नियम कायदों को ठेंगा दिखाकर वरिष्ठता व वेतन वृद्धि पाने...

अवकाश वाले दिन व्याख्याता ने स्वयं ही ग्रहण किया चार्ज 

बी.एड. काॅलेज ग्वालियर में कार्यरत व्याख्याता मंजू शर्मा को पदोन्नति दिलवाने या यूं कहें कि स्वयं मंजू शर्मा ने सीनियरटी का फायदा उठाने के मकसद से बी.एड. काॅलेज ग्वालियर, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) मुरैना एवं राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के द्वारा नियम कायदों को किस कदर तोड़-मरोड़ और दर-किनार करते हुए इस कारनामे को अंजाम दिया गया। एक महिला व्याख्याता द्वारा इस प्रकार के कारनामे को इन तीनों ही संस्थानों के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों की मिली-भगत व सहयोग केे बिना अंजाम देना संभव ही नहीं है। इस मामले में नियमों को कैसे ठेंगा दिखाया गया है ? कैसे उनकी अनदेखी की गई है ? उन्हे कैसे तोड़ा-मरोड़ा गया यह सब हम आपको मय सबूत के दिखायेंगे। ममला कुछ इस प्रकार है कि 12 अगस्त 2011 में स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के यहाँ से विभागीय पदोन्नति में व्याख्याता पद पर शा.शिक्षा.महा.वि. ग्वालियर में कार्यरत मंजू शर्मा को पदोन्नति देते हुए मुरैना के डाइट काॅलेज में स्थानांतरित किया गया था। जहाँ इन्हें 30 अगस्त 2011 तक जाॅइन करना था, लेकिन उन्होनें नियत दिनांक तक यहाँ ज्वायनिंग नहीं ली। इसलिए ये आदेश स्वयं ही निरस्त हो गया। इसके बाद अंतिम अवसर के रूप में इन्हें ज्वायनिंग के लिए एक मौका 20 जुलाई 2012 तक डाइट काॅलेज मुरैना में ज्वायनिंग के लिए दिया गया। यह आदेश पत्र क्रमांक 1841/13जुलाई 2012 को रश्मि अरूण शमी (आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल) के नाम जारी किया गया था। इस आदेश के साथ एक बात पर विशेष जोर दिया गया था कि पदभार ग्रहण करने की तिथि ही वरिष्ठता की तिथि होगी। 

अब मामले में ट्वीस्ट यहीं से शुरू होता है, क्योंकि श्रीमती शर्मा ने वरिष्ठता हासिल करने के चक्कर में इस पूरे मामले को अंजाम दे डाला और इसमें इनके सहयोगी की भूमिका निभाई इनसे संबधित तीनों ही संस्थानों के कर्मचारियों व जिम्मेदारों ने... श्रीमती शर्मा ने सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों से सांठ-गांठ करते हुए इस कारनामे को इतनी रफ्तार से अंजाम दिया गया कि जानकर आपका भी दिमाग चक्कर खा जायेगा। आप जानकर हैरान हो जायेंगे कि सरकारी विभागों में क्या कभी इतनी दृतगति से भी कार्य हो सकता है। ये सब आपको यूँ समझ में नहीं आयेगा। इसलिए हम आपको बिन्दुवार बताते हैं। जैसा कि आपको बताया कि वरिष्ठता के साथ पदोन्नति के ज्वायनिंग हेतु 13 जुलाई 2012 को जो लेटर आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के द्वारा जारी किया गया था, उसके अनुसार ज्वायनिंग की लास्ट डेट 20 जुलाई 2012 थी। लेकिन मंजू शर्मा ने 14 जुलाई 2012 शनिवार के दिन अपनी ज्वायनिंग डाइट काॅलेज मुरैना में दिखा दी। जबकि 14 जुलाई 2012 महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण अवकाश था। अवकाश होने के बावजूद श्रीमती शर्मा ने 14 जुलाई 2012 को मुरैना डाइट काॅलेज पहुंच कर किससे चार्ज ग्रहण किया ? अवकाश वाले दिन संस्थान कैसे खुला था ? अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए श्रीमती शर्मा ने बाकायदा उपस्थिति पंजी में अपने हस्ताक्षर भी किये हैं। उस पंजी में 14 तारीख वाले काॅलम में भृत्य जगदीश शर्मा के और मंजू शर्मा के अलावा और किसी के भी हस्ताक्षर नहीं हैं। तो फिर क्या यह मान लिया जाये कि श्रीमती शर्मा ने अवकाश वाले दिन मुरैना डाइट काॅलेज पहुँचकर भृत्य से चार्ज ग्रहण किया था। 

