं !

भारत की धरती ग्वालियर में प्रभु श्रीराम के प्रति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ...

 भारत में  झंग ब्रादरी की रामलीला के माध्यम से,सरहद पार की यादें अब भी गूंजती हैं !

"अपना मकान,दुकान कारोबार सब कुछ छोड़ आये बस प्रभु श्रीराम को अपने साथ ले आए"

पंजाब (पाकिस्तान) के ऐतिहासिक शहर झंग में जब रामलीला का मंच सजता,तो वह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होता था,वह इतिहास की धूल में दबी सांस्कृतिक स्मृतियों का पुनर्जागरण होता है। आज भी यह दृश्य बताता है कि परिस्तिथियों ने भूगोल बदला होगा, परंतु परंपराओं की आत्मा आज भी जीवित है।

सरहदें बंटी, संस्कार नहीं

1947 के विभाजन ने करोड़ों दिलों को तोड़ा, समाजों को बांटा और संस्कृतियों को नई सीमाओं में कैद कर दिया। किंतु राम की कथा मर्यादा, त्याग और धर्म का संदेश न तो कभी सीमाओं में बंधी और न ही बंध सकती है। झंग में आयोजित रामलीला का ग्वालियर की भूमि पर वर्षों से यहां रहने वाली झंग की भूमि जुड़े लोगों के परिजनों द्वारा इसी अटूट सांस्कृतिक निरंतरता कायम रखते हुए मंचन किया जा रहा है। आज जब मंच पर राम, सीता और लक्ष्मण के पात्र सजीव होते हैं, तो वह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि साझा विरासत का सार्वजनिक उद्घोष होता है।

रामलीला का आयोजन और स्वरूप

रामलीला का मंचन करने वाले सभी कलाकार (भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और रावण की आदि ) भूमिकाएं निभाने वाले सभी स्थानीय लोग है, जो दिनभर अपना करोबार करते हैं और रात को मंच पर स्वयं को मिले किरदार को निभाते हैं। इन सभी के संवाद, भजन और पारंपरिक वेशभूषा के साथ यह आयोजन भारतीय उपमहाद्वीप की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद का माध्यम भी है। इससे सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सम्मान की भावना मजबूत होती है।

आदर्श रामलीला समिति हनुमान नगर जिन्सीपुल न.1लश्कर,ग्वालियर द्वारा आयोजित किये जाने वाले रामलीला समारोह के लिए शनिवार 21 फरवरी को रोहित वाधवा द्वारा किया गया। इसके पश्चात आयोजन समिति से जुड़े चरणजीत नागपाल,नन्दलाल बत्रा ,जगदीश अरोरा,मोहन लाल अरोरा,बलवंत मदान,सत्यपाल बत्रा,प्रमोद पाहवा, दीपक कुरड़ा,प्रवीण नागपाल,राजू पंडित,कश्मीरीलाल खुराना,हरिओम नागपाल आदि के द्वारा सयुंक्त रूप से एक प्रेस वार्ता के माध्यम से आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि  यह आयोजन 21 फरवरी से 5 मार्च तक चलेगा, भूमि पूजन के बाद रंग उत्सव,माता की चौकी,श्रीराम जन्म की लीला,धनुष यघ,श्रीराम वनवास की लीला,केवट संवाद,भरत मिलाप,रावण मारीच संवाद एवं चल समारोह आदि कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किये जायेंगे।  

जब झंग में रामलीला होती है, तो वह एक संदेश देती है कि संस्कृति, राजनीति से बड़ी होती है। जहां राजनीतिक संवाद अक्सर तनाव से भरे होते हैं, वहीं सांस्कृतिक आयोजन रिश्तों में नरमी और संवाद का पुल बन सकते हैं। रामलीला का मंचन केवल रावण दहन का दृश्य नहीं, बल्कि घृणा, कट्टरता और विभाजनकारी मानसिकता के दहन का प्रतीक भी बन सकता है।

झंग की रामलीला हमें यह सोचने पर विवश करती है कि राम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, वह मर्यादा, न्याय और सहिष्णुता के शाश्वत आदर्श हैं। झंग की यह रामलीला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उपमहाद्वीप की साझा आत्मा की पुकार है। एक ऐसी पुकार, जो बताती है कि संस्कृति की ज्योति सीमाओं से बड़ी होती है।


Reactions

Post a Comment

0 Comments