मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करने वाली न्यूरोलॉजी संबंधी बढ़ती बीमारियों को देखते हुए…

अब ग्वालियर के परिधि हॉस्पिटल में मिलेंगी मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज दिल्ली के डॉक्टर्स की सेवाएं

 

मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करने वाली न्यूरोलॉजी संबंधी बढ़ती बीमारियों को देखते हुए देश के अग्रणी स्वास्थ्य संस्थान मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पटपड़गंज नई दिल्ली के द्वारा शनिवार को एक स्थानीय होटल में संवाद सत्र का आयोजन किया गया।  सत्र में जानकारी देते हुए नई दिल्ली पटपड़गंज मैक्स हॉस्पिटल में न्यूरो साइंस के निदेशक डॉ विक्रम सिंह भदौरिया ने बताया कि वे ग्वालियर शहर के ही परिधि हॉस्पिटल के सहयोग से विशेष न्यूरोसाइंस ओपीडी सेवाएं यहां शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि न्यूरो सर्जरी की ओपीडी परिधि हॉस्पिटल सिटी सेंटर ग्वालियर में सुबह 10:00 बजे से 2:00 बजे तक प्रत्येक महीने के चौथे शनिवार को लगेगी। हर महीने ओपीडी संचालन के लिए वे स्वयं मौजूद रहेंगे।

उन्होंने कहा कि संवाद सत्र आयोजित करने के पीछे उनका मकसद है मस्तिष्क और रीढ़ की समस्याओं समेत किसी तरह की समस्या से जूझ रहे लोगों को निजात दिलाने के लिए यह जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाना और आधुनिक चिकित्सा पद्धति का लाभ अधिक से अधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर मिल सके। उन्होंने कहा कि विरोधी कल समस्याएं हर आयु वर्ग के लोगों में देखने को मिल रही है और उन्होंने इस बात पर चिंता भी जताई उन्होंने इसका एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अंतरराष्ट्रीय बॉस्केटबॉल खिलाड़ी हर्षवर्धन सिंह जो उनके साथ मीडिया से रूबरू हुए के बारे में बताया कि श्री तोमर को सफल इलाज किस प्रकार उन्होंने दीया उन्होंने बताया कि उनकी रीड की हड्डी में शहरी न्यूरल सिस्ट हो गया था जिस का सफल इलाज होने के बाद वह मात्र 15 दिन में फिर से बेहतर जिंदगी में लौट आए हैं और आगे वह अपना जो खेल है उसे भी कंटिन्यू कर पाएंगे 21 वर्षीय हर्षवर्धन को पिछले 3 महीने से कमर के निचले हिस्से में तकलीफ थी जो कम नहीं हो रही थी पिछले 1 सप्ताह से बीमारी की गंभीरता और बढ़ गई दर्द इतना बढ़ गया था कि इसका प्रसार दाहिने पैर की पिंडली तक पहुंच गया था।

विस्तृत जांच और MRI से पता चला कि कमर के पिछले  हिस्से में दर्द का कारण एक सिस्ट है जिसके कारण तेज दर्द होता है। कमर के पिछले हिस्से में डॉक्टर भदौरिया और उनकी सर्जरी टीम ने एक छोटा सा चीज चीरा लगाकर इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया और इस ऑपरेशन के मात्र 15 दिन बाद ही हर्षवर्धन सिंह तोमर दोबारा अपनी उसी पुरानी लाइफ को एंजॉय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई मरीज ओपन और परंपरागत सर्जरी की जटिलताओं के कारण घबराते हैं लेकिन नई टेक्नोलॉजी की बदौलत स्पाइनल सर्जरी न्यूनतम शल्य क्रिया और 100 पीसदी सुरक्षित रहती है जिसमें कम से कम रक्त स्त्राव जल्दी रिकवरी होती है। इसलिए इससे मरीजों को घबराना नहीं चाहिए।