पचहत्तर वर्षों से हो रहा है निरंतर आयोजन…

इस बार नहीं होगी ग्वालियर की ऐतिहासिक छतरी मैदान की रामलीला !

ग्वालियर। ग्वालियर की ऐतिहासिक छतरी मैदान में होने वाली रामलीला और दशहरा पर होने वाला रावण दहन का आयोजन इस बार खतरे में पड़ गया है। इस बार इस रामलीला की डायमंड जुबली आयोजन हुआ था क्योंकि इस वर्ष की शुरुवात को 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। ग्वालियर के लश्कर इलाके में आयोजित होने वाला रामलीला उत्सव न केवल ग्वालियर बल्कि समूचे अंचल में आकर्षण का केंद्र बना रहता था। इसकी शुरुआत पचहत्तर वर्ष पहले हुई थी तब से निरंतर इसका आयोजन होता रहा है। कोरोना के कारण इसका आयोजन प्रतीकात्मक ही हुआ लेकिन इस बार रामलीला आयोजन सम्भव नही दिख रहा है। अभी तक जिला मजिस्ट्रेट ने इस आयोजन के लिए मंजूरी नही दी है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि वे कोरोना के चलते इस मामले को गहन विचार करके ही कोई निर्णय देंगे। दरअसल अब इस मामले में कुछ और पेंच फंस गए है। 

छत्री मंडी के बगल में स्थित यह मैदान पहले शिक्षा विभाग के अधीन था लेकिन बाद में यह नगर निगम को हस्तांतरित हो गया। इसके बावजूद यह निरंतर होता रहा लेकिन अब इसमें स्मार्ट सिटी विभाग ने हॉकी स्टेडियम के रूप में विकसित कर दिया है लिहाजा इसके लिए आप स्मार्ट सिटी प्रबंधन से इजाजत लेनी होगी। रामलीला आयोजन समिति के प्रमुख पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल भी मानते है कि इस बार आयोजन होना संभव नही लग रहा है। उनका कहना है कि अभी तक कहीं से स्वीकृति नही मिली है। रामलीला एक अक्टूबर से शुरू होनी है। इसके लिए वृंदावन जाकर कलाकारों को तभी बुक किया जा सकता है जब मंजूरी हो। अगर रामलीला नही हुई तो दशहरा पर रावण दहन भी सम्भव नही होगा।

अभी इस मामले को विशद रूप से देख रहे है । कोरोना गाइडलाइन और स्थितियों को देखते हुए ही कोई निर्णय कर सकूंगा कौशलेंद्र विक्रम सिंह ,कलेक्टर, ग्वालियर

अभी तक आयोजन की परमिशन नहीं मिली है । इस साल रामलीला का पचाहत्तरवां साल था अगर कोरोना नही होता तो कुछ और आकर्षण रखतेरमेश अग्रवाल , अध्यक्ष छत्री रामलीला आयोजन समिति ग्वालियर