GNews24 :आवारा श्वानों द्वारा लोगों पर होने वाले हमलों की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों को सोंपी जिम्मेदारी !

 आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए कलेक्टर ने गठित की कमेटी ...

आवारा श्वानों द्वारा लोगों पर होने वाले हमलों की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों को सोंपी जिम्मेदारी !

ग्वालियर। आवारा श्वानों की बढती जनसंख्या को नियंत्रित करने एवं श्वानों के द्वारा लोगों को काटने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने कमेटी गठित की है। कमेटी की अध्यक्ष कलेक्टर रहेंगी । इस कमेटी में अलग-अलग विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। जिससे आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित किया जा सके। 

शहर में बढ रहे आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए उनकी नसबंदी की जानी है, इसके साथ शहर में घूमने वाले आवारा श्वानों के लिए आश्रय स्थल बनाएं जाएगे, जहां पर उन्हें रखने की समुचित व्यवस्था होंगी। वहीं आवारा एवं पालतू श्वानों का डेटा तैयार किया जाएगा। साथ ही उन स्थानों को भी चिन्हित किया जाएगा जहां पर आवारा कुत्तों की आबादी अधिक है। साथ ही जिन स्थानों पर श्वानों के द्वारा काटने की घटनाएं होती हैं। 

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने कमेटी गठित की है। इस कमेटी की अध्यक्ष कलेक्टर रहेंगी, जबकि सदस्य जिला पुलिस अधीक्षक, सदस्य सचिव मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सदस्य आयुक्त नगर निगम, संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, उप संचालक कृषि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला खेल अधिकारी, प्राचार्य कॉलेज, एडब्ल्लूबीआई के जिला प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। जबकि अनुविभागीय अधिकारी स्तर पर कमेटी के अध्यक्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अध्यक्ष रहेंगे, जबकि अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सदस्य, तहसीलदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद, नगर परिषद, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, नमांकित स्थानीय समाजसेवी दानदाता रहेगी जबकि ग्राम पंचायत स्तर पर सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी, पंचायत सचिव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नामित अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सरपंच, पशु कल्याण हेतु कार्यरत संस्था, समाजेसीव दानदाता रहेंगे। जबकि नगरीय निकास स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारी, पुलिस विभाग द्वारा नामित अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, तहसीलदार, नामित अधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नामित अधिकारी, नगरीय निकाय द्वारा नामित अधिकारी, जनप्रतिनिधि व दानदाता शामिल रहेंगे। 

आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए यह होंगे कार्य 

आवारा श्वानों को सडक से पकडकर उन्हें एबीसी सेंटर ले जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। आवारा श्वानों को पकडने, नसबंदी, टीकाकरण, आहार आदि की व्यवस्था विभागों एवं समाजसेवी संगठनों के माध्यम से की जाएगी।

पशु पालन एवं डेयरी विभाग 

आवारा एवं पालतु कुत्तों को चिन्हित करेगा। आवारा श्वानों से संबंधित कार्यों के लिए पशु चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना। अनियंत्रित श्वान प्रजनन को रोकने एवं टीकाकरण व नसबंदी की योजना लागू करना।

किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग 

सानों एवं श्वान पालकों को सार्वजनिक क्षेत्रों एवं सडकों पर श्वानों के विचरण से बचने के लिए जागरूक करना। वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग श्वानों के काटने से घायल व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, शासकीय चिकित्सालयों में एंटी रैबीज इंजेक्षन, आदि की पर्याप्त उपलब्धता रखना। 

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग 

श्वानों के नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर कार्यवाही करना। जबकि सूचना एवं प्रौद्यौगिकी विभाग द्वारा निगरानी दल एवं अन्य स्त्रोत के माध्यम से आवारा श्वानों और घटना जन्य क्षेत्रों का डेटा एकत्रित करना। वहीं वन विभाग वन क्षेत्रों में आवारा श्वानों की निगरानी एवं विचरण को नियंत्रित करेगा।

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