आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, HC में सुनवाई 8 को…

शून्य घोषित हो सकता है तुलसी सिलावट का निर्वाचन !

इंदौर। केंद्रीय नागरिक उड्यनमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी और मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ 2018 के विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर दायर एक याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस मामले में कोर्ट ने चुनाव आयोग को सिलावट के निर्वाचन से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सिलावट के चुनाव से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड 8 अक्टूबर से पहले कोर्ट में पेश किया जाए। 

इस मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को ही होगी। इससे पहले कोर्ट सिलावट की तरफ से कोर्ट में मामला खत्म करने को लेकर दिए गए आवेदन को 30 जुलाई को खारिज कर चुका है। सिलावट के खिलाफ चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक राजेश सोनकर और राहुल सिलावट ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थीं। जिसके बाद सिलावट के पिछले साल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों की याचिकाओं को खत्म करने का आवेदन दिया था। इस मामले में कोर्ट ने 5 फरवरी 2021 को याचिका खत्म करने का नोटिफिकेशन भी जारी किया था, लेकिन दोनों याचिकाओं को जारी रखे जाने के लिए सांवेर के पवन सिंह और मुकेश चौधरी ने कोर्ट में आवेदन देते हुए कहा था कि सिलावट ने आचार संहिता उल्लंघन किया है, इसलिए उनका चुनाव शून्य घोषित किया जाना चाहिए। 

प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट पर आरोप है कि 2018 के चुनाव में उन्होंने अपने नामांकन पत्र के साथ जमा किए जाने वाले शपथ पत्र में भी गलत जानकारी दी थी। शपथपत्र में उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी नहीं दी थी। इसके अलावा उनपर चल रहे क्रिमिनल केस और शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी गलत जानकारी दी गई थी। याचिकार्ताओं का दावा है कि नियमानुसार शपथपत्र में गलत जानकारी देने पर चुनाव शुन्य घोषित किया जा सकता है।