ऐसे में प्रश्न उठना लाज़मी है कि आखिर इस जल्दबाजी का कारण क्या था ? कि सीनियर अधिकारियों की गैर मौजूदगी में एक भृत्य से संस्थान खुलवा कर उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर अपनी मौजूदगी दर्शाना और चार्ज लेना । वह भी अवकाश वाले दिन। ये कार्य श्रीमती शर्मा सोमवार यानि 16 जुलाई 2012 को भी तो कर सकती थीं। और फिर ज्वायनिंग की लास्ट डेट भी तो 20 जुलाई 2012 थी। फिर इतनी जल्दबाज़ी क्यों ? एक गौर करने वाली बात यह भी है कि 13 तारीख को ज्वायनिंग का आदेश निकलता है 14 को श्रीमती शर्मा ज्वायनिंग लेती हैं और 14 तारीख को ही स्वैच्छिक रूप से पुनः ग्वालियर में अपने पुराने संस्थान में ही तबादला करवाने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया जाता है जिसे बाद में आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल - रश्मि अरूण शमी के हस्ताक्षर युक्त ज्वायनिंग का आदेश पत्र के रूप में विभिन्न विभागों के लिए भी जारी भी कर दिया जाता है। और तो और श्रीमती शर्मा को 13 जुलाई 2012 की शा.शि.महा.वि.,ग्वा. रिलीविंग भी दिखा दी गयी। जबकि शा.शि.महा.वि.,ग्वा. के डिस्पेच रजिस्टर में इसका कोई रिकाॅर्ड नहीं है, हाँ राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल से निकले आदेश की प्राप्ती जरूर आवक पंजी में 16 जुलाई 2012 में दिखाई गई है। अब फिर वही प्रश्न उठता है कि जब आदेश की प्रति 16 जुलाई को आई तो फिर 13 जुलाई को रिलीविंग और 14 जुलाई को ज्वायनिंग कैसे और किस आधार पर हो सकती है ? तो है न वास्तव में अद्भुत कारनामा और स्कूल शिक्षा विभाग के काम करने की अद्भुत और आश्चर्यजनक रफ्तार। क्या वास्तव में इन विभागों में इस रफ्तार से कार्य होता है ? 

अब आता है मामले में नया मोड़ वह इस प्रकार है कि जिस प्रकार श्रीमती शर्मा ने अवकाश वाले दिन मुरैना डाइट में एक भृत्य से पदभार ग्रहण कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। उसे देखकर तो एक बार को तो यही लगा कि श्रीमती शर्मा यहाँ कार्य करने के लिए अति उत्साहित है । इसीलिए उन्होंने अवकाश वाले दिन इतनी जल्दबाजी में चार्ज लिया। लेकिन 14 जुलाई 2012 को ही यानी कि जिस दिन चार्ज लिया उसी दिन (ज्वायनिंग वाले दिन) ही मुरैना डाइट से ग्वालियर शा.शि.महा.वि. यानि कि अपनी पुरानी जगह पर ही दुबारा पोस्टिंग के लिए आवेदन प्राचार्य से अनुशंसा करा कर सचिव-स्कूल शिक्षा म.प्र. शासन को दे दिया। हाँलांकि वो बात अलग है कि इन पत्रों के आदान-प्रदान का रिकार्ड भोपाल के आवक-जावक पंजी में ही नहीं है। एक प्रश्न यह भी उठता है कि एक व्यक्ति एक ही दिन व तारीख में तीन जगह कैसे मौजूद हो सकता है ? क्योंकि जिस प्रकार से आवेदन पर ग्वालियर मुरैना और भोपाल के बीच कार्रवाई हुई है उससे या प्रश्न उठ खड़ा होना लाजमी है। इसके बावजूद मंजू शर्मा का स्थानांतरण मात्र 4 दिन बाद यानि 18 जुलाई को पुनः शा.शि.महा.वि. ग्वालियर में हो जाता है और वे इसी दिन यहां उपस्थिति पत्रक में हस्ताक्षर कर अपनी जॉइनिंग भी दिखा देती है। जबकि डाइट काॅलेज भोपाल द्वारा श्रीमती शर्मा का मुरैना से रिलीविंग का लेटर 24 जुलाई को जारी होना दिखाया गया है। यानी कि मुरैना डाइट से श्रीमती शर्मा को रिलीव करने का आदेश 24 जुलाई 2012 को भोपाल से निकला। इसका मतलब यह हुआ कि श्रीमती शर्मा ने 8 दिन पहले ही पुनः ग्वालियर में ज्वायनिंग ले ली। 

14 जुलाई शनिवार सेकंड सैटरडे का अवकाश और 15 का रविवार केवल दो कार्य दिवस यानी 16-17 जुलाई के बीच मुरैना डाइट में जॉइनिंग, फिर स्थानांतरण आवेदन, और फिर ग्वालियर b.ed कॉलेज में दोबारा से जॉइनिंग। तो है न पहुंच, पावर और... का कमाल । इस प्रकार के कार्यों के लिए जहां एक साधारण आदमी को ये सब करने के लिए महीनों या कभी-कभी तो सालों तक दफ्तरों के चक्कर काटना पड़ते है तभी सफल होने की कोई गारंटी नहीं है। जबकि श्रीमती शर्मा ने यह कारनामा मात्र 2 दिन में कर दिखाया। आरटीआई कार्यकर्ता के द्वारा इस मामले में चीनी 24 के सामने एक खुलासा और भी किया गया। उन्होंने बताया कि श्रीमती शर्मा के स्वैच्छिक स्थानांतरण आवेदन को भोपाल मुख्यालय की आवक पंजी में कहीं भी आवक हुआ नहीं दिखाया  गया है। तो फिर श्रीमती शर्मा का स्थानांतरण मुरैना से पुनः ग्वालियर कैसे हो गया ?  इस बात का जबाव कोई भी जिम्मेदार नहीं दे पा रहा है। भ्रष्टाचार का सहारा लेकर संपन्न इस कारनामे की गवाही उपस्थिति पंजी (मुरैना व ग्वालियर महाविद्यालयों की) में की गई ओवर राइटिंग व काट-छाँट से भी हो रही है। अब देखना होगा कि खबर चलने के बाद भोपाल मुख्यालय और म.प्र. शासन के द्वारा इस मामले को अंजाम देने वाले लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और कब तक होती है ? क्या यह कार्रवाई भी इसी रफ्तार से होगी, जिस रफ्तार से यह ज्वायनिंग व ट्रांसफर हुआ था। और यह अकेला श्रीमती शर्मा का मामला नहीं है। इस पीरियड में अन्य कई लोगों ने भी इसी प्रकार घाल-मेल किया था। यदी मामले की तह तक छानबीन की जाये तो और भी नामों का खुलासा हो सकता है।