भारत सरकार द्वारा निर्देशित…

हर्षोल्लास के साथ मना सीमा सुरक्षा बल का 56 वाँ स्थापना दिवस

ग्वालियर। सीमा सुरक्षा बल अकादमी टेकनपुर में बीएसएफ का 56वां स्थापना दिवस आज बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्देशित कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुपालन का विशेष ध्यान रखा गया। सीमा सुरक्षा बल अकादमी के समस्त अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों ने आयोजन में बढ-चढकर हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री रामअवतार, महानिरिक्षक/संयुक्त निदेशक सीमा सुरक्षा बल अकादमी टेकनपुर ने “अजेय प्रहरी” शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र चढाकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद क्वार्टर गार्ड पर सेरेमोनियल गार्ड द्वारा मुख्य अतिथि को सलामी दी गई। आज के दिन सीमा सुरक्षा बल वीरता एवं कौशल के 55 वर्ष पूरे कर चुका है स्वतन्त्रता के पश्चात देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए विशिष्ट बलों की जरूरत नहीं महसूस की गई थी। 

1962 के भारत-चीन युद्ध और तम्पश्चात कच्छ में पाकिस्तान की दखलंदाजी के बाद बदली हुई परिस्थितियों में बल की स्थापना 1 दिसम्बर 1965 को प्रथम महानिदेशक के एफ रुस्तमजी, आईपीएस (इंडियन पुलिस कैडर) के नेतृत्व में देश की पाकिस्तन से लगती सीमाओं की निगरानी के लिए हुई थी। विशिष्ट बलों के गठन के पूर्व, भारत और पडोसी देशें से लगती सीमाओं की देखरेख राज्य सशस्त्र बलों द्वारा होती थी। बीएसएफ का गठन 25 बटालियन के साथ शुरू किया गया जिसमें मुख्यत: विभिन्न राज्यों की सश्स्त्र पुलिस बल स्वेच्छ से शामिल हुए। आज यह बल विकसित होकर 191 बटालियन तक पहुंच चुका है और 7419.7 किमी. लम्बी पाक और बांग्लादेश की सीमाओं को सुरक्षित रखने की महती जिम्मेवारी इसके पास है। उत्तर की दुर्गम गगनचुम्बी हिमाच्छादित पहाडियों की हाड कॅपाती ठंड, थार रेगिस्तान की चिलचिलाती धूप, पूर्वाचल की विषम परिस्थितियों व कच्छ की सपाट दलदली जमीन सभी जगहों पर सीमा सुरक्षा बल के जवान दिन-रात कल्पनातीत दुरूह परिस्थितियों का पूरी जीवटता के साथ सामना  कर देश की सीमाओं को अक्षुण्ण और सुरक्षित रखने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को सर्वदा तत्पर खडे है। 

आज बल के पास खुद का तोपखाना, जल  शाखा तथा वायु शाखा है और शायद विश्व में अपने प्रकार का इकलौता सीमा सुरक्षा बल है। अपने 55 साल के गौरवमयी इतिहास में सुरक्षा बल की कई उपलबधियाँ खास रहीं हैं। सीमाओं की सुरक्षा और सीमावर्ती निवासियों में विश्वास की भावना पैदा करना इस सोच के साथ बल का गठन किया गया था और इतिहास गवाह है कि बल ने अपने मूलभूत कसोटियों पर अपेक्षाओं से ज्यादा अपने आपको सर्वदा प्रमाणित किया है। अपने शैशवकाल में, 1971 के युद्ध के दैरान सीमा सुरक्षा बल के योगदान को कोई भूल नही सकता। बीएसएफ ने 1971 में भारत-पाक युद्ध में सक्रिय हिस्सा लिया और 339 अलंकरण एवं वीरता मेडल प्राप्त किए। सन् 1999 में ऑप्स विजय फिर ऑप्स पराक्रम जैसी कठिन परिस्थितियों में सीमा सुरक्षा बल ने भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरहदों पर कार्य किया। 

इसके अलावा जब कभी देश को बल की सेवाओं की जरूरत महसूस हुई है, इसने अपनी उत्कृष्ट सांगठनिक कार्यक्षमता और जवानों के अप्रतिम जीवट और साहस की बदौलत  सर्वदा अपेक्षाओं पर खरे उतरने और कम समय में अपनी एक विशिष्ट और विश्वशनीय पहचान बनाने में सफल रही है। श्री रामअवतार, महानिरिक्षक/संयुक्त निदेशक अकादमी ने कार्मिकों को संबोधित करते हुए समस्त बीएसएफ कार्मिकों एवं उनके परिवारजनों को सी.सु. बल स्थापना दिवस की हार्दिक शुभाकामनाएं दी और कहा कि बीएसएफ आज सीमाओं की सुरक्षा से लेकर काउंटर इन्सरजेन्सी, आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी तथा नक्सल विरोधी अभियान तें अपना अहम योगदान दे रही है। पूरी दुनिया के सबसे बडे बॉर्डर गार्डिंग फोर्स का खिताब हासिल करने वाला यह बल, अपने उत्कृष्ट सीमा प्रबंधन के लिए विश्व विख्यात है। संयुक्त निदेशक अकादमी ने समस्त प्रहरियों एवं प्रशिक्षुओं से अपील की कि देश की सुरक्षा की महती जिम्मेवारी हमारे पास है और जरूरी है कि देशहित को सर्वोपरि रखते हुए देश की सुरक्षा एवं विकास में हम सभी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।