हर जांच का रेट घटाया, कोरोना उपचार मात्र 25 हजार तक ले आये...

शिव के मार्गदर्शन में कोरोना कंट्रोल में नंबर वन बना बड़वानी

बडवानी। कोविड का कहर जहां चहुंओर था, ऐसे में मध्यप्रदेश के बडवानी जिले में जिला कलेक्टर शिवराज वर्मा के कुशल प्रबंधन में जिले में न केवल स्थिति नियंत्रण में रही, बल्कि कोरोना  संक्रमित लोगों के निजी अस्पतालों में उपचार की दर मात्र जिला कलेक्टर शिवराज वर्मा ने दूरदर्शी निर्णय लेकर टोटल इलाज जाँच खर्चा सहित 25 हजार करवा दिय। इसी क्रम में जिले के सरकारी चिकित्सालय में भी निःशुल्क उपचार हेतु व्यवस्थायें चाकचौबंद की गई। नये क्वारनटाइन सेंटर भी बनाये गये। जिला कलेक्टर शिवराज वर्मा के इस प्रयास से बड़वानी में कोरोना संक्रमण की दर भी बेहद घट गई। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी इसकी जमकर सराहना की है और इसे मुख्यमंत्री ने माॅडल मानकर प्रदेशभर में लागू भी कराया। हां हम बात कर रहे है कि बड़वानी के कलेक्टर शिवराज वर्मा की, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से कोविड संक्रमण को बड़वानी में 32 प्रतिशत तक कम कर दिया और पोजिवटी रेट एक प्रतिशत तक ले आये हैं।

कलेक्टर ने संक्रमित लोगों को बेहतर से बेहतर उपचार दिलाया। उन्होंने जिले में आक्सीजन की कमी भी नहीं होने दी। 200 आक्सीजन कंसनट्रेटर मशीन की अलग से व्यवस्था की। इसका परिणाम यह रहा कि पूरे मध्यप्रदेश में बड़वानी में सबसे कम केस आये। बड़वानी जिला कलेक्टर शिवराज वर्मा के कुशल प्रबंधन और कार्यशैली व कोरोना नियंत्रण की खबरें जब आसपास के जिलों में पहुंची तो वहां के महंगे इलाज से घबराकर कोरोना संक्रमित बड़वानी आने लगे और यहां के निजी अस्पतालों में अपना इलाज कलेक्टर द्वारा निर्धारित रेट पर कराया। इसी प्रकार राज्य की सीमा से लगे महाराष्ट्र के निकटवर्ती जिलों व ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी भी बड़वानी आये और इलाज का लाभ उठाया। कलेक्टर शिवराज वर्मा बताते हैं कि पूर्व में उनके पास कोरोना संक्रमण की शुरूआत में निजी अस्पतालों मंक मनमानें दाम, उपचार में लापरवाही, महंगी जांच और महंगी दवा की शिकायतें आई तो उन्होंने स्वयं रणनीति बनाकर सस्ती दरें निर्धारित की। 

जिससे आम जनता को बेहद राहत मिली और लोगों में इलाज के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। बाद में इसे मुख्यमंत्री ने माॅडल मानकर दूसरे जिलों में लागू कराया। वर्मा ने बताया कि उन्होंने जिले के 5 निजी अस्पतालों का एक दिन निरीक्षण किया तो उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि सभी अस्पताल एक-एक कोरोना पेशेंट के नाम पर पचास हजार से लेकर एक लाख रूपये की राशि बेड, टेस्ट, रेमडेसिविर इंजेक्शन, दवाईयां, डाॅक्टर फीस, आक्सीजन सिलेण्डर के नाम पर सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार के सामान्य मरीजों से भी वसूल रहे हैं। इससे जिले में कोरोना के नाम पर भय का वातावरण निर्मित हो रहा है। तब उन्होंने जिले के निजी अस्पताल संचालकों व पैथोलाजी संचालकों की मीटिंग कर कोरोना इलाज व जांच की दर निर्धारित की, जिससे बड़वानी की जनता को बेहद राहत मिली। इससे टोटल इलाज खर्चा मरीजों का घटकर लाख, सवा लाख से 25 हजार तक पहुंच गया।