बिजली चोरी की समस्या केवल चोरी की नहीं, बल्कि मानसिकता की है...
चोरी और अपराध है जिनका पेशा और पकड़े जाने पर प्रताड़ित-पीड़ित होने का नाटक !
चोरी चाहे बिजली की हो या सरकारी जमीन की हो या किसी अन्य सार्वजनिक संसाधन की इन्हें चुराने वाला अपराधी ही होता है और चोरी अंततः चोरी ही होती है। लेकिन हमारे समाज की एक विचित्र प्रवृत्ति यह बनती जा रही है कि जैसे ही कोई व्यक्ति चोरी करते हुए पकड़ा जाता है, वह अपराध स्वीकारने के बजाय स्वयं को प्रताड़ित और पीड़ित दिखाने की होड़ में लग जाता है। अपराधी अचानक ‘बेचारा’ बन जाता है और कानून-व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
बिजली चोरी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वर्षों तक बिना मीटर, बिना बिल बिजली का उपयोग करने वाले लोग जब कार्रवाई का सामना करते हैं, तो विभागीय कार्रवाई को ‘अत्याचार’, ‘गरीब विरोधी नीति’ और ‘तानाशाही’ करार देने लगते हैं। सवाल यह है कि जो ईमानदारी से बिल भर रहा है, क्या उस पर यह अन्याय नहीं कि कोई दूसरा व्यक्ति चोरी करके वही सुविधा मुफ्त में भोगे ! बिजली के लिए लोग भारी भरकम बिल भरते हैं और फिर भी सप्लाई नहीं मिलती है कारण कुछ लोग जो करते हैं चोरी और जब पकड़े जाते हैं तो स्वयं को प्रताड़ित और पीड़ित बताने का करते हैं प्रयास !
अवैध रूप से संचालित मिनी पावर स्टेशन पकड़ा गया
उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार की बिजली चोरी पकड़ी गई है उसे देखकर तो लगता है चोर भी अब हाईटेक तरीके अपना रहे हैं। दरअसल संभल में प्रशासन ने बिजली चोरी के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया. डीएम और एसपी देर रात सड़कों पर उतरे और भारी पुलिस बल के साथ शहर में संयुक्त छापेमारी की इस दौरान जब अफसर एक घर में पहुंचे तो नजारा देखकर चौंक गए. डीएम डॉ. राजेंद्र पैसिया और एसपी कृष्ण विश्नोई के नेतृत्व में पुलिस, पीएसी और बिजली विभाग की संयुक्त टीमों ने रायसत्ती, दीपा सराय, सराय तरीन, नबाबखेल, गुन्नौर और बबराला समेत कई इलाकों में छापेमारी की. इस दौरान एक घर में अवैध रूप से संचालित मिनी पावर स्टेशन पकड़ा गया. इसके जरिए करीब 50 से 60 घरों को चोरी की बिजली सप्लाई की जा रही थी. जांच में सामने आया कि यह पूरा सिस्टम भूमिगत था.
घर में अंडरग्राउंड केबल डालकर चुरा रहे थे बिजली
अधिकारियों ने बताया कि एक शख्स ने अपने घर में अंडरग्राउंड मिनी पावर स्टेशन स्थापित कर रखा था. इसी सिस्टम के जरिए आसपास के दर्जनों मकानों, एक मस्जिद, दूध की डेयरी और अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग प्वाइंट्स को बिजली सप्लाई दी जा रही थी. मौके से अवैध केबल, ट्रांसफार्मर जैसे उपकरण जब्त किए गए और सभी अवैध कनेक्शन तत्काल काट दिए गए. छापेमारी अभियान के दौरान डीएम, एसपी के अलावा सीओ संभल आलोक भाटी, सीओ असमोली कुलदीप सिंह, एएसपी कुलदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारी मौजूद रहे. बताया गया कि कुछ इलाकों में लाइन लॉस 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जिसे रोकने के लिए यह अभियान चलाया गया.
डीएम डॉ. राजेंद्र पैसिया ने कहा कि बिजली चोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन लोगों को चिन्हित किया गया है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो संपत्ति कुर्क करने तक की कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा. सांसद जियाउर्रहमान बर्क के गृह क्षेत्र रायसत्ती और नखासा से अभियान की शुरुआत की गई. एक दर्जन से अधिक टीमें भारी पुलिस बल के साथ घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच में जुटीं. प्रशासनिक कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और बिजली चोरी करने वालों में खौ*फ का माहौल है.
समस्या केवल चोरी की नहीं, बल्कि मानसिकता की है
चोरी को अपराध मानने के बजाय उसे ‘जरूरत’, ‘मजबूरी’ या ‘हक’ के रूप में पेश किया जाता है। और जब कानून अपना काम करता है, तो संवेदना बटोरने के लिए भावनात्मक हथकंडे अपनाए जाते हैं—कभी गरीबी का रोना, कभी बच्चों का हवाला, तो कभी राजनीतिक संरक्षण की आड़। यह प्रवृत्ति न केवल कानून का मजाक उड़ाती है, बल्कि समाज में ईमानदारी को कमजोर भी करती है।
विडंबना यह है कि सार्वजनिक संसाधनों की चोरी का सीधा बोझ उन्हीं लोगों पर पड़ता है जो नियमों का पालन करते हैं। बिजली चोरी से होने वाला घाटा बढ़े हुए टैरिफ के रूप में ईमानदार उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। इससे संदेश जाता है कि चोरी करो, पकड़े जाओ और फिर पीड़ित बनकर बच निकलो- रामवीर यादव









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