आसमान से बरसी आफत, अलर्ट जारी…

बाढ़-बारिश के चलते देश के कई इलाकों में मची भारी तबाही

भारी बारिश के चलते हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में मकान ढहने की घटनाएं सामने आई हैं। देश के दूसरे इलाकों में भी भारी बारिश के चलते आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। हिमाचल के चंबा जिले में शनिवार सुबह बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद मकान ढह गया, जिसकी चपेट में आकर तीन लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि मंडी जिले में अचानक आई बाढ़ के चलते घरों में पानी घुस गया, जिससे कुछ ग्रामीण वहां फंस गए और कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।

चंबा जिला आपातकालीन अभियान केंद्र (डीईओसी) के अधिकारियों ने बताया कि चौवारी तहसील के बनेत गांव में शनिवार तड़के करीब साढ़े चार बजे भूस्खलन हुआ, जिसके बाद एक मकान ढह गया। उन्होंने बताया कि इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई। तीनों मृतकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, मंडी में तड़के 4.15 बजे अचानक आई बाढ़ के बाद बल्ह, सदर, थुनाग, मंडी और लामाथाच में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ से सड़क किनारे खड़े कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और स्थानीय निवासी अपने घरों के अंदर फंसे रहे। मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग ने 25 अगस्त तक राज्य में भारी बारिश के पूर्वानुमान के कारण भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने बताया कि कई जिलों में अगले तीन-चार दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है, जिनमें कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, शिमला, सिरमौर, सोलन, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर शामिल हैं। मोख्ता ने जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों (डीईओसी) को पर्याप्त सुरक्षा उपाय करने का निर्देश दिया है, क्योंकि इस अवधि में भूस्खलन, अचानक बाढ़ आने, बादल फटने, चट्टान गिरने, नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने, खराब दृश्यता और आवश्यक सेवाओं में व्यवधान की समस्या पैदा हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में मकान गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई। जिला प्रशासन ने बताया कि सूचना मिलने के बाद बचाव दल मौके पर पहुंचे और ढहे हुए घर के मलबे से शवों को बरामद किया। यह मकान मिट्टी का बना हुआ था और घटना जिले के मुत्तल क्षेत्र के समोले गांव की है। 

राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल माउंट आबू में तेज बारिश होने से कई स्थानों पर भवनों के गिरने, दीवारों के दरकने, घरों में पानी घुसने, प्लास्टर उखड़ कर गिरने का सिलसिला जारी है। वाहनकर नाके के समीप गैस गोदाम के सामने सड़क धंसने से प्रशासन ने बड़े वाहनों के आवागमन पर मार्ग के दुरूस्त होने तक लगाई रोक। सर्वे ऑफ इंडिया के पीछे की कालोनी में एक मकान की दीवार ढह गई। दीवार के सहारे घर का रखा सारा सामान क्षतग्रिस्त हो गया। दीवार गिरकर एक दुपहिया वाहन पर गिर गई जिससे वाहन भी क्षतग्रिस्त हो गया। गनीमत रही जिस तरफ दीवार गिरी उस तरफ रास्ता था लेकिन उस समय रास्ते पर कोई व्यक्ति नहीं जा रहा था।

इसी तरह से ढुंढाई में सुभाषचंद्र के मकान के ऊपर के टीन पतरे उड़ गए। म्युनिसिपालिटी कालोनी में लक्ष्मी देवी मेघवाल का घर ढह गया। कुम्हारवाड़ा में भी सोनी आदिवाल के घर की दीवार ढह गई। तेज बारिश के चलते वाहनकर नाके के समीप पुराने चुंगी नाके के पास गैस गोदाम के सामने सडक़ धंस गई। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन की ओर से भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। हालांकि हल्के, टेक्सी, दुपहिया वाहन आदि का आवागमन जारी है।

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र के गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने के चलते ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चक्रवात की आंशका को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि गहरे दबाव के क्षेत्र के कारण तट के पास 60 से 65 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने का अनुमान है जिसके  आगे बढ़ने पर कमजोर पड़ने की संभावना है। उत्तरी ओडिशा और पश्चिमी जिलों में भारी बारिश का अनुमान है।

राज्य के विशेष राहत आयुक्त पी. के. जेना ने कहा कि बाढ़ से राज्य के 13 जिलों में 71 प्रखंडों के 2066 गांवों में करीब पांच लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्य राज्य के सचिव एस सी महापात्र के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने के बाद जेना ने बताया कि 470 गांवों में 2,55,325 लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में 190 राहत केंद्रों में एक लाख लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और 90,000 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ के कारण कई घर क्षतग्रिस्त हो गए और बढ़े क्षेत्र में पसरा फसल पानी में डूब गया है।

मौसम विभाग ने 20 अगस्त शनिवार को भी उत्तराखंड में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, आने वाले चार दिनों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। शुक्रवार को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर में भारी बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को चमोली, बागेश्वर, देहरादून जनपद में भारी बारिश हो सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारी बारिश से जिन जगहों पर नुकसान हुआ है, उन सभी स्थानों पर हमारी आपदा प्रबंधन, SDRF की टीम और अन्य प्रशासन के लोग मौके पर तैनात हैं। मैं भी मौके पर जाने की कोशिश कर रहा हूं और वहां राहत कार्यों के काम को देखूं।

देहरादून के रायपुर ब्लॉक में शनिवार की सुबह बादल फटने की जानकारी मिली है। रायपुर ब्लॉक के सरखेत गांव के लोगों ने आज सुबह 2:45 बजे बादल फटने की सूचना दी है। सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ की टीम ने बताया है कि गांव में फंसे सभी लोगों को बचा लिया गया और कुछ ने पास के एक रिसॉर्ट में शरण ली है। देहरादून में प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर के संस्थापक आचार्य बिपिन जोशी ने कहा कि कल से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मंदिर के पास बहने वाली तमसा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। जिससे माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर और टपकेश्वर महादेव का संपर्क टूट गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सहायता राशि देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, 'हम बाढ़ से प्रभावित लोगों को बाढ़ पुनर्वास कोष के रूप में 119.10 करोड़ रुपए की राशि वितरित करेंगे। अब तक 34 जिलों में 180 लोग बाढ़ के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं और 19 लोग भूस्खलन में मारे गए हैं। जो नुकसान हुआ है हम उसका आकलन कर रहे हैं।