संक्रमण बढऩे के बाद भी नहीं सुधर रहे लोग…

पिछले आठ दिन से कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से हो रही है वृद्धि

ग्वालियर। शहर के साथ-साथ जिले भर में कोरोना महामारी ने एक बार फिर से पांव पसारना शुरू कर दिए और पिछले आठ दिन से लगातार पंद्रह से ऊपर मरीज मिलने के बाद प्रशासन तो अलर्ट मोड में आ गया पर जनता अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है जिसके कारण कभी भी शहर के हालात पहले जैसे हो सकते हैं। प्रशासन के बार-बार कहने के बाद भी ना तो बाजारों में कोरोना गाइडलाइन का पालन हो रहा है और ना ही विवाह समारोह व मेरिज गार्डनों में कोरोना गाइडलाइन का पालन कराया जा रहा है जिसके कारण सुबह से लेकर देररात तक सड़कों पर लोगों का हुजूम सा नजर आता है। पिछले चार माह से लोग ऐसे आजाद हो गए हैं मानो कोरोना शहर से गायब हो गया और बिना मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग तो बिल्कुल भूल सा गये हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले साल मार्च में प्रारंभ हुए कोरोना वायरस का असर एक बार फिर से दिखाई देने लगा और महाराष्ट्र में जहां हालात बद से बदतर हो गए। 

वहीं मध्यप्रदेश में भी हालात ठीक नहीं हैं भोपाल, इंदौर, जबलपुर के बाद ग्वालियर में भी पिछले आठ दिन से कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। जिसके चलते प्रशासन को ना सिर्फ क्राइसेस मेनेजमेंट की बैठक करना पड़ी बल्कि एहितियात के तौर पर पुलिस व प्रशासन के अमले को पूर्व की भांति मैदान में उतारना पड़ा। इतना सबकुछ होने के बाद भी जनता है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही। प्रतिदिन कोरोना के मरीजों की आमद ने प्रशासन की चिंता तो बढ़ा दी पर जनता अभी भी बेफिक्र होकर बाजारों और विवाह समारोहों में घूम रही है। ना तो मेले में सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क लगाकर लोग पहुंच रहे हैं और ना ही मेरिज गार्डनों में इसका पालन हो रहा है। अभी शिवरात्रि पर्व पर भी ऐसा हाल देखने को मिला जब मंदिरों पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु कोरोना से बेखबर नजर आए और नबे फीसदी भक्तगण बिना मास्क के ही दिनभर मंदिरों में दर्शन करते नजर आए। 

यहां यह बताना भी जरूरी होगा कि मेला व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के प्रशासन के सख्त निर्देश हैं बाबजूद इसके ना तो मेला में कोई गाइडलाइन का पालन हो रहा और ना ही बाजारों में फलस्वरूप सुबह से लेकर देररात तक बाजारों में भारी भीड़ नजर आ रही है। कोरोना ने भले ही दुबारा से शहर में पांव पसारना शुरू कर दिए हैं पर दुकानदार और ग्राहक पूरी तरह से अभी भी बेखबर हैं। दुकानों पर ना तो गोले नजर आ रहे और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा जिसके कारण लोग चिपक-चिपक कर खरीदारी करने में जुटे हुए हैं। भले ही प्रशासन ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ग्वालियर व्यापार मेले में बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अनिवार्य कर दिया पर इन सबके बाबजूद मेले में सैलानी बिंदास बिना मास्क के घूमकर कोरोना संक्रमण को घरों पर ला रहे हैं जिसके गंभीर परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे। 

मेले के गेटों पर सुरक्षा और जांच-पड़ताल को लेकर मशीन देकर गार्डों को बैठा दिया गया है पर इन गार्डों को ना तो सैलानी तबज्जो दे रहे और ना ही व्यवसाईयों में कोई खौफ नजर आ रहा है। गार्ड गेटों पर कुर्सी डालकर बैठे रहते हैं और सैलानी बिना जांच-पड़ताल के अंदर चले जाते हैं। नतीजा सारे गेटों पर लगे सुरक्षा गार्ड शो-पीस बनकर रह गए है। सुरक्षा गार्डों की बजाय अगर गेटों पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अमले को तैनात किया जाए तो सैलानियों की ना सिर्फ जांच-पड़ताल ठीक प्रकार से हो सकेगी साथ ही कोरोना का संक्रमण भी बढऩे का खतरा कम होगा। प्रशासन द्वारा क्राइसेस मैनेजमेंट की बैठक में दिए निर्देशों का ठीक प्रकार से पालन नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में शहर के हालात बिगड़ सकते हैं और भोपाल, इंदौर, जबलपुर की तरह ग्वालियर भी हॉटस्पाट बन जाएगा।