निर्मला सीतारमण आज 1 फरवरी को अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी...
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार का नौवां बजट पेश करेंगीइस बार बजट भाषण का पार्ट-B देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों और रणनीतियों पर केंद्रित होगाग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए रोजगार योजनाओं के लिए बजट राशि में भारी वृद्धि की संभावना
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी रविवार, 1 फरवरी को अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी. भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. यह चाल बनी रहे, इसलिए जरूरी है कि बजट उसी पैनेपन का हो. वित्तीय वर्ष 2027 के बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचे, पूंजीगत व्यय, बिजली और किफायती आवास में उच्च वृद्धि को प्राथमिकता देने की संभावना है.
बजट 2026: 10 बड़ी बातें
- इस साल का केंद्रीय बजट पिछले 75 साल की परंपरा को तोड़कर एक नई परंपरा बनाएगा. अब तक, अधिकांश कंटेंट बजट भाषण के पार्ट A में हुआ करती थी, जबकि पार्ट B टैक्स और नीति घोषणाओं से जुड़ा हुआ करता था. लेकिन इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए पार्ट-B पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है, जो देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य और स्ट्रैटेजिक रोडमैप को परिभाषित करेगा. सूत्रों के मुताबिक इस बार पार्ट-B का फोकस विकसित भारत के विजन 2047 पर होगा, जिसमें लोकल पावर को विश्व स्तर पर खड़ा करना, ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी, कौशल, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीतियां शामिल होंगी.
- उम्मीद है कि वित्त मंत्री अपने बजट भाषण के पार्ट 2 में भारत के लिए अल्पकालिक प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों, दोनों को रेखांकित करेंगी. यह वक्त बड़ी अहमियत वाला है क्योंकि भारत 21वीं सदी की दूसरे क्वाटर में प्रवेश कर रहा है. देश की स्थानीय ताकत और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर जोर डाला जाएगा.
- भारत की अर्थव्यवस्था ने अब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ का सूझ-बूझ से सामना किया है. बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च की मदद से 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. इनकम और कंज्यूमर टैक्स में कटौती से उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिला है.
- केंद्रीय बजट 2026 में ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र के विकास को सबसे अधिक प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है. सूत्रों ने शनिवार को बताया कि वित्त मंत्री ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के कार्यक्रमों के लिए अधिक धनराशि की घोषणा कर सकती हैं.
- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से नई रोजगार गारंटी योजना 'विकसित भारत-जी राम जी' या वीबी-जी राम जी का बजट बढ़ाकर 1.51 लाख करोड़ रुपये करने को कहा है. यह पिछले साल के मुकाबले बजट में 72 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. पिछले साल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) को 86,000 करोड़ रुपये का बजट मिला था.
- सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में, बजट के डॉक्यूमेंट्स (कागजों) को ले जाने के लिए दशकों से उपयोग में आने वाले चमड़े के ब्रीफकेस को लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक 'बही-खाता' से बदल दिया था. इस वर्ष का बजट पिछले चार साल की तरह पेपरलेस रूप में ही होगा.
- वित्तीय वर्ष 2026 के लिए बजटीय राजकोषीय घाटा, जो सरकार की कमाई और खर्च के बीच का अंतर है, के जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से कम घाटे के साथ भारत ने राजकोषीय समेकन का अपना रोडमैप हासिल किया था. ऐसे में इसबार भी बाजार की नजर ऋण-से-जीडीपी कटौती पर उत्सुकता से होगी.
- इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) 11.2 लाख करोड़ रुपये है. आज के बजट में पूंजीगत व्यय पर अपना ध्यान बनाए रखने की संभावना है, मौजूदा स्तर से पूंजीगत व्यय लक्ष्य में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होगी. प्राइवेट सेक्टर की नजर इसपर बारीकी से होगी.
- बजट में और अधिक घरेलू निजी और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए डिजाइन किए गए और बदलावों की उम्मीद है. इसमें विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा लाइसेंस के साथ रक्षा कंपनियों में निवेश करना आसान बनाने की योजना भी शामिल है.
- केंद्रीय बजट 2026 एक जटिल बैकग्राउंड में आ रहा है. एक तरफ तो घरेलू मांग बनी हुई है और महंगाई हाल के उच्चतम स्तर से कम हो गई है. वहीं दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितताएं ने आगे क्या होगा, इसमें अनिश्चितताएं बना रखी हैं. इसमें भूराजनीतिक तनाव, अस्थिर कमोडिटी कीमतें और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा असमान मौद्रिक ढील शामिल हैं.










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