औरंगाबाद हादसे पर बोले कमलनाथ...

वल्लभ भवन से बाहर निकलें शिवराज तब दिखेगी दावों की हकीकत : कमलनाथ 


भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने औरंगाबाद की घटना पर दुख प्रकट करते हुए शिवराज सरकार पर निशाना साधा है. कमलनाथ ने एक बयान जारी कहा, 'महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया जिले के मजदूर भाइयों के साथ हुई रेल दुर्घटना बेहद दुखद है. इसमें 16 लोगों की मृत्यु हुई है और कई मजदूर भाई घायल हैं. हमारी मांग पर शिवराज सरकार ठोस कार्ययोजना बनाती तो ऐसा हादसा नहीं होता.'

कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री वल्लभ भवन छोड़कर प्रदेश की सीमाओं और राजमार्गों पर जाएं तक उन्होंने उनकी परेशानी दिखेगी. उन्होंने कहा, 'मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि एक बार वल्लभ भवन से निकलकर सड़कों पर जाएं और मजदूरों की स्थिति अपनी आंखों से देख लें. शायद उनको अपनी सरकार के बड़े-बड़े दावों की हकीकत खुद पता चल जाए. रेल हादसे में 16 मजदूरों की मौत दुर्घटना नहीं, ये मजदूर लापवाही की भेंट चढ़े हैं. घटना के जिम्मेदार और लापरवाही बरतने वाले दोषियों पर कार्रवाई होना चाहिए.'

उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से औरंगाबाद रेल हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की. कमलनाथ ने मांग की कि हादसे में घायलों के बेहतर इलाज और मृतकों के परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए. आपको बता दें कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मध्य प्रदेश के 16 मजदूरों की मालगाड़ी से कटकर उस वक्त मौत हो गई जब वे पैदल चलने के कारण थककर रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे.

कमलनाथ ने कहा, 'शिवराज सरकार 1 लाख से अधिक मजदूरों को दूसरे राज्यों से वापस लाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है. लेकिन सच्चाई इसके पूरी तरह विपरीत है. आज भी प्रदेश की सीमाओं और राजमार्गों को देख लें, मजदूरों से भरे पड़े हैं. कोई हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर की ओर जा रहा है, कोई साइकिल से, कोई ऑटो से, कोई ट्रकों की छत पर सवार होकर, कोई सीमेंट कंक्रीट मिक्सर में छिपकर.'

उन्होंने कहा, 'इस सफर के दौरान भूख-प्यास के कारण कईयों ने दम तोड़ दिया, गर्मी की भीषण मार नहीं सहन कर पाए और उनकी मृत्यु हो गई. शिवराज सरकार की कोई ठोस कार्ययोजना अभी तक नहीं बनी है. सिर्फ दावे बड़े-बड़े किए जा रहे हैं. सैकड़ों स्वयंसेवी संगठन प्रदेश की सीमाओं पर, विभिन्न राजमार्गों पर मजदूरों को अपनी ओर से खाना खिला रहे हैं, कोई उन्हें चप्पलें भेंट कर रहा है, कोई पानी पिला रहा है, ऐसी तस्वीरें हम रोज देख रहे हैं. सरकार का कोई इंतजाम नहीं है.'