पुराने परिसर में ही चल रहा कारोबार…

गुटबाजी के चलते खाली पड़ी 15 करोड़ की लागत से तैयार नई सब्जी मंडी

लक्ष्मीगंज स्थित सब्जी की थोक मंडी परिसर का विस्तार 15 करोड़ की लागत से 8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किया गया था। कई तरह की सुविधा नई मंडी परिसर में जुटाई गई, लेकिन सब्जी कारोबारियों के विभिन्न गुट और उनकी गुटबाजी के कारण पुरानी सब्जी मंडी परिसर से कारोबारियों की शिफ्टिंग का मामला अधर में लटक गया। हालत यह है कि 8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बना सब्जी मंडी परिसर खाली है, लेकिन मात्र 2 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कई साल से पुराने परिसर में ही सब्जी कारोबारी आज भी कारोबार कर रहे हैं। 

जिला प्रशासन ने कई बैठक करके सब्जी कारोबारियों को समझाने की कोशिश की, कि नई मंडी परिसर में अपनी दुकानों को शिफ्ट करें, लेकिन सब्जी कारोबारी कभी प्रभारी मंत्री, तो कभी गृहमंत्री के सहारे प्रशासन पर ही दबाव बनाने में कामयाब रहे और प्रशासन को मजबूरी में पुरानी मंडी परिसर में ही सभी दुकानों को खोलने की अनुमति देना पड़ी। 

इससे नई मंडी में दुकानों की शिफ्टिंग का मामला अधर में लटका रह गया। 15 करोड़ खर्च करके मंडी बोर्ड ने नई मंडी परिसर में विभिन्न कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शेड, किसानों और हम्मालों के लिए अलग-अलग विश्रामगृह, दुकानों के लिए 248 विकसित भू-खंड, आरसीसी सड़क, पानी की टंकी सहित विभिन्न सुविधाएं जुटाई गई। अब इनमें से किसी भी सुविधा का इस्तेमाल यहां नहीं हो रहा है। 248 भू-खंड जो नीलामी में खरीदे गए,उनमें से कुछ पर शेड लगाकर दुकानें बनी भी, लेकिन कारोबार न होने से वे अब खाली हैं।

हमने सब्जी कारोबारियों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ कारोबारी इसके लिए तैयार नहीं हुए। जिससे सभी दुकानों को नई सब्जी मंडी में शिफ्ट नहीं करा सके। अब कुछ दिन बाद दोबारा से सब्जी कारोबारियों से बात करेंगे और उनको समझाएंगे कि उनके लिए शासन ने करोड़ों खर्च कर, जो नया मंडी परिसर तैयार किया है, वहीं पहुंचकर अपना कारोबार करें - गजेंद्र तोमर, सचिव, लश्कर कृषि उपज मंडी