शासन-प्रशासन पर लगाए आरोप…

सिसोदिया नेअपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने का किया प्रयास 



ग्वालियर l सिंधिया समर्थकों में से ग्वालियर , गुना , शिवपुरी और अशोकनगर का कोई भी समर्थक यह मानने को तैयार नहीं है कि सिंधिया समर्थक मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने अपने ही शासन-प्रशासन पर आरोप लगाए तो उसकी पहले से जानकारी उनके नेता केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को नहीं रही होगी। 

कुछ कह रहे हैं कि सिसोदिया ने अपने निजी हित पूरे न होने पर स्वत: ही निर्णय लिया कि चीफ सेके्रटरी , कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को कटघरे में खड़ा कर दो तो मकसद पूरा हो जाएगा । वहीं ये सिंधिया समर्थक तर्क दे रहे हैं कि अगर सिसोदिया जी के एपिसोड की स्क्रिप्ट सिंधिया जी ने लिखी होती तो सिसोदिया अगले दिन बैकफुट पर नहीं आते। 

मुख्य सचिव को निरंकुश बताने वाले पंचायत मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने अगले दिन मुख्यमंत्री से एकांत बैठक करने के बाद इतना ही कहा कि अब मुझे कोई दिक्कत नहीं है। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को पूरा कर दिया हो, उन्हें संतुष्ट कर दिया हो या ये भी हो सकता है कि उन्हें हड़काया हो। लेकिन यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि सिसोदिया ने अपना आरोप वापस नहीं लिया और ना ही उन्होंने यह कहा कि मीडिया ने मेरे आरोप को तोड़ मरोड़ कर दिया। 

ओैर यह भी देखने-सुनने , पढ़ने को नहीं मिला कि सिंधिया जी ने अपने समर्थक मंत्री को अपने ही सत्ता-संगठन के खिलाफ उनकी सार्वजनिक आलोचना के लिए फटकारा हो, उनकी क्लास ली हो । मध्यप्रदेश की राजनीति के सामान्य जानकार भी जानते हैं कि सिंधिया जी के संकेत , आज्ञा, अनुमति के बिना उनके समर्थक नेता, विधायक , मंत्री राजनीति से जुड़ा कोई भी निर्णय नहीं ले सकते हैं। 

चीफ सेके्रटी पर आरोप यानी एक तरह से चीफ मिनिस्टर पर आरोप होता है। दो दिन बाद भाजपा कोर गु्रप की बैठक हुई। सूत्र बता रहे हैं कि इस बैठक में कैलाश विजयवर्गीय ने ब्यूरोक्रेसी की कथित निरंकुशता का मुद उठाया था। इस पर चीफ मिनिस्टर ने मामले को टालते हुए कहा था कि जल्दी ही अफसरों के तबादले होंगे । 

यहां यह बताना महत्वपूर्ण होगा कि सिंधिया जी ने हाल में अपने पुत्र महानआर्यमन के साथ विजयवर्गीय से उनके घर मुलाकात की थी। देखना, अभी कुछ माह बाद सिंधिया खेमे से आवाजें आने लगेंगी कि सिंधिया जी को अगले चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरा बनाओ।