गुरुद्वारा श्री दाताबंदी छोड़ पर…

3 दिन तक रोज लाखों लोगों के लिए प्रसाद बनाने में जुटे सैंकड़ों लोग

ग्वालियर में दाताबंदी छोड़ गुरुद्वारा के 400 साल पूरे होने पर सोमवार से 3 दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो गया है। रोजाना डेढ़ लाख श्रद्धालु आने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं के प्रसाद के लिए यहां सबसे बड़ा लंगर तैयार हो चुका है। लंगर बनाने और खिलाने की जिम्मेदारी आनंदपुर साहिब पंजाब से आई संगत के लोग संभाल रहे हैं। पूरा खाना देसी घी में बनाया जा रहा है। संगत से बाबा सिंह ने बताया कि अभी सैंकड़ों लोग लंगर बनाने से लेकर खिलाने तक के इंतजाम संभाल रहे हैं। 24 घंटे तंदूर जल रहे हैं। इसके लिए 50 ट्रक लकड़ियों का इंतजाम किया गया है।

रविवार शाम एक दल और पंजाब से ग्वालियर पहुंच गया है। हमारा उद्देश्य यहां आने वाले भक्तों, श्रद्धालुओं को अच्छा प्रसाद खिलाना है। एक भी पकवान में तेल का उपयोग नहीं किया गया है। लंगर के भोग में चपाती में तवा रोटी और तंदूर रोटी दोनों का विकल्प है। सुबह शाम चाय-कॉफी से लेकर खाने का प्रसाद तक ताजा बना रहे हैं और खिला रहे हैं, इसलिए 24 घंटे किचन खुला है। किचन में तंदूर को 3 दिनों तक 24 घंटे जलाने के लिए 50 ट्रक लकड़ी कई शहरों से यहां आई हैं। यह दान की लकड़ी है। मतलब इसके लिए कोई पेड़ नहीं काटा गया है। यह वह लकड़ी है, जो जमीन टूट कर अपने आप गिरी है। 

इसके अलावा, गुरुद्वारा के सेवादार बाबा देवेन्द्र सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में लोग आएंगे, तो पानी की जरूरत पड़ेगी। किले की इतनी ऊंचाई पर 1 करोड़ लीटर पानी स्टोर किया गया है। यह जल किसी नल या कुएं का नहीं है। गुरुद्वारा की वाटर हार्वेस्टिंग से यह तालाब पिछले कुछ दिनों में भरा गया है। इसका उपयोग कार्यक्रम में आने वाले और ठहरने वालों को लिए होगा। दाताबंदी छोड़ गुरुद्वारा में तीन दिन के लिए लंगर में प्रसाद बनाने के लिए कोई भी सब्जी, आटा या फल फुटकर में नहीं, बल्कि हजारों किलो की मात्रा में आया है। जैसे हजारों किलो प्याज, आलू, टमाटर आए हैं। मसालों के पैकेट 100-100 किलो के आए हैं। सारे मसाले संगत ने खुद तैयार किए हैं। मास्क बांटने के साथ वैक्सीन भी लगाई जाएगी।

26 सितंबर से यहां नगर कीर्तन यात्राएं अंचल के विभिन्न हिस्सों से आना शुरू हो गई हैं। 30 सितंबर से यहां पर वैक्सीनेशन कैंप लगा दिया गया है। इसमें औसतन 50 लोग प्रतिदिन वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यहां 4 लाख मास्क बांटने के लिए रखे गए हैं। दाताबंदी छोड़ घटना को 400 साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में किले पर आने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। किले के मुख्य दरवाजे पर पुलिस है। उसके बाद सिख समुदाय के युवा और बुजुर्ग ने सुरक्षा से लेकर यातायात व्यवस्था संभाल रखी है। करीब 15 पॉइंट पर युवा व्यवस्था बनाने के लिए तैनात किए गए हैं।