विश्व विजेता भगवान श्री राम…

विदेशों में की जाती श्रीराम की स्तुति, रामायण को किया पाठ्यक्रम में शामिल

श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। इस त्योहार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। हिन्दु धर्म के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। देशभर में नवरात्री का त्योहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। कई लोग सात दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना कर आठवें दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराकर अपना उपवास तोड़ते हैं। साथ ही कई लोग आठ दिनों तक व्रत रखने के बाद नौवे दिन उपवास तोड़ते हैं। लोग राम नवमी के दिन ब्राहमणों को भी भोजन करवाते हैं। नौवे दिन को ही राम नवमी कहा जाता है। हिन्दु धर्म के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। इस त्योहार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन बीवीयां थी। कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी।

शादी को काफी समय बीत जाने के बाद भी राजा दशरथ के घर किसी बालक की किलकारी नहीं गूंजी थी। इसके उपचार के लिए ऋषि वशिष्ट ने राजा दशरथ से पुत्र प्राप्ति के लिए कमेश्टी यज्ञ कराने के लिए कहा। जिसे सुनकर दशरथ खुश हो गए और उन्होंने महर्षि रुशया शरुंगा से यज्ञ करने की विन्नती की। महर्षी ने दशरथ की विन्नती स्वीकार कर ली। यज्ञ के दौरान महर्षी ने तीनों रानियों को प्रसाद के रूप में खाने के लिए खीर दी। इसके कुछ दिनों बाद ही तीनों रानियां गर्भवती हो गईं। नौ माह बाद चैत्र मास में राजा दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने राम को जन्म दिया, कैकयी ने भरत को और सुमित्रा ने दो जुड़वा बच्चे लक्ष्मण और शत्रुघन को जन्म दिया। भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में धरती पर जन्म इसलिए लिया ताकि वे दुष्ट प्राणियों का नरसंहार कर सके। राम नवमी भारत में मनाया जाने वाला बहुत ही प्राचीन त्योहार है। 

यह केवल भारत में ही विदेशों में रह रहें भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब देश में छोटी जातियों को कुछ समझा नहीं जाता था, तब रामनवमी ही ऐसा त्योहार था जिसे शुद्र जैसी जातियां भी सबके साथ मिलकर मनाती थी। यह त्योहार हिन्दु धर्म से जुड़े लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस त्योहार के साथ ही मां दुर्गा के नवरात्री महोत्व का समापन भी जुड़ा हुआ है। पुराणिक कथाओं की बात करें तो भगवान राम ने भी मां दुर्गा की पूजा की थी, जिससे कि उन्हें युद्ध के समय विजय दिलाई थी। इन दोनों पर्व का एक साथ मनाए जाना इन त्योहारों की महत्ता को और बढ़ावा देता है। इसी के साथ यह भी कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानसे की रचना का आरंभ किया। राम नवमी का व्रत जो भी करता है वह व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और साथ ही उसे शुभ फल प्रदान होता है l मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, रामनवमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं l