G News 24 : UGC को लेकर जनरल के (अन्य वर्गों ),OBC, ST/SC वालों ने किए,सर्वे में चौंकाने वाला खुलासे !

क्या सच में सवर्णों के खिलाफ है और केवल सवर्ण ही क्यों इसके विरोध में है !!!

UGC को लेकर जनरल के (अन्य वर्गों ),OBC, ST/SC वालों ने किए,सर्वे में चौंकाने वाला खुलासे !

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देश में जो बहस छिड़ी है, वह अब सिर्फ यूनिवर्सिटी कैंपस तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया, टीवी डिबेट और राजनीतिक गलियारों से होते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सवाल सीधा है - क्या यूजीसी नई नियम वाकई सवर्णों यानी जनरल कैटेगरी के खिलाफ है, या फिर इसे लेकर गलत फहमी फैलाई जा रही है? इस सवाल का जवाब इंडिया टुडे-सी वोटर के ताजा सर्वे ने काफी हद तक सामने रख दिया है। सर्वे में लोगों से एक ही सवाल किया गया -"UGC के नए इक्विटी सेल नियम को क्या आप सामान्य वर्ग (GEN कैटेगरी) के खिलाफ है?" जवाब जाति और वर्ग के आधार पर काफी अलग-अलग नजर आए।

सर्वे के मुताबिक 80 प्रतिशत हिंदू जनरल कैटेगरी वालों का मानना है कि UGC के नए नियम जाति व्यवस्था को न मानने वाले सामान्य वर्ग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ! हां लेकिन जाति व्यवस्था को लेकर कुछ रूढ़िवादी लोग ये मानते हैं कि ये बिल उनके खिलाफ ही इस्तेमाल होगा। वे ऐसा क्यों मानते हैं इसका कारण भी उन्होंने खुद ही बयां कर दिया। 

सर्वे के आधार पर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन कुछ  रूढ़िवादी लोगों का मानना है कि कुछ जगह और कुछ कार्य ऐसे होते हैं जहां सिर्फ वे ही जा सकते हैं और उन कार्यों को कर सकते हैं। जब अन्य लोग जो अन्य समाज व जातियों से आते हैं, जब इसमें दखल देंगे और जब उन्हें ऐसा करने से रोका जायेगा तो फिर ये UGC उन्हें ऐसा करने से रोकेगा,इससे समाज में प्राप्त उच्च स्थान की गरिमा भी गिरेगी,इसलिए वे यहां समानता पर समझौता नहीं करेंगे । कुछ लोगों का जबाब तो ऐसा भी आया कि यहां लिखना भी ठीक नहीं है। ऐसे लोगों का मानना है कि वे जन्म से ही सर्वश्रेष्ठ हैं और उनकी कोई बराबरी नहीं कर सकता है और न किसी को ऐसा करने देंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि वे UGC को लागू ही नहीं होने देंगे। वहीं OBC वर्ग में 47 प्रतिशत लोगों ने नियम का समर्थन किया है। ST वर्ग में 33 प्रतिशत और SC वर्ग में 31 प्रतिशत लोगों ने इसे सही कदम बताया। ये आंकड़े उस धारणा को चुनौती देते हैं न कि पूरा जनरल वर्ग इस नियम के खिलाफ है।

 'UGC को गाली देने वाले सभी ज्ञानी, मोदी जी पर भरोसा रखें ...

"कुछ हद तक ठीक" मानने वाले कुछ लोगों ने यह भी माना कि नियम पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसमें सुधार की गुंजाइश है। SC वर्ग में 7 प्रतिशत, ST में 15 प्रतिशत, OBC में 18 प्रतिशत और जनरल कैटेगरी में 8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नियम आंशिक रूप से ठीक है। यह तबका मानता है कि उद्देश्य सही है, लेकिन लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। क्या यूजीसी के सुधार सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं ? SC वर्ग के 55 प्रतिशत लोगों ने नियम को गलत नहीं बताया है। ST में 47 प्रतिशत और OBC में 32 प्रतिशत लोगों ने भी असहमति जताई। हैरानी की बात यह रही कि जनरल कैटेगरी में सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों इसपर सहमति जताई। 

सुप्रीम कोर्ट ने UGC का 2012 वाला नियम किया लागू, यूजीसी नए-पुराने रूल्स का हर अंतर समझिए ...

सर्वे से क्या साफ होता है? इन आंकड़ों से एक साफ तस्वीर उभरती है। UGC का नया नियम जनरल कैटेगरी और OBC वर्ग में अपेक्षाकृत ज्यादा स्वीकार किया जा रहा है, जबकि SC और ST वर्ग में राय बंटी हुई है। सबसे तीखा विरोध जनरल समुदाय से देखने को मिला है। इससे यह भी साफ होता है कि इक्विटी सेल को लेकर देश में सामाजिक मतभेद गहराए हुए हैं। 

UGC के नए रेग्युलेशन 2026 का घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाना है...

इन नियमों के तहत धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान और विकलांगता के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने की बात कही गई है। खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों को सुरक्षा देने पर जोर है। 

विवाद की जड़ कहां है ...

असल विवाद जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर है। पहले ड्राफ्ट में केवल SC और ST को इस दायरे में रखा गया था। लेकिन अंतिम नोटिफिकेशन में OBC को भी शामिल कर लिया गया। यहीं से विरोध शुरू हुआ। कुछ लोगों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ शिकायतों का दुरुपयोग हो सकता है।

इक्विटी कमेटी पर भी सवाल...

नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षा संस्थान में एक इक्विटी कमेटी बनाई जाएगी। इसमें SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। विरोध करने वालों का सवाल है कि इस समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। उनका तर्क है कि बिना जनरल कैटेगरी के सदस्य के जांच निष्पक्ष कैसे होगी। 

विरोध की असली वजह क्या है...

पिछले कुछ हफ्तों से देश के कई विश्वविद्यालयों और इलाकों में इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले। माना जा रहा है कि विरोध करने वालों में बड़ी संख्या सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों की है। उनका आरोप है कि नए नियमों के तहत जनरल कैटेगरी को निशाना बनाया जा सकता है और फर्जी शिकायतों के जरिए करियर को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। 

UGC का ड्राफ्ट फाइनल सभी सहमति से और संसद से पास हुआ है, लेकिन निशाना सिर्फ मोदी पर... 

UGC की ड्राफ्टिंग के दौरान सरकार और पार्टी की तरफ से अच्छे समझदार, ज्ञानी लोगों को शामिल किया गया था जिसमे स्वर्ण वर्ग सहित सभी वर्ग और जातियों के लोग शामिल थे। यदि बिल में कुछ भी गलत था तो इसका विरोध/सुधार इन नेताओं ने क्यों नहीं किया ! अब जब बिल आ गया तो सड़कों पर बिल के विरोध के नाम पर मोदी को टारगेट करना विरोध को हवा देने वालों की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा तो करेगा ना !

अब आप देखिए कि जब सब कुछ फाइनल सबकी सहमति से हुआ तो भाई मोदी ने अकेले ने कैसे स्वीकृति दी ! क्योंकि पिछले कि दिनों से जिस तरह से नरेंद्र मोदी को स्वर्ण समाज के द्वारा चप्पल मारी गई तो आखिर क्यों मारी गई !

पिछले कुछ दिनों से जैसा माहौल बनाया जा रहा है उसे देखकर लगता कि उन लोगों द्वारा सिर्फ नरेंद्र मोदी को टारगेट किया जाना है UGC तो एक बहाना मात्र है।ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी स्वर्णो के खिलाफ है। इसमें आपको कितनी सच्चाई लगती है अगर आपका बौद्धिक स्तर अच्छा है तो मुझे नहीं लगता है इसमें नरेंद्र मोदी का कोई दोष है क्योंकि जब उन्होंने अपनी ओर से अपनी पार्टी और सरकार की तरफ से अच्छे प्रतिनिधि जो समाज के जानकार हो उनके हितों को समझते हो उन्हें इसकी ड्राफ्टिंग में शामिल किया था। इससे ज्यादा नरेंद्र मोदी ने क्या कर सकते थे ? 

 यह सिर्फ मोदी के खिलाफ एक माहौल बनाया गया है,यही सच्चाई है...

देश में काफी समय से मोदी के खिलाफ विपक्ष द्वारा एक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा था, और यूजीसी आते ही उसके बहाने अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने के प्रयास में सभी विरोधी जुट गए। इसमें कांग्रेस द्वारा साजिश की गई या कांग्रेस के स्वर्ण नेताओं द्वारा माहौल बनाया गया ये एक जांच का विषय हो सकता है। मोदी और  योगी के खिलाफ काफी समय से माहौल बनाने का प्रयास चल रहा था स्वर्ण नेताओं द्वारा दबे मुंह से यह कहना चालू कर दिया गया कि नरेंद्र मोदी योगी को हटाना चाहते हैं। धीरे-धीरे यह बात सोशल मीडिया के द्वारा स्वर्ण समाज के लोगों के पास पहुंचाई गई। हां लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी हो सकता है कि विपक्ष द्वारा या इन लोगों द्वारा ऐसा माहौल तैयार करवाया जाए कि मोदी-योगी को हटाने का कोई रास्ता बने। -

UGC नियमों पर धर्मेंद्र प्रधान का पक्ष ...

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भेदभाव रोकने के नाम पर कानून का दुरुपयोग न हो, यह केंद्र, राज्य सरकारों और यूजीसी सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने साफ किया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और हर कदम संविधान के दायरे में उठाया जाएगा। हालांकि, इस मुद्दे पर बीजेपी को अंदरूनी विरोध का भी सामना करना पड़ा। रायबरेली में बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने नए यूजीसी नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। 

यूजीसी ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2026 जारी किया...

यूजीसी ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2026 जारी किया। इसका मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। नए नियमों के तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य किया गया है, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी। विवाद की जड़ यह है कि नए नियमों में एससी और एसटी के साथ ओबीसी को भी जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी से जुड़े कई छात्र और संगठन इसे अपने खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, जिससे जांच निष्पक्ष नहीं रह पाएगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई UGC New Rule रोक...

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता से जुड़े नए रेग्युलेशन जारी किए थे। इन नियमों का मकसद कैंपस में किसी भी तरह के भेदभाव को खत्म करना बताया गया। लेकिन विरोध इतना बढ़ा कि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। 29 जनवरी को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ये नियम कई अहम सवाल खड़े करते हैं, जिनके दूरगामी सामाजिक असर हो सकते हैं और अगर इन्हें नजरअंदाज किया गया तो समाज में विभाजन की स्थिति बन सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। 

सुप्रीम कोर्ट की रोक से किसे राहत...

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इन नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा है कि फिलहाल 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। कोर्ट इस मामले की विस्तृत सुनवाई 19 मार्च 2026 को करेगा। इसी दिन रोहित वेमुला की मां की ओर से दाखिल उस याचिका पर भी सुनवाई होगी, जिसमें कहा गया है कि 2012 के नियम कभी प्रभावी तरीके से लागू ही नहीं हुए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक से नए नियमों के विरोध में खड़े तबके को राहत मिली है, लेकिन बहस थमी नहीं है। 19 मार्च 2026 को होने वाली सुनवाई तय करेगी कि यूजीसी के नए नियमों का भविष्य क्या होगा। तब तक धर्मेंद्र प्रधान और उनका मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में बने रहेंगे। स्पष्ट है कि यह मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि शिक्षा, समानता और सामाजिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है - दिव्या सिंह



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