अनूप या नारायण सिंह या समीक्षा गुप्ता ही फिर से बागी तेवर अपना लें...
भाजपा के लिए ग्वालियर दक्षिण में बन सकते हैं 2018 वाले हालात !
ग्वालियर l नवम्बर 2018 भाजपा नेत्री समीक्षा गुप्ता को जब बीजेपी ने टिकिट नहीं दिया तो उन्होंने बीजेपी से बग़ावत करते हुए ग्वालियर दक्षिण विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फार्म भर दिया । नतीजा- दक्षिण से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार नारायण सिंह कुशवाह की मात्र 123 वोटों से हार हो गई।और समीक्षा गुप्ता को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया l अपनी हार के लिए नारायण सिंह दोष समीक्षा को देते रहे । उनके भारी विरोध के बावजूद समीक्षा को भाजपा में फिर से वापस ले लिया। ऐसे ही हालात इस साल नवम्बर में देखने को मिल सकते हैं, जब विधानसभा चुनाव होंगेे।
क्योंकि दक्षिण से टिकट मांग रहे भाजपा नेता अनूप मिश्रा ने कल अपने जन्मदिन पर दोहराया कि वह दक्षिण से ही चुनाव लड़ेंगे। यही बात वह एक-डेढ़ महीने से कई बार बोल चुके हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि अनूप को भाजपा टिकट नहीं देती है तो वह निर्दलीय , आम आदमी पार्टी , बसपा या किसी अन्य दल से चुनाव लड़ सकते हैं। इन परिस्थितियों में दक्षिण में भाजपा का वोट बैंक विभाजित हो जाएगा, जैसा 2018 में हुआ था। यदि अनूप को भाजपा टिकट देती है तो नारायण सिंह कुशवाह बागी तेवर अपना सकते हैं,इसके भी आसार अभी से दिख रहे हैं। क्योंकि उनके लिए भी अभी नहीं तो कभी नहीं की स्थिति होगी।
ग्वालियर अंचल में दक्षिण एकमात्र सीट है, जहां भाजपा टिकट के सर्वाधिक दावेदार हैं। इनकी संख्या 15 के करीब है। इसकी वजह है दक्षिण में शुरु से भाजपा का वोट बैंक मजबूत रहा है। नारायण सिंह की हार की वजह भी भाजपा का वह वोट बैंक था, जिसने समीक्षा को वोट दिया था। क्योंकि समीक्षा व उनका परिवार दशकों से भाजपा - संघ से जुड़ा हुआ है। अभी से पार्टी लाइन से अलग हटकर बोल रहे अनूप मिश्रा निश्चित रूप से 2018 जैसे हालात बना रहे हैं। अनूप या नारायण सिंह ही विद्रोही हो सकते हैं , ऐसा नहीं है। कुछ अन्य दावेदार भी अति महत्वाकांक्षी हो सकते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि टिकट न मिलने पर समीक्षा गुप्ता ही फिर से बागी तेवर अपना लें।


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