नूतन वर्ष की संध्या पर लोक नृत्य व लोक गीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया आत्मविभोर…

लोक कलाओं की रसधार से सराबोर हुआ जलबिहार परिसर

ग्वालियर। पुरातन संस्कृति एवं प्राचीन भारत के दर्शन एवं पारंपरिक भेषभूसा की झलक के दर्शन करा रहे सहरिया लोकनृत्य देखकर आज जलविहार परिसर में बैठे सभी रसिकजन मंत्रमुग्ध हो गए। मौका था नलनाम नवसंवत्सर के स्वागोत्सव के तहत लोककला महोत्सव का। जिसमें अनेक प्रदेशों की लोक कलाओं की प्रस्तुति को देखकर जलबिहार परिसर में स्थित दर्शक भाव विभोर हो गये। इस अवसर पर देश भर के अनेक स्थानों के कलाकारों द्वारा अपनी-अपनी लोक कला का प्रदर्शन किया गया। 

जलबिहार के रंग बिरंगे तैरते रंगमंच पर आयोजित किये जा रहे नव सवंत्सर महोत्सव के तहत नूतन वर्ष की संध्या कालीन सभा में लोक कला महोत्सव का आयोजन किया गया। लोक महोत्सव कार्यक्रम में सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलन सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। दीप प्रज्जवलन के दौरान बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी, पूर्व सभापती राकेश माहौर सहित बडी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। 

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की श्रृंखला में सर्वप्रथम संस्कार भारती के ध्येय गीत पर नृत्य की प्रस्तुति कलाकारों द्वारा दी गई। इसके पश्चात सहरिया लोकनृत्य की प्रस्तुति इंदरसिंह आदिवासी के निर्देशन में दी गई। इसके बाद फरुवाही लोकनृत्य की प्रस्तुति विजय यादव अयोध्या के समूह द्वारा दी गई। कार्यक्रम के अगले क्रम में लोकगायक संजो बघेल लोक गायक राजेन्द्र कुमार राजपूत द्वारा प्रस्तुति दी गई।