हिंसा पीड़ित महिलाओं के सहायता के लिए…

HC ने निर्भया फंड का सही इस्तेमाल न होने पर UP सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंसा पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं के सहायता के लिए बनाए गए निर्भया फण्ड का इस्तेमाल न करने की शिकायत को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए 2 फरवरी को पेश करने का निर्देश दिया है. याचिका में निर्भया फंड राशि के साथ खर्च और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाये गए कदमों का ब्यौरा देने की मांग की गई है. 

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस शमशेरी की खण्डपीठ ने अधिवक्ता ममता सिंह की जनहित याचिका पर दिया है. याची का कहना है कि 2013 में दिल्ली में हुए निर्भया काण्ड के बाद केंद्र सरकार ने 1000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृति की थी. इस राशि मे महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा में खर्च करना था, जिसके लिए केंद्र सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. निर्भया फण्ड बनाकर इकट्ठा करोड़ों की राशि राज्य सरकारों को आवंटित की गई, 

लेकिन राज्य सरकार द्वारा इस फण्ड को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. याची का कहना है कि अब तक पूरी राशि का मात्र 11 प्रतिशत यानि 252 करोड़ ही खर्च किया गया है. 18 राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल 15 प्रतिशत फंड खर्च किया गया. 2019 तक महाराष्ट्र में एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया. त्रिपुरा और केरल ने अपने निर्भया फंड से मात्र 3 प्रतिशत, मणिपुर ने 4 प्रतिशत, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली ने 5-5 प्रतिशत खर्च किया और तेलंगाना, कर्नाटक और उड़ीसा ने अपने निर्भया फण्ड से केवल 6 प्रतिशत व्यय किया.