वेतन वृद्घि रोकना बड़ी सजा नहीं, एसएसपी ने मामला हल्के में लिया…

हाईकोर्ट ने एसएसपी को दिया कार्रवाई का आदेश, 30 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट


ग्वालियर। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। यह टिप्पणी थाटीपुर थाने से हत्या के आरोपित के रिश्तेदारों को केस डायरी के दस्तावेज की प्रति और दस्तावेज के फोटो भी खिंचवाने के मामले को लेकर की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 172 के खिलाफ जाकर कार्य किया है, यह गंभीर मामला है। इस गलती को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर अमित सांघी ने हल्के में लिया है। एसएसपी द्वारा सिर्फ एक वेतन वृद्घि रोककर कार्रवाई की खानापूर्ति की है। 

इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी आरवीएस विमल व दीपक यादव के खिलाफ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) कार्रवाई करें। 30 दिन के भीतर कार्रवाई कर 11 दिसंबर तक प्रिसिंपल रजिस्ट्रार के यहां रिपोर्ट पेश करें। इस मामले की सुनवाई 11 नवंबर को न्यायमूर्ति अहलुवालिया ने की।़भिंड निवासी रानी शर्मा ने हत्या के मामले में आठवीं बार हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। इसमें केस डायरी के दस्तावेज व मृतिका के बयान संलग्न कर दिए। जब याचिका हाई कोर्ट में सुनवाई में आई तो कोर्ट ने सवाल किया कि ये दस्तावेज आरोपित को कैसे प्राप्त हुए। 

उसकी ओर से तर्क दिया गया कि सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज हासिल किए, जबकि केस डायरी के दस्तावेज किसी को नहीं दिए जा सकते हैं। इसको लेकर हाई कोर्ट ने एसएसपी सांघी को मामले की जांच के आदेश दिए। एसएसपी ने जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें सामने आया कि तत्कालीन थाना प्रभारी आरवीएस विमल के कहने पर अरुण मिश्रा ने आरोपित रानी शर्मा के रिश्तेदार धीरज शर्मा को केस डायरी के फोटो खींचने दिए। इसके लिए जो कर्मचारी दोषी थे, उनकी एक-एक वेतन वृद्घि रोकने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने एसएसपी की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुआ कहा कि इस मामले को काफी हल्के में लिया है।

पुलिस ने जो गलती की है, उसे देखते हुए पुलिस को आत्म परीक्षण करने की जरूरत है। ग्वालियर निवासी अरविंद शर्मा ने थाटीपुट थाने में एक आवेदन दिया कि 26 अगस्त 2016 को उसकी बहन रानी शर्मा की मृत्यु हो गई है। अरविंद के आवेदन पर ननद रानी शर्मा सहित अन्य को आरोपित बनाया गया। आरोपित ननद रानी शर्मा 2016 से फरार चल रही है। अलग-अलग तर्कों के साथ आठ बार जमानत याचिका दायर कर चुकी है, लेकिन जमानत नहीं मिली है।