आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती पत्रकारिता सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित…

जो चुनौतियां मुगलों और अंग्रेजों के समय थीं वो आज भी हैं : आहूजा

ग्वालियर। मुगलों और अंगे्रजों के शासन के समय जो वैचारिक षड्यंत्र और चुनौतियां थीं वो आज भी हमारे सामने हैं। भारत में आज भी एक वर्ग ऐसा है जो मुगलों और अंग्रेजों के वैचारिक एजेण्डे पर काम कर रहा है। यह बात मुख्य वक्ता जनसंपर्क मप्र के सेवानिवृत्त संचालक लाजपत आहूजा ने ‘वर्तमान वैचारिक षड्यंत्र और चुनौतियों में पत्रकारिता की भूमिका’ विषय पर कही। श्री आहूजा रविवार को मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास और पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययन केन्द्र जीवाजी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती पत्रकारिता सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती ने की। मुख्य अतिथि के रूप में जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया एवं पत्रकार सम्मान चयन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल नायक उपस्थित रहे। 

मुख्य वक्ता श्री आहूजा ने कहा कि भारत में लगभग चार सौ साल तक मुगलों और दो सौ साल तक अंग्रेजों का शासन रहा। भारतीयों के प्रति इन दोनों का व्यवहार एक जैसा रहा। हालांकि तरीका अलग-अलग था। दोनों ने सबसे पहले यहां के धर्म, संस्कृति और शिक्षा पर प्रहार किया। औरंगजेब ने 9 अपै्रल 1669 को अपने सूबेदारों को मंदिरों और विद्यालयों को तोडऩे का फरमान जारी किया। यही नीति अंगे्रजों ने भी अपनाई। अंग्रेजों ने सबसे पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार किया। थामस मैकाले ने स्पष्ट रूप में लिखा कि भारत में हमें एक ऐसा वर्ग खड़ा करना है जो शारीकि रूप से भले ही भारतीय हो लेकिन सोच और मानसिकता अंग्रेजों जैसी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हम उन गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व मना रहे हैं जिन्होंने मतांतरण के खिलाफ अपना आत्म बलिदान दिया। 

पूरी दुनिया मानती है कि मतांतरण यानी मानव अधिकारों का उल्लंघन, लेकिन भारत में यह आज भी हो रहा है। उन्होंने राम जन्म भूमि, कृष्ण जन्म भूमि, कुतुबमीनार, ज्ञानव्यापी मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा भारत में एक ऐसा ईको सिस्टम है। जिससे शिक्षाविद्, पत्रकार, नौकरशाह, साहित्यकार, इतिहासकार भी जुड़े हुए हैं। ऐसे मामलों में कुछ इतिहासकार कई बार पुरातत्वविद बनकर भी बयान देने लगते हैं। हिन्दू समाज में भी कई लोग ऐसे हैं जो इस यूको सिस्टम का साथ देते हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों में एक सज्जन वर्ग भी है। जिसने प्रारंभ में ही राम जन्म भूमि हिन्दुओं को सौंपने की बात कही थी, लेकिन मीडिया ने उस वर्ग को कोई स्थान नहीं दिया। हालांकि अब मीडिया की भूमिका में परिवर्तन जरूर आया है। हम उम्मीद करते हैं कि मीडिया राष्ट्र और समाज में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएगा। उन्होंने मामा जी माणिकचंद वाजपेयी को याद करते हुए उन्हें पत्रकारिता जगत का संत बताया और कहा कि हम  सौभाग्यशाली हैं जो हमें पत्रकारिता जगत के संत मामा जी के साथ काम करने का अवसर मिला। 

पत्रकारिता में दिखना चाहिए नारद जैसी स्पष्ट छवि: मंडेरिया

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया ने कहा कि महर्षि नारद जी ने सकारात्मक भाव से सेतु के रूप में एक लोक से दूसरे लोक में जानकारी पहुंचाने का काम किया। आज हमारे सामने वैचारिक षड्यंत्र चुनौतियां बनकर खड़े हैं। सोशल मीडिया से प्रामाणिकता प्रभावित हुई है। ऐसे में मीडिया में महर्षि नारद जी जैसी छवि स्पष्ट दिखना चाहिए। अध्यक्षीय उद्बोधन में मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती ने कहा कि भारत में वैचारिक षड्यंत्र सदियों से चले आ रहे हैं। 

आक्रांताओं ने हमारे धर्म, संस्कृति, शिक्षा को नष्ट करने का प्रयास किया। इससे एक वर्ग ऐसा पैदा हो गया है जो अपने ही धर्म, संस्कृति, प्राचीन शिक्षा पद्धति का विरोध करता है। वर्षों बाद अब शिक्षा और इतिहास में सुधार की शुरुआत हुई है। जिसका एक वर्ग विरोध कर सकता है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह शोध परक खबरों का प्रकाशन और प्रसारण करे। वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल नायक ने पत्रकारों के सम्मान के लिए अपनाई गई चयन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम का संचालन सिंधी साहित्य अकादमी के निदेशक राजेश वाधवानी ने किया। आभार कार्यक्रम संयोजक अभिषेक शर्मा ने व्यक्त किया। 

डॉ.गोपाल त्यागी(श्रेष्ठ संवाददाता), धर्मेन्द्र त्रिवेदी (सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में श्रेष्ठ पत्रकार), इलेक्ट्रोनिक मीडिया के क्षेत्र में श्रेष्ठ संवाददाता सम्मान नासिर गौरी को दिया गया। जयदीप सिकरवार (श्रेष्ठ फोटो पत्रकार सम्मान), अजय उपाध्याय (श्रेष्ठ वीडियो पत्रकार सम्मान), सुनील गोयल (श्रेष्ठ पत्रकार समन्वयक सम्मान),  रामेन्द्र परिहार (श्रेष्ठ न्यूज पोर्टल सम्मान), मालविका मांढऱे (श्रेष्ठ महिला पत्रकार) और श्रेष्ठ नागरिकता पत्रकारिता का सम्मान कमल मिश्रा को दिया गया।