CM शिवराज का नया प्रयोग…

समस्याओं का निदान करने अब मंत्रियों के बाद बनेगा कलेक्टरों का ग्रुप

भोपाल। प्रदेश में समस्याओं के निदान के लिए मंत्री समूहों के गठन का प्रयोग कर जनता के हित में निर्णय लेने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब एक नया प्रयोग करेंगे। अब तक के इस अभिनव प्रयोग में सीएम फील्ड में आने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टरों का समूह (ग्रुप) बनाएंगे। कलेक्टरों का यह ग्रुप तीन-चार या अधिक कलेक्टरों को मिलाकर बनेगा जो शासन द्वारा तय की गई समस्या के संबंध में अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। कोरोना संक्रमण काल के दौरान क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी के प्रयोग को पंचायत और ग्राम स्तर पर ले जाकर देश भर में इस व्यवस्था को मॉडल के रूप में स्थापित करने वाले सीएम शिवराज अब नया प्रयोग कलेक्टरों के मामले में करने वाले हैं। 

सीएम चौहान ने कहा है कि वे जिलों में काम करने वाले कलेक्टरों के समक्ष मैदानी स्तर पर आ रही समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टरों के समूह बनाएंगे। ये समूह विषय-विशेष तथा समस्या-विशेष का विश्लेषण और उसके समाधान संबंधी सुझावों पर वर्चुअली प्रस्तुतिकरण देंगे। इस व्यवस्था पर अगले माह होने वाली कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में डिस्कसन करने के संकेत सीएम चौहान ने दिए हैं। कलेक्टरों के नवाचार और बेस्ट प्रेक्टिसेस की ओर और अधिक ध्यान देकर सरकार को प्रजेंटेशन भी देने होंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने वाले कलेक्टरों से कहा है कि आने वाले दिनों में कलेक्टरों को जिले में कुपोषण की स्थिति, आयुष्मान भारत योजना का क्रियान्वयन, जल जीवन मिशन, आगामी शैक्षणिक-सत्र की तैयारी तथा सीएम राइज स्कूल, ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की स्थिति तथा कठिनाई वाले क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए की गई व्यवस्था के बारे में और अधिक मेहनत करना होगी। 

उन्होंने कहा है कि कलेक्टर नगरीय क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव, हर गांव, कस्बे के गौरव दिवस के आयोजन, नशामुक्ति के लिए गतिविधियों का संचालन, प्रदेश में नशामुक्ति अभियान आरंभ करने, उपार्जन केन्द्रों तथा त्वरित भुगतान की उचित व्यवस्था पर भी अभी से फोकस करेंगे। अगली कलेक्टर कांफ्रेंस में इस पर रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही पुन: आरंभ हो रही मुख्यमंत्री कन्या-विवाह तथा तीर्थ-दर्शन योजना का प्रभावी आयोजन एवं प्रबंधन, दो मई को लाड़ली लक्ष्मी दिवस का आयोजन की तैयारियों सहित जिलों में उत्पादित सामग्री के वैल्यू एडिशन, किसानों को अधिक लाभ तथा निर्यात के लिए हरसंभव व्यवस्था की समीक्षा भी की जाएगी।